शराब-सिगरेट पीने वालों पर ‘देवता’ लगाते हैं जुर्माना
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छोटी काशी मंडी के देव महाकुंभ में सोने-चांदी के रथों से सुसज्जित सैकड़ों देवी-देवताओं ने डेरा डाला है। ये देवता युवाओं और अन्य लोगों को नशे से दूर रखने के लिए जुर्माना भी लगाते हैं। शराब पीने और धूम्रपान पर पांच हजार से दो हजार तक जुर्माना किया जाता है।
आस्था के समागम छोटी काशी के शिवरात्रि पर्व में शिरकत करने वाले बदार घाटी के देव शुकदेव ऋषि थट्टा शराब के सेवन के बिल्कुल खिलाफ हैं। वहीं, चौहारघाटी के देव हुरंग नायारण और देव पेखरा गहरी भी नशा मुक्त समाज का संदेश दे रहे हैं।
थट्टा गांव में कोई भी व्यक्ति शराब पीकर नहीं जा सकता। अगर कोई व्यक्ति गांव में शराब पीकर जाता है तो देवता उसको पांच हजार रुपये तक जुर्माना भी कर सकता है। वहीं, चौहारघाटी के शिवरात्रि में शिरकत करने आए इन दोनों देवों के रथों पर बाकायदा धूम्रपान के निषेध की पट्टिका भी लगाई गई है।
शराब पीने पर भुगतनी पड़ती है सजा
देव शुकदेव ऋषि थट्टा के वजीर मोहन लाल ने कहा कि गांव में कोई भी व्यक्ति शराब पीकर नहीं आ सकता है। यदि कोई ग्रामीण गलती से भी गांव में शराब पीकर दाखिल होता है तो देवता ऐसे व्यक्ति को जुर्माना करता है। देव शुकदेव ऋषि को देव पराशर ऋषि का पौत्र माना जाता है। थट्टा गांव में कोई भी शराब का सेवन नहीं करता है।
गांव पूरी तरह से नशा मुक्त बन चुका है। वहीं, चौहारघाटी के देव हुरंग नारायण के गुर शंकुराम ने कहा कि देवता धूम्रपान के सख्त खिलाफ हैं। देवता के मंदिर में बीड़ी और सिगरेट लेकर जाना प्रतिबंधित है। देवता के आदेशों का उल्लंघन करने पर दो से ढाई हजार का जुर्माना किया जाता है।
नशा मुक्त अभियान को पंख लगा सकता है देव समाज
प्रदेश में देव समाज की अहम भूमिका है। प्रदेश का बहुत बड़ा तबका इसमें आस्था रखता है। सदियों से नशे के खिलाफ जागरूक करने वाले इन देवों का मार्गदर्शन लिया जाए तो संभव है कि सरकार के नशे के खिलाफ प्रयास को पंख लग जाएं।
देश भर में नामी हस्तियों को अहम अभियानों अथवा विभागों का ब्रांड एंबेसडर बनाया जा रहा है। देवताओं को नशामुक्त प्रदेश अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनाया जाता है तो सरकार के प्रयासों को कामयाबी मिल सकती है।