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Shimla News: डेंटल कॉलेज में पहली दोनों जबड़ों का सफल प्रत्यारोपण
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दस घंटे लगातार चला मरीज का ऑपरेशन
मरीज की सेहत में सुधार, कल हो जाएगी छुट्टी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजकीय दंत महाविद्यालय एवं चिकित्सालय शिमला में एक मरीज के दोनों जबड़ों का सफल प्रत्यारोपण किया है। डेंटल कॉलेज का दावा है कि हिमाचल में इस तरह का प्रत्यारोपण पहली बार हुआ है।
अब तक केवल एक-एक जबड़े का ही प्रत्यारोपण किया जाता था। लेकिन इस उपलब्धि के बाद आने वाले समय में इस तरह से और भी प्रत्यारोपण की संभावना डेंटल कॉलेज में बढ़ गई है। राजकीय दंत महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में लखनऊ का रहने वाला 22 वर्षीय मरीज मुंह न खुलने की समस्या से जूझ रहा था। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज खाना खाने में असमर्थ था। सही तरीके से बोल भी नहीं पाता था। अस्पताल में मरीज का पहले भी उपचार हुआ है था। जून माह में मरीज की समस्या बढ़ी तो वह उपचार के लिए आया। डेंटल कॉलेज के ओरल और मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के डॉ. रंगीला राम ने मरीज का उपचार शुरू किया। मरीज का थ्री डी सीटी स्कैन करवाया गया। इसके बाद लैब में जबड़े तैयार करवाए तथा प्रत्यारोपण किया गया।
ओरल और मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के प्रो. डॉ. रंगीला राम ने बताया कि मरीज के जबड़ों के प्रत्यारोपण को लेकर ऑपरेशन थियेटर में सुबह 10 बजे सर्जरी शुरू हुई और रात आठ बजे पूरी हुई। यह काफी कठिन कार्य है। प्रत्यारोपण के बाद मरीज स्वस्थ है। अब वह तीन सेंटीमीटर तक मुंह खोल पा रहा है। सामान्य लोगों की तरह खाना खा सकता है और बोल सकता है। मरीज को छह जुलाई को अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
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ऑपरेशन में यह टीम रही शामिल
डेंटल कॉलेज में दस घंटे तक चले ऑपरेशन को प्रो. डाॅ. रंगीला राम ने नेतृत्व किया। इनके साथ डॉ. मोनिका परमार, डॉ. नरोत्तम घेज्टा, एनेस्थीसिया डॉ. विवेक कौशल, डॉ. सारांश गुलेरिया, डॉ. विशाखा शर्मा, ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट कृतिका, स्टाफ नर्स रिम्मी और चतुर्थ श्रेणी कर्मी लायक राम ने सहयोग किया। प्रो. डाॅ. रंगीला राम ने बताया कि प्रत्यारोपण में विभाग के अध्यक्ष डॉ. योगेश भारद्वाज ने मार्ग दर्शन किया।
70 हजार रुपये आया खर्चा
शिमला। बताया जा रहा है कि 22 वर्षीय इस युवक के लखनऊ में भी दो ऑपरेशन हुए हैं लेकिन वह फेल हो गए। बीते वर्ष जुलाई माह में यह युवक उपचार के लिए डेंटल कॉलेज आया यहां पर इसका उपचार किया गया। इसके बाद मुंह खोला गया। लेकिन जब दोबारा समस्या बढ़ी तो चिकित्सकों ने प्रत्यारोपण कर समस्या से निजात दिला दी। सर्जरी में मरीज का करीब 70 हजार रुपये खर्चा आया है। यह प्रत्यारोपण निजी अस्पताल में होता तो खर्चा 7 से 10 लाख रुपये आता।
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मरीज की सेहत में सुधार, कल हो जाएगी छुट्टी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजकीय दंत महाविद्यालय एवं चिकित्सालय शिमला में एक मरीज के दोनों जबड़ों का सफल प्रत्यारोपण किया है। डेंटल कॉलेज का दावा है कि हिमाचल में इस तरह का प्रत्यारोपण पहली बार हुआ है।
अब तक केवल एक-एक जबड़े का ही प्रत्यारोपण किया जाता था। लेकिन इस उपलब्धि के बाद आने वाले समय में इस तरह से और भी प्रत्यारोपण की संभावना डेंटल कॉलेज में बढ़ गई है। राजकीय दंत महाविद्यालय एवं चिकित्सालय में लखनऊ का रहने वाला 22 वर्षीय मरीज मुंह न खुलने की समस्या से जूझ रहा था। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज खाना खाने में असमर्थ था। सही तरीके से बोल भी नहीं पाता था। अस्पताल में मरीज का पहले भी उपचार हुआ है था। जून माह में मरीज की समस्या बढ़ी तो वह उपचार के लिए आया। डेंटल कॉलेज के ओरल और मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के डॉ. रंगीला राम ने मरीज का उपचार शुरू किया। मरीज का थ्री डी सीटी स्कैन करवाया गया। इसके बाद लैब में जबड़े तैयार करवाए तथा प्रत्यारोपण किया गया।
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ओरल और मैक्सिलोफेशियल सर्जरी विभाग के प्रो. डॉ. रंगीला राम ने बताया कि मरीज के जबड़ों के प्रत्यारोपण को लेकर ऑपरेशन थियेटर में सुबह 10 बजे सर्जरी शुरू हुई और रात आठ बजे पूरी हुई। यह काफी कठिन कार्य है। प्रत्यारोपण के बाद मरीज स्वस्थ है। अब वह तीन सेंटीमीटर तक मुंह खोल पा रहा है। सामान्य लोगों की तरह खाना खा सकता है और बोल सकता है। मरीज को छह जुलाई को अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
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ऑपरेशन में यह टीम रही शामिल
डेंटल कॉलेज में दस घंटे तक चले ऑपरेशन को प्रो. डाॅ. रंगीला राम ने नेतृत्व किया। इनके साथ डॉ. मोनिका परमार, डॉ. नरोत्तम घेज्टा, एनेस्थीसिया डॉ. विवेक कौशल, डॉ. सारांश गुलेरिया, डॉ. विशाखा शर्मा, ऑपरेशन थियेटर असिस्टेंट कृतिका, स्टाफ नर्स रिम्मी और चतुर्थ श्रेणी कर्मी लायक राम ने सहयोग किया। प्रो. डाॅ. रंगीला राम ने बताया कि प्रत्यारोपण में विभाग के अध्यक्ष डॉ. योगेश भारद्वाज ने मार्ग दर्शन किया।
70 हजार रुपये आया खर्चा
शिमला। बताया जा रहा है कि 22 वर्षीय इस युवक के लखनऊ में भी दो ऑपरेशन हुए हैं लेकिन वह फेल हो गए। बीते वर्ष जुलाई माह में यह युवक उपचार के लिए डेंटल कॉलेज आया यहां पर इसका उपचार किया गया। इसके बाद मुंह खोला गया। लेकिन जब दोबारा समस्या बढ़ी तो चिकित्सकों ने प्रत्यारोपण कर समस्या से निजात दिला दी। सर्जरी में मरीज का करीब 70 हजार रुपये खर्चा आया है। यह प्रत्यारोपण निजी अस्पताल में होता तो खर्चा 7 से 10 लाख रुपये आता।