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बिजली बोर्ड पर बोझ बने अफसरों-कर्मियों के बंद होंगे वित्तीय लाभ, आयोग ने लिया बड़ा फैसला

Sun, 07 Jun 2020 12:01 PM IST
Krishan Singh अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला
अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sun, 07 Jun 2020 12:01 PM IST
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Financial benefits will be stopped of officers and workers who are burdened on Electricity Board
- फोटो : अमर उजाला

बिजली बोर्ड पर बोझ बन चुके अफसरों और कर्मचारियों के वित्तीय लाभ रोके जाएंगे। राज्य विद्युत नियामकआयोग ने बोर्ड की आर्थिक स्थिति सुधारने को शनिवार को जारी अधिसूचना में कड़ा फैसला लिया है। अपनी क्षमता अनुसार काम नहीं करने, संदिग्ध आचरण वाले और बोर्ड के प्रति निष्ठा नहीं रखने वाले अफसरों और कर्मियों के इंसेंटिव रोकने के लिए आयोग ने बिजली बोर्ड प्रबंधन से दो सप्ताह के भीतर प्रस्ताव देने को कहा है।

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बोर्ड के लगातार बढ़ रहे घाटे पर चिंता जताते हुए आयोग ने खर्चे घटाने को तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की भविष्य में भर्तियां आउटसोर्स पर करने की सिफारिश की है। आयोग ने कहा है कि किसी भी विभाग, बोर्ड और संस्था की आर्थिक तरक्की उसके अफसरों और कर्मचारियों की क्षमता, सच्चाई और उत्पादकता पर निर्भर करती है। ऐसे में बिजली बोर्ड को काम करने से कतराने वाले, बिना काम किए वेतन लेने वाले और संदिग्ध आचरण वाले अफसरों और कर्मचारियों को चिन्हित करना चाहिए। बोर्ड को कड़े फैसले लेते हुए ऐसे अफसरों और कर्मियों के इंसेंटिव रोकने चाहिए।
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लग्न के साथ करने वाले स्टाफ को प्रोत्साहन देने के लिए इंसेंटिव देने चाहिए। आयोग ने दो माह के भीतर इस बाबत बनाए गए प्रस्ताव को भेजने के भी बोर्ड प्रबंधन को आदेश दिए हैं। आयोग ने कहा कि हिमाचल की भौगोलिक स्थिति वाले अन्य राज्यों के मुकाबले राज्य बिजली बोर्ड के आपरेशन और मेंटेनेंस खर्चे बहुत अधिक हैं। हिमाचल में इंप्लाइज कास्ट और पेंशन का खर्च भी अधिक है। ऐसे में बिजली बोर्ड को इन खर्चों को कम करने के लिए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती आउटसोर्सिंग से करनी चाहिए। पेंशन का पैसा देने के लिए सरकार से कुछ शेयर लेने का मामला उठाना चाहिए।

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बिजली मीटर चेक करने का शुल्क बढ़ाया

औद्योगिक इकाइयों, होटलों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में अपने बिजली मीटर लगाने वाले उपभोक्ताओं को अब मीटर की जांच करवाने के लिए जेब अधिक ढीली करनी पड़ सकती है। आयोग ने ऐसे बिजली मीटरों की जांच करवाने के शुल्क में कुछ बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है।

हालांकि, इस बढ़ोतरी के लिए आगामी दिनों में अधिसूचना जारी की जाएगी। संभावित है कि इस शुल्क में पांच फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। वर्तमान में लोड के हिसाब से 250 से लेकर 350 रुपये तक यह शुल्क वसूला जाता है।

 वेतन-पेंशन पर हर साल खर्च हो रहे 1809 करोड़
बिजली बोर्ड प्रति वर्ष वेतन और पेंशन देने के लिए एक हजार 809 करोड़ खर्च कर रहा है। इसके अलावा रिपेयर एंड मेंटेनेंस खर्च 99.49 करोड़ और प्रशासनिक और सामान्य खर्चे 50.58 करोड़ प्रस्तावित है।

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