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बंदरों को मारने के लिए अब प्रदेश सरकार ने उठाया ये कदम

Tue, 11 Apr 2017 01:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Tue, 11 Apr 2017 01:00 PM IST
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Forest department will make eco task force to solve the problem of monkeys

प्रदेश में शिमला समेत 68 तहसीलों में वर्मिन घोषित बंदरों को मारने के लिए अब वन विभाग ईको टास्क फोर्स का गठन करेगा। यह फैसला सोमवार को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में वन्य प्राणी तथा बंदरों की समस्या से निपटने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की बैठक में लिया गया।

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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि धार्मिक भावनाओं के चलते लोग बंदरों को मारना नहीं चाहते। इसलिए यह कार्य राज्य वन विभाग की ओर से गठित ईको टास्क फोर्स को सौंपा जाएगा। साथ ही नेशनल हाईवे, गांवों और अन्य शहरों में भी बंदरों से निपटने के लिए विशेष दल गठित किए जाएंगे।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि बंदर फसलों और फलों को बड़ा नुकसान पहुंचाने के अलावा बच्चों और महिलाओं पर हमला कर रहे हैं, इसलिए सरकार ने शिमला के नजदीक रेस्क्यू सेंटर फॉर लाइफ केयर खोलने का निर्णय लिया है। इसके अलावा मादा बंदरों में गर्भ निरोधक गोलियां से प्रजनन पर नियंत्रण लगाने के प्रयास भी किए जाएंगे।
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बैठक में डलहौजी से विधायक आशा कुमारी ने राष्ट्रीय उच्च मार्गों पर बंदरों को खाद्य पदार्थ खिलाने पर कानूनी कदम उठाने की सलाह दी। कहा कि बंदरों तथा अन्य जंगली जंतुओं के उत्पात से निपटने के लिए एक स्थायी समाधान की आवश्यकता है। अतिरिक्त मुख्य सचिव तरुण कपूर ने कहा कि नसबंदी किए गए बंदरों की पहचान के लिए उनके माथे के बीच स्थायी टैटू उकेरे जाएंगे।

भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय को 53 तहसीलों तथा उप तहसीलों की सूची भेजी गई है, जहां किसानों तथा बागवानों को राहत देने के लिए बंदरों को नाशक जीव घोषित किया जा सकता है। जल्द ही भारतीय वन्य प्राणी संस्थान देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में जंगली सूअर, सांभर तथा नील गाय को वर्मिन घोषित करने के लिए एक सर्वेक्षण किया जाएगा।

बैठक में सीपीएस नंद लाल, विधायक संजय रतन, जय राम ठाकुर, सुरेश भारद्वाज, राज्य वन निगम के उपाध्यक्ष केवल सिंह पठानिया, मुख्य सचिव वीसी फारका, प्रधान मुख्य अरण्यपाल एसएस नेगी, कोयंबटूर तमिलनाडु के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. होनावली एन कुमारा, वाइल्ड लाइफ  इंस्टीट्यूट ऑफ  इंडिया के वैज्ञानिक कुंवर कुरैशी उपस्थित रहे।

1.25 लाख बंदरों की हो चुकी है नसबंदी
पीसीसीएफ वन्य प्राणी एसके शर्मा ने बताया कि 2015 में किए गए सर्वेक्षण के आधार पर बंदरों की कुल संख्या 2,07,614 है। बताया कि अब तक 1,25,266 बंदरों की नसबंदी की जा चुकी है। डीएफओ की देखरेख में हर वृत्त में गठित त्वरित कार्रवाई दलों को


बंदरों की नसबंदी करने तथा इन्हें परिवहन पिंजरों तक लाने के लिए ट्रैंकोलाइजर गन प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि जाखू मंदिर में बंदरों के लिए एक आहार स्थल स्थापित किया जा रहा है।

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