Shrikhand Mahadev Yatra 2025: श्रीखंड यात्रा की आधिकारिक शुरुआत, पहला जत्था रवाना
करीब 35 किलोमीटर इस पैदल यात्रा में 18,570 फीट की ऊंचाई पर स्थित भगवान शिव के प्रतीक श्रीखंड महादेव तक पहुंचने की कठिन परीक्षा है।
विस्तार
कठिनतम धार्मिक यात्राओं में शुमार श्रीखंड महादेव यात्रा वीरवार को आधिकारिक तौर पर शुरू हो गई। मिलफेड के अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर ने सुबह 5:30 बजे यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उनके साथ जिला परिषद अध्यक्ष कुल्लू पंकज परमार, एसडीएम निरमंड मनमोहन सिंह, डीएसपी चंद्रशेखर कायथ मौजूद रहे।
अध्यक्ष बुद्धि सिंह ठाकुर ने इस बार यात्रा के लिए प्रशासन की ओर से पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। प्रत्येक बेस कैंप में सेक्टर मजिस्ट्रेट, पुलिस, राजस्व, बचाव दल और मेडिकल टीमें तैनात की गई है। उन्होंने बताया कि इस बार यात्रा में बदलाव करते हुए ट्रस्ट ने निर्णय लिया कि प्रतिदिन 800 श्रद्धालुओं का जत्था एक दिन में रवाना होगा। उन्होंने श्रीखंड जा रहे श्रद्धालुओं से यात्रा में स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने का आग्रह किया और यात्रा में किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन न करने की अपील की । उन्होंने श्रद्धालुओं की यात्रा मंगलमय होने की कामना भी की।
वहीं एसडीएम मनमोहन सिंह ने इस दौरान कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यात्रा मार्ग को 5 सेक्टरों में विभाजित किया गया है और 5 बेस कैंप स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि सिंहगाड, थाचडू, कुंशा, भीमडवारी और पार्वतीबाग में बनाए गए इन बेस कैंपों में स्वास्थ्य,पुलिस, होमगार्ड, एसडीआरएफ, अभिमास मनाली की टीम तैनात होगी एवं अन्य जरूरी व्यवस्थाएं की गई हैं।
सिंहगाड में श्रद्धालुओं का पंजीकरण और स्वास्थ्य जांच की जाएगी। सिंहगाड में ही किसी कारणवश जिनका ऑनलाइन पंजीकरण नही हो पाया है, ऐसे श्रद्धालुओं के लिए सिंहगाड में ऑफलाइन पंजीकरण की सुविधा भी दी गई है। सभी बेस कैंपों में नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारी सेक्टर मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात किए गए हैं। यह यात्रा 23 जुलाई तक रहेगी।
एसडीएम निरमंड मनमोहन सिंह ने बताया कि यात्रा से पहले पूरे मार्ग की रैकी कर जरूरी मरम्मत की गई है। सराय, पेयजल, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त किया गया है। श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे ऑनलाइन पंजीकरण करें। श्रद्धालुओं को गर्म कपड़े, मजबूत जूते, छाता और रेनकोट साथ ले जाना अनिवार्य है। यात्रा को पूरा करने में आमतौर पर 3 से 4 दिन लगते हैं। अब तक के आंकड़ों के अनुसार, 2014 से अब तक 44 श्रद्धालुओं की यात्रा के दौरान मृत्यु हो चुकी है। अधिकांश मामलों में ऑक्सीजन की कमी, दिल की बीमारी, बीपी और शुगर जैसी बीमारियों के कारण ऐसा हुआ है।
चार जगह बेस कैंप, मेडिकल टीमें रहेंगी तैनात
यात्रा मार्ग में सिंहगाड़, भीमडवारी, पार्वती बाग और थाचडू में बेस कैंप और मेडिकल सहायता केंद्र बनाए गए हैं। यहां मेडिकल टीमें, ऑक्सीजन सिलिंडर, दवाएं, और रेस्क्यू टीमें तैनात रहेंगी। पुलिस और होमगार्ड की टीमें भी भी सुरक्षा में जुटी हैं। प्रशासन की कोशिश है कि यात्रा मानसून के खतरे से पहले संपन्न हो जाए।
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