विशेषज्ञ की टिप्पणी: हिमाचल को केंद्रीय बजट से पैसे खींचने के अनेक अवसर
केंद्रीय बजट भारतीय अर्थव्यवस्था को निरंतर सुदृढ़ करने की दिशा में दिखाई देता है। हालांकि, चुनावी वर्ष से पहले इसमें एकाएक लोकलुभावन जैसा कोई विशेष तत्व दिखाई नहीं देता, फिर भी यह पिछले बजटों की कड़ी में सरकार की बुनियादी जिम्मेवारी के चलते समाज के वंचित वर्गों, किसानों, रोजगार, स्वरोजगार से जूझते युवाओं के लिए कुछ विशेष प्रयोजन करने वाला है।
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ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के सभी महत्वपूर्ण कोनों को छूता केंद्रीय बजट भारतीय अर्थव्यवस्था को निरंतर सुदृढ़ करने की दिशा में दिखाई देता है। हालांकि, चुनावी वर्ष से पहले इसमें एकाएक लोकलुभावन जैसा कोई विशेष तत्व दिखाई नहीं देता, फिर भी यह पिछले बजटों की कड़ी में सरकार की बुनियादी जिम्मेवारी के चलते समाज के वंचित वर्गों, किसानों, रोजगार, स्वरोजगार से जूझते युवाओं के लिए कुछ विशेष प्रयोजन करने वाला है। आय कर की नई प्रणाली को और अधिक लोगों जोड़ने की खातिर कुछ रियायतें अवश्य दी गई हैं, परंतु पुराने विकल्प चुनते आए आयकरदाताओं के लिए इसमें कोई विशेष राहत नहीं दिखती। इस बजट में कौशल को विकसित कर एवं उत्पादन साधनों के आधुनिकीकरण के जरिये रोजगार, उत्पादन, निर्यात, आय आदि पर विशेष फोकस रखा गया है। इसी के साथ देश में यह एक मजबूत आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण की ओर ले जाने वाला है। उत्पादन और आय बढ़ोतरी के जरिये न केवल वैश्विक मंदी की छाया को कम आंका गया है, बल्कि महंगाई के प्रति भी यह कारगर है। निजी स्तर पर देखें तो केंद्रीय बजट में देश के करदाताओं व उपभोक्ताओं को टैक्स दरों में कमी या बढ़ोतरी के बारे रुचि रहती है परंतु राज्य स्तर पर सारा ध्यान केंद्र की ओर से विभिन्न विभागों और कार्यक्रमों के माध्यम से अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को दिए जाने वाले अधिमान एवं धन प्रयोजन पर रहता है। इन नजरिए से देखें तो केंद्रीय बजट में न औद्योगिक क्षेत्र और न ही रेल लाइन के विस्तार को लेकर प्रदेश का अभी कोई स्पष्ट उल्लेख है। हालांकि, इन मदों में बढ़ोतरी होने से उम्मीद बनी हुई है। ‘एक जिला एक उत्पाद’, जी आई उत्पादों और हस्तशिल्प उत्पादों को प्रोत्साहन देने के लिए ‘यूनिटी मॉल स्कीम’ एक मंच प्रदान करने के लिए लाभकारी सिद्ध होगी।
इसी तरह एस्परेशनल डिस्ट्रिक्ट कार्यक्रम को ब्लॉक स्तर पर ले जाना भी फायदेमंद रहेगा। पर्यटन के क्षेत्र में ‘देखो अपना देश कार्यक्रम’ और क्षेत्रीय हवाई संपर्क में सुधार के लिए देश भर में 50 अतिरिक्त हवाई अड्डे, हेलीपॉड, वाटर एयरो ड्रोन, उन्नत लैंडिंग ग्राउंड का नवीनीकरण किया जाना और मिशन मोड पर पर्यटन को बढ़ावा दिए जाने के बारे में राज्यों की सक्रिय भागीदारी का बजट भाषण में उल्लेख प्रदेश के लिए अच्छा संकेत है। इसी तरह युवा उद्यमियों द्वारा कृषि-स्टार्टअप के लिए कृषि कोष बनाना, गरीब खाद्यान्न योजना को एक साल के लिए बढ़ाना, बच्चों और किशोरों के लिए राष्ट्रीय डिजिटल लाइब्रेरी की घोषणा और इसकी राज्यों में वार्ड एवं पंचायत स्तर पर वास्तविक निर्माण में केंद्रीय मदद हिमाचल जैसे पहाड़ी क्षेत्र में एक नई शुरुआत होगी। केंद्र सरकार की ओर से राज्यों को 50 साल का ब्याज-मुक्त कर्ज एक और साल के लिए बढ़ाना, पीएम आवास योजना के आवंटन में 66 प्रतिशत वृद्धि, देशभर में 157 नए नर्सिंग कॉलेज, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन एवं कृषि कर्ज में लक्ष्य को 20 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाना भी प्रदेश के लिए मददगार साबित होगा। हालांकि, केंद्रीय बजट के प्रावधानों से फिलहाल यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि किस राज्य को किस मद में कितनी राशि मिल सकती है। फिर भी प्रदेश के लिए अनेक क्षेत्रों के विकास के लिए आर्थिक संसाधन खींचने के बहुत अवसर हैं। अब यह प्रदेश पर ही निर्भर करता है कि विभिन्न क्षेत्रों पर संबंधित विभाग कितनी बारीक नजर रखते हैं, जिससे समयबद्ध तरीके से प्रस्ताव भेजे जाएं और मंजूर कर धरातल पर त्वरित उतारे जाएं। केंद्रीय बजट प्रावधानों के इन संदर्भों की निगरानी एवं क्रियान्वयन के लिए एक समर्पित विंग स्थापित हो, क्योंकि आज के दौर में अधिकाधिक केंद्रीय मदद से ही राज्य के विकास की प्रबल संभावना है। इससे ‘निवेश गुणांक प्रभाव’ के माध्यम से राज्य की आय, रोजगार, और राजस्व में कई गुणा बढ़ोतरी संभव हो सकती है और सभी सेक्टर का परस्पर विकास हो सकता है। - डॉ. राकेश शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर, अर्थशास्त्र
आर्थिक विकास में अग्रसर होने में सहयोगी होगा केंद्रीय बजट: प्रो. एनके शारदा
अर्थशास्त्री प्रो. एनके शारदा ने कहा कि केंद्र सरकार का यह बजट आर्थिक विकास के साथ भारत को विश्व आर्थिक व्यवस्था में चमकता सितारा बनाने में महत्वपूर्ण कदम है। वित्त मंत्री सीतारमण का पांचवां बजट देश की पिछले कुछ वर्षों से चल रही आर्थिक नीतियों की एक कड़ी के रूप में देखा जाना चाहिए। इसका मूल उद्देश्य समावेशी विकास रहा है। गरीब और मध्यम वर्ग पर केंद्रित रखने के अलावा बजट में भारत के सपने को साकार करने के लिए ढांचागत विकास को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है। बिजनेस के लिए नियमों को सरलीकरण करने की बात रखी गई है। छोटे और मध्यम वर्ग के कारोबारियों के लिए रियायतें देकर इस वर्ग को विकसित करने पर जोर दिया गया है। डिजिटल पुस्तकालय योजना को शुरू कर राज्यों से इसे गांव के स्तर तक ले कर जाने की बात की है, यह विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में अहम भूमिका निभा सकता है। सरकार के इस बजट में गरीबों के लिए चलाई जा रही मुफ्त अनाज की योजना को एक साल के लिए बढ़ाने से गरीब लोगों को महंगाई से निपटने और अपना गुजर-बसर करने में मदद मिलेगी। पूंजीगत व्यय में 33 फीसदी वृद्धि से निवेश भी बढ़ेगा। इससे रोजगार के अवसर मिलेंगे, बेरोजगारी की समस्या से निपटने में कुछ मदद मिलेगी।
बजट में 47 लाख युवाओं को स्टाइफंड देने का प्रावधान भी रखा है। केंद्र के इस बजट में आधारभूत ढांचे में रेलवे, हवाई सेवाओं को और मजबूत बनाने, 100 क्रिटिकल परिवहन प्रोजेक्ट शुरू करने से अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, विकास दर को गति मिलेगी। इसमें रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। वित्त मंत्री सीतारमण के इस बजट में प्रधानमंत्री आवास योजना में 66 प्रतिशत की वृद्धि किए जाने से गरीबों को घर मिलेंगे, इससे रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। वित्त मंत्री की प्राथमिकताओं में समावेशी विकास, अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सहायता, योजना का लाभ, युवाओं, महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विकास, ऊर्जा, पर्यटन को शामिल कर विकास की नई अवधारणा को नई धार देने का प्रयास किया गया है। जम्मू-कश्मीर लद्दाख के विकास के लिए कई अहम घोषणाएं की गईं हैं। चिकित्सा क्षेत्र में 157 नए नर्सिंग कॉलेज बनाए जाने की बात की है। कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए 20 लाख करोड़ का कृषि ऋृण लक्ष्य रखा गया है। इससे इन क्षेत्रों में विकास को नई दिशा मिलेगी। प्राकृतिक एवं जैविक खेती के विकास के लिए किए गए प्रावधानों का देश के एक करोड़ से अधिक किसानों का लाभ मिलेगा। शिक्षा क्षेत्र के लिए इस बजट में कुछ खास नहीं है। शिक्षा के बजट में अपेक्षा अनुरूप वृद्धि नहीं हुई है।
केंद्र सरकार के इस बजट में शहरी विकास के लिए 10,000 करोड़ प्रति वर्ष विकास कार्याें पर खर्च किए जाने है। इससे भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। वित्तीय संकट से जूझ रहे सभी राज्यों के लिए ब्याज मुक्त ऋण की छूट एक वर्ष को बढ़ाए जाने से राजकोषीय घाटे को जीडीपी का 3.5 प्रतिशत करने से भी राहत मिलेगी। राज्यों के लिए 50 वर्ष के लिए पूंजीगत खर्च के लिए ऋण का प्रावधान महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
वित्तीय प्रबंधन की दृष्टि से यह बजट दूरदर्शिता का उत्कृष्ट नमूना है। राजकोषीय घाटे पर अंकुश, बाजार से ऋण, पूंजीगत व्यय अनुपात को बढ़ाने से अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी मुद्रास्फीति एवं कीमतों पर अंकुश लगेगा। केंद्रीय बजट में महिला सम्मान को स्माल सेविंग सर्टिफिकेट योजना से देश की आधी जनता को लाभ मिलेगा। वरिष्ठ नागरिकों को भी राहत दी गई है। बजट का इंतजार कर रही देश की एक तिहाई मध्यम वर्गीय जनता कर की नई व्यवस्था से लाभान्वित होगी। आय कर सीमा का स्लैब 7 लाख किए जाने से मध्यम वर्ग को राहत मिलेगी।
कीमतों को स्थिर रखने की रहेगी चुनौती
आयकर व्यवस्था में बदलाव से आम आदमी की क्रय क्षमता बढ़ेगी, जिससे मांग बढ़ना तय है। इससे आर्थिक सुधार होंगे, मगर इससे पूर्ति कम होने पर कीमतों में वृद्धि होने की संभावना रहेगी। रिजर्व बैंक आफ इंडिया को इस पर नजर रखने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए मौद्रिक नीतियों में बदलाव करने की आवश्यकता होगी।
हिमाचल में रेल और गगल हवाई अड्डे के विस्तार का उल्लेख नहीं होने से निराशा
हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. रंजीत सिंह ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को बजट में गगल एयरपोर्ट के विस्तारीकरण और रेल परिवहन के विकास की उम्मीदें थीं। इन दोनों ही बड़ी परियोजनाओं का बजट में कोई विशेष उल्लेख न होने से हिमाचल को निराशा हाथ लगी है। केंद्र सरकार के बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार की तरफ से रेलवे के लिए कुल 2.4 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इस वर्ष रेल विकास के लिए अब तक का सबसे अधिक बजट का प्रावधान है। इसके अलावा 50 नए हवाई अड्डों के निर्माण का भी प्रावधान किया गया है। ऐसे में अब इन्हीं मदों से हिमाचल प्रदेश में रेल या हवाई अड्डे के विकास की आस है।
प्रो. रंजीत सिंह ठाकुर ने बताया कि बागवानी के विकास के लिए 2200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ऐसे में पहाड़ी राज्य में बागवानी विभाग की उम्मीदों को सहारा मिलता हुआ दिख रहा है। कृषि की ओर भी विशेष ध्यान देते हुए 1.86 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, मगर उद्योग विकास के लिए उतना ध्यान नहीं दिया गया है, जितना अपेक्षित था। ऐसे में अपने प्रतिस्पर्धी देश चीन के जीडीपी में उद्योग क्षेत्र के कुल योगदान 48 फीसदी तक पहुंचाने के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा। आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ प्रो. रंजीत सिंह ने बताया कि देश के पूंजीगत व्यय में हुई वृद्धि और राजकोषीय व प्राथमिक घाटे में कमी से देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ होने में मदद मिलेगी।
रक्षा विभाग के बढ़े बजट से हिमाचल की सीमाएं भी होंगी सुरक्षित
प्रो. रंजीत सिंह ने बताया कि चीन और पाकिस्तान से तनाव के बीच भारत सरकार ने रक्षा बजट में लगभग 70 हजार करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की है। 2023-24 के लिए सरकार की ओर से रक्षा मंत्रालय को 5.94 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं। ऐसे में हिमाचल की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं भी सुरक्षित होंगी। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश के बहुत से सरकारी कर्मचारी आयकर श्रेणी में आते हैं। ऐसे में कर की न्यूनतम स्लैब को बढ़ाकर सात लाख रुपये के स्तर पर ले जाया गया है। ऐसे में कर्मचारियों-छोटे कारोबारियों को लाभ मिलेगा।