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हमीरपुर: पूर्व सीएम धूमल बोले- संसाधन जुटाए बगैर वायदे पूरा करना मुश्किल

Sat, 18 Mar 2023 06:30 PM IST
अरविन्द ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 18 Mar 2023 06:30 PM IST
सार

पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि जब जेब में एक खिलौना खरीदने के लिए भी पैसे न हों तब महलों के सपने दिखाना, ऐसी घोषणाएं करना, उसका कोई लाभ नहीं होता।

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former cm prem kumar dhumal statement on Himachal Budget 2023
पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

संसाधन जुटाए बगैर वायदे पूरे करना मुश्किल हैं। ऐसे वायदे करने से बचना चाहिए और जब किए हों, तब निभाने चाहिए। यह बात वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तुत बजट के ऊपर प्रतिक्रिया देते हुए कही। धूमल ने कहा कि शुक्रवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की ओर से प्रस्तुत किए गए अपने पहले बजट से बहुत से लोगों को बहुत सी अपेक्षाएं थीं। कुछ की अपेक्षाएं पूरी हुईं और कुछ की पूरी नहीं हुईं।

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स्वभाविक है कि जब संसाधन कम हों तो किस को क्या दिया जा सकता है, यह प्रश्न उठता ही है। बजट में हिमाचल प्रदेश को जो ग्रीन स्टेट बनाने का लक्ष्य रखा गया है, वह सराहनीय है। पूर्व मुख्यमंत्री ने बजटीय आंकड़ों को चिंता पैदा करने वाला बताया है। उन्होंने कहा कि अन्य देनदारियों बहुत हैं, जैसे कि वेतन, पेंशन और ब्याज इत्यादि। इन सबके बाद विकास के लिए बहुत कम पैसा बचता है। पूंजीगत निवेश के लिए कम पैसा बच रहा है।
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ऊपर से दस हजार करोड़ के बराबर कर्मचारियों के एरियर बताए गए हैं, उन्हें कैसे अदा किया जाएगा। और साथ में ही 9,900 करोड़ रुपये का वित्तीय घाटा भी है, जो बजट का लगभग 4.61 फीसदी बनता है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी चीजों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के विकास को गति देने के लिए केंद्र की योजनाओं का लाभ उठाना आवश्यक है, लेकिन खुले मन से यह मानना होगा कि यह योजना केंद्र सरकार की हैं।
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जैसे की हर मेडिकल कॉलेज के साथ नर्सिंग कॉलेज बनाने की योजना केंद्र सरकार ने अपने बजट में रखी है और अनेकों योजनाएं हैं जिनको मुख्यमंत्री ने अपने बजट में शामिल किया है, लेकिन उनका नाम बदल दिया है। इससे कोई लाभ नहीं होता और नाम बदलना उचित भी नहीं लगता। पूर्व मुख्यमंत्री ने एक शायर का जिक्र करते हुए कहा कि, दिखा रहा है ख्वाब महलों के, एक खिलौना खरीदने के लिए जेब में पैसे नहीं हैं।


जब जेब में एक खिलौना खरीदने के लिए भी पैसे न हों तब महलों के सपने दिखाना, ऐसी घोषणाएं करना, उसका कोई लाभ नहीं होता। कुल मिलाकर बजट में ऐसा प्रयास किया गया है कि सब को राहत पहुंचाई जाए। प्रदेश की 32 लाख महिलाओं के साथ जो वायदा किया गया था कि उन्हें हर महीने 1,500 रुपये देंगे, वो अब केवल दो लाख इकत्तीस हजार महिलाओं तक सिमट गया है। इससे राहत नहीं होगी और लाभार्थियों का चयन कैसे होगा, उसमें भी भेदभाव होगा। तो ऐसी बातें करने से पहले सोचना चाहिए और जब वायदा किया हो तो उसे निभाना चाहिए।

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