सरकारी जमीन पर बनी झुग्गियों में भड़की आग, जिंदा जला 6 साल का मासूम
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हिमाचल के बद्दी के औद्योगिक क्षेत्र दवनी में प्रदेश औद्योगिक विकास निगम की जमीन पर बनी अवैध झुग्गियों में आग लगने से छह वर्षीय बालक की जिंदा जलकर मौत हो गई है। हादसा सुबह करीब सवा ग्यारह बजे हुआ। अचानक झुग्गियों में आग फैल गई।
इससे यहां भगदड़ और चीख पुकार मच गई। लोगों ने भागकर जान बचाई। बच्चा हादसे के वक्त झुग्गी में सो रहा था। बताया जा रहा है कि यहां करीब 51 झुग्गियों में लोग रह रहे थे। पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ धारा 285, 336 व 304 ए के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस के मुताबिक मृतक की पहचान बोबी पुत्र प्रताप उत्तर प्रदेश के बदाऊं जिले के सपगांव और थाना बसौली के रहने वाले के रूप में हुई है। 11 बजे के करीब झुग्गियों के साथ कुछ बच्चे खेल रहे थे। अचानक आग एक झुग्गी में लगी और हवा के साथ देखते ही देखते करीब 51 झुग्गियां सुलग गई।
आग लगते ही बच्चों और झुग्गियों में रहने वाले लोगों ने शोर मचाया। भगदड़ मच गई। लोग और बच्चे झुग्गियों से बाहर निकलने लगे। लेकिन बोबी नींद में होने के कारण नहीं जाग पाया। इस कारण वह झुग्गी के अंदर ही जल गया।
दमकल विभाग के पहुंचने तक सब खत्म
सूचना मिलते ही फायर आफिसर प्रकाश के नेतृत्व में फायर ब्रिगेड़ मौके पर पहुंची और आग पर पानी डालना शुरू किया लेकिन तब तक सभी झुग्गियां राख में बदल गई थीं। उनके अनुसार करीब पांच लाख रुपये का नुकसान हुआ है। आग से प्रवासी कामगारों के कपड़े, खाने पीने का सामान, बर्तन और नकदी जलकर नष्ट हो गई।
बच्चे खेल-खेल में लगा सकते हैं आग : डीएसपी
डीएसपी गौरव सिंह ने भी सूचना मिलते ही घटना स्थल का जायजा लिया और प्रभावितों से पूछताछ की। बताया कि नींद में होने के कारण बच्चा समय रहते बाहर नहीं आ पाया। इससे उसकी मौत हो गई है। आग लगने के कारणों का अभी तक कोई पता नहीं चला है।
लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि बच्चों ने खेल खेल में आग लगा दी हो या किसी कामगार के चूल्हे से उठी चिंगारी से आग लगी हो। पुलिस इन सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है।
सरकार या निगम की जमीन, हो रही जांच
प्रशासन की ओर से तहसीलदार केशव राम ने मृतक बच्चे की मां को फौरी राहत के रूप में दस हजार रुपये दिए। दूसरी ओर एचपीएसआईडीसी के अधिशासी अभियंता ने बताया कि यह जमीन उनकी है या सरकार की है, अभी इसकी जांच चल रही है।
175 बीघा जमीन अभी तक सरकार ने विभाग के नाम नहीं की है। इन प्रवासी लोगों को कई बार जमीन से हटाया गया लेकिन दिन में उन्हें हटाया जाता है और रात को वह दोबारा यहां कर बस जाते हैं।