फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   first time in the state, the conservation of Brown trout fish

प्रदेश में पहली बार होगा ब्राउन ट्राउट फिश का संरक्षण

Fri, 04 Apr 2014 07:09 PM IST
भूपेंद्र राणा/ अमर उजाला, मंडी
भूपेंद्र राणा/ अमर उजाला, मंडी Updated Fri, 04 Apr 2014 07:09 PM IST
विज्ञापन
first time in the state, the conservation of Brown trout fish

लाहौल-स्पीति जिले में 14 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर प्राकृतिक रूप से बनी चंद्रताल लेक में पहली बार ब्राउन ट्राउट फिश का संरक्षण होगा। ठंडे और ताजे पानी में रहने वाली ब्राउन ट्राउट यूरोपीय प्रजाति है।

विज्ञापन


इसका वैज्ञानिक नाम सालमो ट्रूटा है। ट्राउट फिश में शत-प्रतिशत प्रोटीन और विटामिन होने से सेहत के लिए काफी फायदेमंद रहती है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मार्केट में ट्राउट फिश की काफी डिमांड है।
विज्ञापन


ट्राउट फिश के प्राकृतिक तौर पर संरक्षण के साथ ही पर्यटकों को आकर्षित करने के मकसद से मत्स्य विभाग ने पहली बार चंद्रताल झील में ब्राउन ट्राउट के संरक्षण की योजना बनाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


मध्य हिमालय क्षेत्र ग्लेशियरों के बीच प्राकृतिक रूप से बनी इस झील में ब्राउन ट्राउट फिश के लगभग तीन हजार बच्चे डाले जाएंगे।

बरोट फिश फार्म में ब्राउन ट्राउट का सीड तैयार

first time in the state, the conservation of Brown trout fish

विभाग की ओर बरोट फिश फार्म में ब्राउन ट्राउट का सीड तैयार किया गया। ब्राउन ट्राउट फिश प्राकृतिक वातावरण को पसंद करती है। इसके लिए पानी ठंडा और बहता हुआ होना चाहिए।

यह प्रजाति कृत्रिम फीड नहीं लेती, बल्कि मांसाहारी है। तभी यह ब्राउन ट्राउट मछली जीवित रह सकती है। यूरोप की तरह प्राकृतिक कल्चरल होने से अभी तक मंडी जिले के बरोट में ही इस ब्राउन ट्राउट का संरक्षण किया जा रहा है।

ऊहल और लंबाडग नदियों में इस प्रजाति की मछली का संबर्धन किया जाता है। ब्राउन फिश की ग्रोथ कृत्रिम रूप से बने तालाब में नहीं होती है।

चंद्रताल लेक से चंद्र और भागा दो नदियों का उद्गम होता है, जो तांदी में आपस में मिलती हैं। यही नदी आगे चलकर पाकिस्तान में चिनाब नदी के नाम से है।

कोलेस्ट्रॉल कम करने में फायदेमंद

first time in the state, the conservation of Brown trout fish

मत्स्य विभाग के सहायक उप निदेशक महेश कुमार का कहना है कि ब्राउन ट्राउट फिश ऐसी प्रजाति की मछली है, जिसे प्राकृतिक माहौल चाहिए।

इस प्रजाति को बढ़ावा देने के साथ एंगलिंग (मछली पकड़ना) के लिए देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित के उद्देश्य से लाहौल-स्पीति के चंद्रताल लेक में भी ब्राउन ट्राउट के बच्चे डाले जाएंगे।

ब्राउन ट्राउट फिश में फैट की मात्रा शून्य के बराबर होती है। इस प्रजाति की मछली में प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व काफी मात्रा में होते हैं, जो हार्ट के मरीजों और कोलेस्ट्रॉल कम करने में फायदेमंद हैं।

इस मछली की बाजार में काफी डिमांड है। प्रति किलो 450 से 500 रुपये तक बिकती है। ब्राउन ट्राउट नेचुरल माहौल में ही ग्रोथ करती है।

खास बात यह है कि यह मछली मांसाहारी है और जीवित जीव जंतुओं को अपना भोजन बनाती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed