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Shimla News: सुपर स्पेशलिटी अस्पताल चमियाना में एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड आरंभ
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प्रदेश का पहला अस्पताल बना चमियाना, मरीजों को अब नहीं जाना पड़ेगा पीजीआई चंडीगढ़
विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पहले दिन 10 मरीजों की जांच की
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अटल सुपर स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईएमएसएस) चमियाना में गेस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस) की शुरुआत कर दी है। इस तकनीक से उपचार प्रदान करने वाला चमियाना प्रदेश का पहला अस्पताल बन गया है।
संस्थान में शनिवार को इस तकनीक की सफलता पूर्वक शुरुआत की गई। पहले दिन 10 मरीजों पर इसका इस्तेमाल किया गया है। पीजीआई चंडीगढ़ के प्रोफेसर सुरेंद्र राणा ने प्रशिक्षक की भूमिका निभाते हुए गेस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के चिकित्सकों को यह प्रक्रिया सिखाई। विभागाध्यक्ष और चमियाना अस्पताल के प्रधानाचार्य प्रो. बृज शर्मा, डॉ. राजेश शर्मा, डॉ. विशाल बोध और डॉ. आशीष चौहान सहित फैकल्टी सदस्यों ने सक्रिय रूप से इसमें भाग लिया। अब प्रदेश के मरीजों को जांच के लिए चंडीगढ़ या प्रदेश से बाहर बड़े मेडिकल संस्थानों में नहीं जाना पड़ेगा। चमियाना में यह सुविधा मिलने से न सिर्फ मरीजों का समय बचेगा बल्कि आर्थिक बोझ भी कम होगा।
यह है एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड
एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड एक आधुनिक जांच तकनीक है। इसमें एंडोस्कोप (पतली और लचीली नली जैसी मशीन) के साथ अल्ट्रासाउंड जोड़ा जाता है। इसे मरीज के गले के रास्ते शरीर के अंदर ले जाया जाता है। इस दौरान मशीन आसपास के अंगों की गहराई तक तस्वीरें खींचती है जिससे डॉक्टरों को अंदर की साफ तस्वीर मिलती है। आमतौर पर साधारण एंडोस्कोपी या अल्ट्रासाउंड से पेट और पाचन तंत्र की गहराई तक की तस्वीरें स्पष्ट नहीं मिल पाती हैं। एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड से डॉक्टर पेट, आंत, अग्नाशय (पैंक्रियास), लीवर और पित्ताशय की छोटी से छोटी गड़बड़ी भी देख सकते हैं। इससे गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, पथरी, पैंक्रियास और लीवर की समस्याओं का सही पता लगाया जा सकता है। शुरुआती पहचान से उपचार जल्दी शुरू होता है और मरीज की जान बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
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कोट
इस सुविधा की शुरुआत मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के सहयोग से संभव हो पाई है। एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड जैसी तकनीक हिमाचल में चिकित्सा सेवाओं के स्तर को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी। इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उनके घर के नजदीक ही उपलब्ध होंगी।
-डॉ. सुधीर शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, अटल सुपर स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान
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विशेषज्ञ डॉक्टरों ने पहले दिन 10 मरीजों की जांच की
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अटल सुपर स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान (एआईएमएसएस) चमियाना में गेस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस) की शुरुआत कर दी है। इस तकनीक से उपचार प्रदान करने वाला चमियाना प्रदेश का पहला अस्पताल बन गया है।
संस्थान में शनिवार को इस तकनीक की सफलता पूर्वक शुरुआत की गई। पहले दिन 10 मरीजों पर इसका इस्तेमाल किया गया है। पीजीआई चंडीगढ़ के प्रोफेसर सुरेंद्र राणा ने प्रशिक्षक की भूमिका निभाते हुए गेस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के चिकित्सकों को यह प्रक्रिया सिखाई। विभागाध्यक्ष और चमियाना अस्पताल के प्रधानाचार्य प्रो. बृज शर्मा, डॉ. राजेश शर्मा, डॉ. विशाल बोध और डॉ. आशीष चौहान सहित फैकल्टी सदस्यों ने सक्रिय रूप से इसमें भाग लिया। अब प्रदेश के मरीजों को जांच के लिए चंडीगढ़ या प्रदेश से बाहर बड़े मेडिकल संस्थानों में नहीं जाना पड़ेगा। चमियाना में यह सुविधा मिलने से न सिर्फ मरीजों का समय बचेगा बल्कि आर्थिक बोझ भी कम होगा।
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यह है एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड
एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड एक आधुनिक जांच तकनीक है। इसमें एंडोस्कोप (पतली और लचीली नली जैसी मशीन) के साथ अल्ट्रासाउंड जोड़ा जाता है। इसे मरीज के गले के रास्ते शरीर के अंदर ले जाया जाता है। इस दौरान मशीन आसपास के अंगों की गहराई तक तस्वीरें खींचती है जिससे डॉक्टरों को अंदर की साफ तस्वीर मिलती है। आमतौर पर साधारण एंडोस्कोपी या अल्ट्रासाउंड से पेट और पाचन तंत्र की गहराई तक की तस्वीरें स्पष्ट नहीं मिल पाती हैं। एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड से डॉक्टर पेट, आंत, अग्नाशय (पैंक्रियास), लीवर और पित्ताशय की छोटी से छोटी गड़बड़ी भी देख सकते हैं। इससे गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, पथरी, पैंक्रियास और लीवर की समस्याओं का सही पता लगाया जा सकता है। शुरुआती पहचान से उपचार जल्दी शुरू होता है और मरीज की जान बचाने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
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कोट
इस सुविधा की शुरुआत मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के सहयोग से संभव हो पाई है। एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड जैसी तकनीक हिमाचल में चिकित्सा सेवाओं के स्तर को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी। इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उनके घर के नजदीक ही उपलब्ध होंगी।
-डॉ. सुधीर शर्मा, चिकित्सा अधीक्षक, अटल सुपर स्पेशलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान