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सरकारी बिक्री केंद्रों में लक्ष्य के मुकाबले पांच प्रतिशत बिका गेहूं
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। हिमाचल प्रदेश में इस साल गेहूं बिक्री के लिए कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) की ओर से तैयार किए 11 बिक्री केंद्रों में लक्ष्य के मुकाबले केवल पांच प्रतिशत गेहूं की ही खरीद हो पाई है। सरकार ने इस बार बिक्री केंद्रों में किसानों की सुविधाओं के लिए अतिरिक्त बंदोबस्त किए हुए थे। इसके बावजूद किसानों ने बिक्री केंद्रों की बजाय व्यापारियों को फसल बेचना या उसे स्टॉक करना बेहतर समझा।
इस साल एपीएमसी ने प्रदेश भर के बिक्री केंद्रों में छह लाख क्विंटल गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा, लेकिन 15 अप्रैल से 15 जून तक चली खरीद प्रक्रिया में केवल 29,314 क्विंटल गेहूं ही खरीदा जा सका। किसान बिक्री केंद्रों में फसल न बेचने का कारण सरकारी औपचारिकताओं को बता रहे हैं। उनका कहना है कि इसमें उनका अधिक समय नष्ट होने के साथ परेशानी का भी सामना करना पड़ता है।
जानकारी के अनुसार प्रदेश में इस साल गेहूं खरीद के लिए सिरमौर में तीन, सोलन में दो, ऊना में दो, कांगड़ा में तीन और बिलासपुर में एक बिक्री केंद्र तैयार किया गया। इसमें सिरमौर में डेढ़ लाख क्विंटल गेहूं का लक्ष्य था और खरीद केवल 17,946 (12 प्रतिशत) क्विंटल गेहूं की हुई, जोकि प्रदेश में सबसे अधिक है। सोलन में 1.30 लाख क्विंटल खरीद लक्ष्य के मुकाबले 1,249 (0.96 प्रतिशत) क्विंटल गेहूं ही खरीदा गया। ऊना में भी 1.30 लाख क्विंटल गेहूं को खरीदने का लक्ष्य था और केवल 2,117 (1.63 प्रतिशत) क्विंटल गेहूं ही खरीद जा सका।
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कांगड़ा के तीन बिक्री केंद्रों में 1.80 लाख क्विंटल गेहूं खरीदने का लक्ष्य था और खरीद केवल 7695 क्विंटल गेहूं (4.27 प्रतिशत) की हुई। बिलासपुर में 10 हजार गेहूं खरीद का लक्ष्य था और केवल 203 क्विंटल (2.03 प्रतिशत) ही खरीद हो पाई। ऐसे में प्रदेशभर में निर्धारित लक्ष्य छह लाख क्विंटल के मुकाबले केवल 29314 (4.89) प्रतिशत फसल की ही खरीद हो पाई। किसानों का कहना है कि सरकारी बिक्री केंद्रों में ऑनलाइन बुकिंग समेत कई प्रकार की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद फसल खरीदी जाती है। वहीं, व्यापारी घर से फसल उठा रहे हैं और दाम भी अच्छे देते हैं। इसलिए उन्हें बिक्री केंद्रों में जाना घाटे का सौदा लगता है।
उधर, एपीएमसी ऊना के सचिव भूपेंद्र ठाकुर ने बताया कि इस साल बिक्री केंद्रों में उम्मीद के मुताबिक किसान नहीं पहुंचे। कहा कि किसानों की सुविधाओं के लिए केंद्रों में सुधारीकरण प्रक्रिया जारी रहेगी।
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ऊना। हिमाचल प्रदेश में इस साल गेहूं बिक्री के लिए कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) की ओर से तैयार किए 11 बिक्री केंद्रों में लक्ष्य के मुकाबले केवल पांच प्रतिशत गेहूं की ही खरीद हो पाई है। सरकार ने इस बार बिक्री केंद्रों में किसानों की सुविधाओं के लिए अतिरिक्त बंदोबस्त किए हुए थे। इसके बावजूद किसानों ने बिक्री केंद्रों की बजाय व्यापारियों को फसल बेचना या उसे स्टॉक करना बेहतर समझा।
इस साल एपीएमसी ने प्रदेश भर के बिक्री केंद्रों में छह लाख क्विंटल गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा, लेकिन 15 अप्रैल से 15 जून तक चली खरीद प्रक्रिया में केवल 29,314 क्विंटल गेहूं ही खरीदा जा सका। किसान बिक्री केंद्रों में फसल न बेचने का कारण सरकारी औपचारिकताओं को बता रहे हैं। उनका कहना है कि इसमें उनका अधिक समय नष्ट होने के साथ परेशानी का भी सामना करना पड़ता है।
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जानकारी के अनुसार प्रदेश में इस साल गेहूं खरीद के लिए सिरमौर में तीन, सोलन में दो, ऊना में दो, कांगड़ा में तीन और बिलासपुर में एक बिक्री केंद्र तैयार किया गया। इसमें सिरमौर में डेढ़ लाख क्विंटल गेहूं का लक्ष्य था और खरीद केवल 17,946 (12 प्रतिशत) क्विंटल गेहूं की हुई, जोकि प्रदेश में सबसे अधिक है। सोलन में 1.30 लाख क्विंटल खरीद लक्ष्य के मुकाबले 1,249 (0.96 प्रतिशत) क्विंटल गेहूं ही खरीदा गया। ऊना में भी 1.30 लाख क्विंटल गेहूं को खरीदने का लक्ष्य था और केवल 2,117 (1.63 प्रतिशत) क्विंटल गेहूं ही खरीद जा सका।
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कांगड़ा के तीन बिक्री केंद्रों में 1.80 लाख क्विंटल गेहूं खरीदने का लक्ष्य था और खरीद केवल 7695 क्विंटल गेहूं (4.27 प्रतिशत) की हुई। बिलासपुर में 10 हजार गेहूं खरीद का लक्ष्य था और केवल 203 क्विंटल (2.03 प्रतिशत) ही खरीद हो पाई। ऐसे में प्रदेशभर में निर्धारित लक्ष्य छह लाख क्विंटल के मुकाबले केवल 29314 (4.89) प्रतिशत फसल की ही खरीद हो पाई। किसानों का कहना है कि सरकारी बिक्री केंद्रों में ऑनलाइन बुकिंग समेत कई प्रकार की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद फसल खरीदी जाती है। वहीं, व्यापारी घर से फसल उठा रहे हैं और दाम भी अच्छे देते हैं। इसलिए उन्हें बिक्री केंद्रों में जाना घाटे का सौदा लगता है।
उधर, एपीएमसी ऊना के सचिव भूपेंद्र ठाकुर ने बताया कि इस साल बिक्री केंद्रों में उम्मीद के मुताबिक किसान नहीं पहुंचे। कहा कि किसानों की सुविधाओं के लिए केंद्रों में सुधारीकरण प्रक्रिया जारी रहेगी।