चीन को तिब्बत के प्रधानमंत्री की दो टूक!
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री लोबसंग सांग्ये ने कहा कि चीन झूठा प्रचार कर तिब्बत में लोगों पर किए जा रहे दमन को छुपाने की कोशिश कर रहा है। पूर्वी तिब्बत में करजे के एक गांव में पिछले माह चीनी पुलिस ने शांतिपूर्ण रूप से प्रदर्शन कर रहे तिब्बतियों पर गोलियां चला दीं।
इसमें दो तिब्बतियों की मौत हो गई। हालांकि तिब्बती अपने गांव के नेता की गिरफ्तारी के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। शुगपा गांव के 700 तिब्बतियों को चीनी अधिकारियों ने हिरासत में लेकर उनका उत्पीड़न किया। चीन में तिब्बतियों को मानव अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।
चीन की ऐसी क्रूरता पर तिब्बती चुप नहीं बैठेंगे। मैकलोडगंज के मुख्य बौद्ध मंदिर में तिब्बती लोकतंत्र दिवस के 54वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री लोबसंग सांग्ये ने चीन पर जमकर निशाना साधा।
'चीन सरकार तिब्बत के पर्यावरण की रक्षा करे'
उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा ने तिब्बतियों को 1960 में लोकतंत्र का उपहार दिया था। तब से निर्वासन में रहकर तिब्बती अपना लोकतंत्र दिवस मना रहे हैं। तिब्बत में रह रहे लोगों को स्वतंत्रता का अधिकार मिलना चाहिए। चीन में तिब्बतियों पर हो रहे इस तरह के घटनाक्रमों के बावजूद वे आजादी की आशा नहीं छोड़ेंगे।
तिब्बत की स्वतंत्रता और दलाईलामा की वतन वापसी ही उनका लक्ष्य है। धर्मगुरु का मिडिल वे एप्रोच सुझाव ही तिब्बत समस्या के हल का एकमात्र रास्ता है। चीन की सरकार को तिब्बत के पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए। क्योंकि, इससे निकलने वाली नदियों पर दक्षिण एशिया और दक्षिण पूर्वी एशिया की करोड़ों की जनसंख्या निर्भर है।
दलाईलामा को समर्पित वर्ष 2014 के उपलक्ष्य में 2 अक्तूबर को निर्वासित तिब्बत सरकार ने धर्मशाला में नोबेल पुरस्कार विजेताओं को आमंत्रित किया है। तिब्बत को भारत ने ही एक हजार वर्ष पहले बौद्ध धर्म दिया।