इस अफसर ने लालू को पहुंचाया सलाखों के पीछे, सजा मिलने पर जताई बेहद खुशी
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बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के चारा घोटाले को उजागर करने वाले सीएजी के पूर्व महानिदेशक नंद लाल ने कोर्ट के फैसले को संतोषजनक बताया है।
हिमाचल में धर्मशाला के घेराह निवासी नंद लाल ने अमर उजाला ने बातचीत में कहा, पूरी टीम ने घोटाले के सबूतों का पुलिंदा तैयार करने के लिए कड़ी मेहनत की थी।
इसका श्रेय किसी एक को नहीं, पूरी टीम को रहा। नंद लाल ने कहा, ‘हम दिन रात इस केस पर लगे रहे थे। तथ्यों में घोटाले को साबित करने के लिए दस्तावेजों का पुलिंदा तैयार किया गया। फैसले ने साबित कर दिया है कि जो गलत काम करेगा उसे सजा मिलना तय है।’
नंद लाल ने कहा, हाईप्रोफाइल मामले की जांच में जुटे अफसरों और मुलाजिमों की सुरक्षा का पहलू भी महत्वपूर्ण होता है। टीम की कड़ी मेहनत आखिरकार रंग लाई है। इस केस में सच सामने लाने और उसे साबित करने के लिए मीडिया की भूमिका भी सहयोगात्मक रही।
शिमला के जीईक्यूडी में भी हो चुकी चारा घोटाले के दस्तावेजों की जांच
बहुचर्चित चारा घोटाले की जांच शिमला की सरकारी परीक्षक प्रश्नास्पद प्रलेख (जीईक्यूडी) प्रयोगशाला में भी हो चुकी है। जीईक्यूडी से जुडे़ सूत्रों ने बताया कि इस प्रयोगशाला में इस घोटाले से जुडे़ हुए कुछ दस्तावेजों की छानबीन की जा चुकी है।
इसमें आरोपियों के कई हस्ताक्षरों और लिखावटों का मिलान किया गया है। ऐसे दस्तावेजों ने ही इस मामले में सजा दिलवाने में काफी भूमिका निभाई है। इसी लैब में जेएमएम घूसखोरी मामले और हवाला केस की भी जांच की जा चुकी है।
हवाला कांड का पर्दाफाश करने के लिए तो ये लैब पहले काफी चर्चित हो चुकी है। शिमला में ये प्रयोगशाला रेलवे बोर्ड बिल्डिंग में चल रही है। इसमें हाथ की लिखावटों और हस्ताक्षरों के नमूनों का मिलान किया जाता है।
ये फोरेंसिक प्रयोगशाला केंद्र सरकार के नियंत्रण में है। यह प्रयोगशाला ब्रिटिशकाल से ही अस्तित्व में रही है। अंग्रेजों के शासनकाल में इसे वर्ष 1904 में खोला गया था। बाद में ये केंद्रीय फोरेंसिक प्रयोेगशाला चंडीगढ़ के तहत लाई गई।