भाजपा के पूर्व विधायकों को जल्द मिल सकते हैं ओहदे
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पिछले विधानसभा चुनाव में जिन भाजपा विधायकों के टिकट कटे थे, उनमें से कुछ को बोर्डों-निगमों या अन्य स्वायत्त सार्वजनिक उपक्रमों में अध्यक्षों और उपाध्यक्षों जैसे ओहदे दिए जा सकते हैं। पांच सिटिंग विधायकों के पिछले चुनाव में टिकट कटे थे।
इनमें चार पूर्व विधायकों को लोकसभा चुनाव को देखते हुए तोहफे मिल सकते हैं। कुछ पूर्व विधायक तो पार्टी में निष्ठा की दुहाई देते हुए केंद्रीय नेतृत्व तक दबाव डाल रहे हैं। इस पर फैसला मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को लेना है।
सीएम नवरात्र में बोर्डों-निगमों में नियुक्तियां करने के संकेत दे चुके हैं। जिन लोगों को ओहदे मिलने की आशा है, उनमें ये पूर्व विधायक भी हैं। अर्की से दो बार भाजपा विधायक रहे गोविंद राम शर्मा और झंडूता से पूर्व विधायक तथा पूर्व विस उपाध्यक्ष रिखीराम कौंडल के पिछले विस चुनाव में टिकट कट गए थे।
इंदौरा से निर्दलीय विधायक रहे मनोहर धीमान विस चुनाव से पहले भाजपा के साथ हो लिए थे, मगर बावजूद इसके उन्हें टिकट नहीं मिला। अपने पिता पूर्व शिक्षा मंत्री स्वर्गीय आईडी धीमान के देहांत के बाद भोरंज से उपचुनाव
जीतकर भाजपा विधायक बने उनके बेटे डॉ. अनिल धीमान को भी आम चुनाव में टिकट नहीं दिया गया। चंबा से भाजपा के सिटिंग विधायक बीके चौहान का भी टिकट कटा। नए उम्मीदवारों को टिकट देने के बाद भाजपा झंडूता, इंदौरा, भोरंज और चंबा से चुनाव जीत गई।
क्या कहते हैं पूर्व विधायक
झंडूता से जेआर कटवाल, इंदौरा से रीता धीमान, भोरंज से कमलेश कुमारी और चंबा से पवन नैयर पहली बार भाजपा से विधायक बने। पांचवीं सीट अर्की से भाजपा की हार का कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का यहां से चुनाव लड़ना बताया जाता रहा है।
हालांकि, वीरभद्र सिंह को नए उम्मीदवार रत्न सिंह पाल ने भाजपा के सिटिंग विधायक गोविंद राम शर्मा को प्रचार में साथ लेकर करीब 6 हजार वोटों के मार्जिन से कड़ी टक्कर दी। ऐसे में ये पूर्व विधायक विधानसभा चुनाव के वक्त के अपने बलिदान को याद करवा रहे हैं और अपने लिए ओहदे चाह रहे हैं।
पूर्व विधायक गोविंद राम शर्मा का कहना है कि पार्टी उनके इस बलिदान से वाकिफ है। उन्हें इसका रिवार्ड जरूर मिलेगा। रिखीराम कौंडल ने कहा कि पार्टी जो ठीक समझेगी, उन्हें मंजूर होगा। मनोहर धीमान का कहना है कि उन्होंने प्रमुख नेताओं से बात की है।
उम्मीद है कि कोई न कोई पॉजिशन जरूर मिलेगी। डॉ. अनिल धीमान ने कहा कि पार्टी का आदेश मानते हुए उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को शानदार जीत दिलाई। औपचारिक तरीके से उन्होंने कुछ नहीं मांगा, मगर सरकार को जरूर सोचना चाहिए।