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फैमिली हेल्थ सर्वे में खुलासा, हिमाचल में इस बीमारी के शिकार हो रहे लोग

Fri, 13 Jul 2018 12:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 13 Jul 2018 12:24 PM IST
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Family Health Survey Peoples of Himachal Prades are suffering from anemia

हिमाचल में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के फैमिली हेल्थ सर्वे-4 में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पॉपुलेशन रिसर्च सेंटर ने इस सर्वे को 2015-16 में पूरा किया है। सर्वे में सामने आई सबसे चिंताजनक बात यह है कि हिमाचल के लोग एनीमिया का शिकार हो रहे हैं। यह सर्वे प्रदेश के 9,225 परिवारों पर किया गया है। सर्वे में खून की कमी की दर पिछले सर्वे की तुलना में कुछ आयु वर्ग में अधिक पाई गई है।

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6 महीने से पांच साल तक के बच्चों में एनीमिया की दर 54.4 में आंशिक कमी आई है लेकिन 15 से 49 आयु वर्ग की नॉन प्रेगनेंट महिलाओं में यह दर 43.2 से बढ़कर 53.6 पहुंच गई है। गर्भवती महिलाओं 15 से 49 आयु वर्ग में यह 38.1 से बढ़कर 50.4 हो गई जबकि इसी आयु वर्ग की आम महिलाओं में 43.0 से बढ़कर 53.5 और 15 से 49 आयु वर्ग के पुरुषों में 18.5 से बढ़कर 20.1 तक हो गई है।

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1078 पहुंचा लिंगानुपात

Family Health Survey Peoples of Himachal Prades are suffering from anemia

2005-06 की सर्वे रिपोर्ट की तुलना में लिंगानुपात 1070 से बढ़कर 1078 पहुंचा है। इस सर्वे का लिंगानुपात 2001 की जनगणना के आंकड़ों से कहीं अधिक है। जनगणना में  प्रति एक हजार पुरुष 972 महिलाएं थीं। प्रदेश में महिलाओं में परिवार नियोजन के उपायों के इस्तेमाल में रुचि घटी है। यह 2005 में 72.6 फीसदी थी जो 2015-16 में 57 फीसदी रह गई। 

शिशु मृत्यु दर में दो अंक की कमी- प्रदेश में नवजात शिशु मृत्यु दर में महज दो अंक तक की कमी आई है। 2005-06 में यह दर 36 थी जो सर्वे में 34 पहुंची है। स्वास्थ्य संस्थानों में डिलिवरी की संख्या भी बढी़ है। यह 43.1 फीसदी से 76.4 फीसदी हो गई है। 

88.2 पहुंची साक्षरता दर- प्रदेश में शिक्षा और साक्षरता दर 79.5 फीसदी से 88.2 पहुंची है। प्रदेश में स्वास्थ्य एवं परिवार नियोजन की सेवाओं में बढ़ोतरी हुई है। यह 6.0 फीसदी 15.7 फीसदी हुई है। 

जनगणना से भिन्न होता है फैमिली हेल्थ सर्वे का प्रारूप- प्रदेश विश्वविद्यालय के पॉपुलेशन रिसर्च सेंटर की निदेशिका और अर्थ शास्त्र की प्रोफेसर संजू करोल ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आईआईपीएस की मॉनीटरिंग में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में स्थित जनसंख्या अनुसंधान केंद्र (पीआरसी) ने 2015-16 में इस सर्वे को पूरा किया। उन्होंने कहा कि फैमिली हेल्थ सर्वे और आम जनगणना के घटक, प्रक्रिया और उद्देश्य भिन्न होते हैं। इसलिए आंकडे़ भी अलग होते हैं।

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