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हिमाचल विधानसभा: आज सदन में रखे जाएंगे ये 5 अहम विधेयक

Fri, 26 Aug 2016 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 26 Aug 2016 12:03 AM IST
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Five bills will be represented at HP Vidhan Sabha.

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को सदन के पटल पर पांच विधेयकों को रखा जाएगा। एक विधेयक मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, दो स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर और दो अन्य विधेयक शहरी विकास मंत्री रखेंगे।

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ये सभी विधेयक मानसून सत्र के आखिरी दिन शनिवार को पारित किए जाएंगे। इन विधेयकों के पारित होने के बाद प्रदेश में कई तरह के नए कानूनी प्रावधान अस्तित्व में आएंगे। केंद्रीय कानून कोटपा की तरह ही सिगरेट और बीड़ी की खुली बिक्री को हिमाचल सरकार का अपना कानून भी जुर्म मानेगा।
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नशीली दवाओं की बिक्री पर के खिलाफ कानून कड़ा होगा। नगर निकायों का 22 साल पुराना कानून बदला जा रहा है। इन निकायों में करों की बढ़ोतरी और अन्य प्रावधान होंगे। शिमला में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना का बिल भी पारित होगा। 

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ये होंगे पहले तीन विधेयक

Five bills will be represented at HP Vidhan Sabha.

पहला विधेयक  
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्ववविद्यालय विधेयक 2016 को सदन के पटल पर रखेंगे। सीएम वीरभद्र सिंह प्रस्ताव करेंगे कि विद्या, अध्यापन, अनुसंधान की अभिवृद्धि और विधि के क्षेत्र में ज्ञान के प्रसार के लिए हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय शिमला के नाम से एक यूनिवर्सिटी की स्थापना करने के लिए विधेयक को पेश करने करने की मंजूरी दी जाए। राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना शिमला के घंडल में की जा रही है। इसे खोलने के लिए हिमाचल सरकार ने अध्यादेश लाया था। अब इस अध्यादेश को बिल के रूप में पारित किया जाएगा।

दूसरा विधेयक
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर सदन में ये प्रस्ताव करेंगे कि हिमाचल प्रदेश में हिमाचल प्रदेश में खुली सिगरेट और बीड़ियों की बिक्री को प्रतिबंधित करने, सिगरेटों और अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री का कानून बनाने और उनसे संबंधित विषयों के लिए विधेयक को पेश करने की अनुमति दी जाए।

सूत्रों ने बताया कि इस बिल के पारित होने के बाद हिमाचल में खुली सिगरेट और बीड़ी की बिक्री पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगेगा। ऐसा करना कानूनन जुर्म होगा। इसके लिए सजा का प्रावधान होगा। शैक्षणिक संस्थानों के निकट तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर भी रोक लगेगी। रिटेल विक्रेताओं के लिए स्थानीय निकायों या पंचायतों में पंजीकरण करना जरूरी किया जाएगा। इसके लिए विक्रेताओं को शुल्क देने की व्यवस्था की जा रही है।
 
तीसरा विधेयक
हिमाचल प्रदेश औषधि एवं प्रसाधन सामग्र्री संशोधन विधेयक 2016 को भी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर सदन के पटल पर रखेंगे। इसके लिए वर्ष 1940 में बने कानून में संशोधन किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि इसमें मादक दवाओं की दवा दुकानों पर होने वाली बिक्री और बाहर की जाने वाली सप्लाई के कानून को कड़ा किया जाएगा, जिससे कि इससे संबंधित अपराधों को रोका जा सके। इसके लिए जुर्माने और अन्य सजा को कड़ा किया जाएगा। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पहले ये बात कह चुके हैं कि नशाखोरी के खिलाफ कानून को कड़ा किया जाएगा।

ये हैं बाकी दो विधेयक

Five bills will be represented at HP Vidhan Sabha.

चौथा विधेयक
शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा हिमाचल प्रदेश नगरपालिका संशोधन अधिनियम 2016 को भी शुक्रवार को सदन के पटल पर रखेंगे। वर्ष 1994 के अधिनियम को संशोधित कर इसमेें कुछ नए प्रावधान जोड़े जाएंगे। संशोधन विधेयक में नगर परिषदों और नगरपालिकाओं में कई तरह के करों में वसूली जाने वाली राशि का प्रावधान होगा। विधेयक पारित हुआ तो अधिक जनसंख्या वाले स्थानीय निकायों में मनोनीत सदस्यों की संख्या को भी तीन से बढ़ाकर पांच किया जाएगा। इसमें पालतू जानवरों का पंजीकरण करने का प्रावधान करने, विज्ञापन पट्टिकाओं को लगाने के नियम बनाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों को सजा का प्रावधान होगा।

पांचवां विधेयक
शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा हिमाचल प्रदेश नगरपालिका संशोधन विधेयक 2016 को विधानसभा में रखेंगे। इस प्रक्रिया के तहत भी वर्ष 1994 में बनाए गए कानून में संशोधन किया जाएगा। इसमें हिमाचल प्रदेश के दो नगर निगमों शिमला और धर्मशाला के तहत आने वालों क्षेत्रों के कायदे-कानून को कड़ा किया जाएगा। अब इन नगर निगमों में मनोनीत पार्षदों की संख्या को तीन से बढ़ाकर पांच किया जा रहा है। पालतू पशुओं के पंजीकरण, विज्ञापन पट्टिकाओं को लगाने के नियमों को बनाने और इनका उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध भी दंड का कड़ा प्रावधान होगा।

सरकार की बड़ी लापरवाही, शिलान्यास के तीन साल बाद भी भूमि हस्तांतरण नहीं

Five bills will be represented at HP Vidhan Sabha.

इसे सरकार की लापरवाही समझें या फिर सरकारी सिस्टम की पेचीदगी। वजह जो भी हो, लेकिन भुंतर में तहसील भवन और टूरिस्ट इन्फार्मेशन सेंटर के शिलान्यास के तीन साल बाद भी अब तक भवन के लिए जमीन हस्तांतरण नहीं हो सका है। हालात यह है कि मुख्यमंत्री द्वारा शिलान्यास के तीन साल बाद भी अब तक जमीन हस्तांतरण के लिए सिर्फ कागजी कार्रवाई चल रही है।

सरकार ने यह जानकारी विधानसभा में कुल्लू से विधायक महेश्वर सिंह के सवाल के जवाब में दी। सरकार ने बताया कि तहसील कार्यालय के लिए उपयोग की जाने वाली भूमि वन विभाग की होने की वजह से लैंड डायवर्जन की स्वीकृति विभाग से लेनी है, लेकिन साल 2012-13 में हुए इस शिलान्यास के साढ़े तीन साल बाद भी आपत्तियों को दूर कर सरकार तथा विभाग स्वीकृति नहीं दे सका।

पर्यटक सूचना केंद्र के लिए भी लैंड डायवर्जन की स्वीकृति पर्यटन विभाग के पक्ष में भारत सरकार के वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वन अनुसंधान संस्थान देहरादून द्वारा सैद्धांतिक मंजूरी 12 जनवरी 2016 को दे दी गई, लेकिन इसके बाद से अब तक मामले की फाइल प्रदेश वन विभाग के दफ्तर की धूल फांक रही है।

केंद्र से प्रदेश की 154 सड़कों को फॉरेस्ट क्लीयरेंस

Five bills will be represented at HP Vidhan Sabha.

केंद्र सरकार ने तीन साल के भीतर हिमाचल की 154 सड़कों को फॉरेस्ट क्लीयरेंस की मंजूरी दी है। इनमें सर्वाधिक 22 सड़कें जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र की हैं। आनी की 8, चुराह - 4 और शिमला और ठियोग विधानसभा क्षेत्र की 3-3 सड़कों को फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिली है। इनमें अधिकांश सड़कों को फाइनल अप्रूवल, जबकि कइयों को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है।

जुब्बल-कोटखाई की 22 सड़कों को फाइनल अप्रूवल मिली है। इनमें अधिकांश सड़कों का काम पूरा कर लिया है, जबकि अन्य सड़कों का काम इसी वर्ष पूरा होने की संभावना है। सीपीएस रोहित ठाकुर ने बताया कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के प्रयासों से ही इन सड़कों को फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिली है। जुब्बल-कोटखाई में सर्वाधिक सेब की फसल होती है। ऐसे में मुख्यमंत्री ने सड़कों के निर्माण पर ज्यादा जोर दिया था। कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री रामलाल ठाकुर का भी पहाड़ों क्षेत्रों को सड़क से जोड़ना प्राथमिकता रही है।

10 सड़कों का मामला विचाराधीन
सीपीएस रोहित ठाकुर ने बताया कि विधानसभा क्षेत्र में 10 और सड़कों का निर्माण होना है। ये सड़कें राज्य सरकार के बजट से बनेंगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत शेष गांव को भी अगली साल तक सड़क सुविधा से जोड़ा जाना है। यह मामला मुख्यमंत्री के विचाराधीन है।

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