फौजी कोटे से पदोन्नत कर्मचारियों और अधिकारियों की होगी डिमोशन
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हिमाचल में फौजी कोेटे से पदोन्नत हुए अधिकारियों और कर्मचारियों की डिमोशन होगी। पिछले दस साल में पूर्व सैनिक कोटे के आधार पर पदोन्नति पाने वाले सभी मुलाजिमों की वरिष्ठता निरस्त करने का फैसला लिया गया है।
इससे प्रदेश सरकार में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मियों से लेक र एचएएस अधिकारियों तक की पूरी वरिष्ठता सूची बदल जाएगी। ऐसा कोर्ट के आदेशों पर किया जा रहा है। मंत्रिमंडल ने मंगलवार को इसे हरी झंडी दे दी है।
पूर्व सैनिक कोटे का वरिष्ठता लाभ निरस्त होने से अन्य पात्र अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नति लाभ मिल सकेगा।हिमाचल हाईकोर्ट ने 29 दिसंबर, 2008 को अपने आदेश में पूर्व सैनिक कोटे के तहत दिए गए वरिष्ठता लाभ को सही नहीं ठहराया था।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने भी 2012 में हाईकोर्ट के निर्णय पर मुहर लगाई। इसके बाद ये मामला सरकार के विचाराधीन था। इस आदेश की अनुपालना न करने का भी कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया। सरकारी अधिकारियों को पूर्व सैनिक कोटे का लाभ देने के नियम 1972 के बने हैं।
फौज की नौकरी का भी मिलता था वरिष्ठता में लाभ
मंगलवार को कैबिनेट ने यह फैसला लिया है कि जबसे यह नियम बने हैं, तबसे वरिष्ठता सूची बदलना संभव नहीं है। इसलिए सरकार कोर्ट के आदेश की तिथि 29 दिसंबर, 2008 से ही इस नई व्यवस्था को लागू करने की स्थिति में है।
मुख्य सचिव बीके अग्रवाल ने कहा कि इसकी अनुपालना के बारे में कोर्ट को भी अवगत करवा दिया जाएगा। वरिष्ठता सूची में बदलाव चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से लेकर एचएएस अधिकारियों के स्तर तक होगा।
आईएएस अधिकारियों की वरिष्ठता सूची में पहले ही बदलाव किया जा चुका है। पूर्व सैनिक कोटे से सरकारी नौकरी में लेने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की वरिष्ठता का आकलन करते समय फौज में लगाए गए वर्षों की भी गणना की जाती थी।
इससे अगर कोई पहले सेना में सामान्य रिक्रूट भी रहा हो तो भी एचएएस अधिकारी बनने तक की स्थिति में पहले की वरिष्ठता को शामिल किया जाता था। अब यह नियम लागू नहीं होगा।