8000 करोड़ के सोलर प्रोजेक्ट का काम लटका, सरकार अफसरों ने टेक दिए घुटने
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मोदी सरकार के पहले बजट में हिमाचल के स्पीति को मिला 8000 करोड़ का सोलर पावर प्रोजेक्ट लटक गया है। तमाम प्रयासों के बावजूद हिमाचल सरकार की एजेंसी हिम ऊर्जा ने एक हजार मेगावाट के इस प्रोजेक्ट से अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं।
इसमें सबसे बड़ा रोड़ा ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का है। कड़छम से काजा तक करीब 150 किमी लंबी ट्रांसमिशन लाइन बिछाने का काम शुरू किया गया था, लेकिन यह बेहद खर्चीला साबित हुआ। प्रोजेक्ट पर अभी तक 50 करोड़ खर्च हो चुके हैं, लेकिन ट्रांसमिशन लाइन का काम अभी भी पूरा नहीं हो सका।
विशेषज्ञों का तर्क है कि ट्रांसमिशन लाइन में जितना संभावित खर्चा आने का अनुमान है, उससे बिजली की प्रति यूनिट उत्पादन की लागत तय सीमा से कई गुना बढ़ जाएगी। गौर हो कि हिमाचल में जर्मनी की मदद से केंद्र सरकार ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट बना रही है।
चीन बॉर्डर से सटी स्पीति घाटी में प्रस्तावित सोलर पावर प्रोजेक्ट के खटाई में पड़ने से नेशनल सोलर मिशन को बड़ा झटका लगा है। इसके लिए घाटी में 2500 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है। इसी के चलते साल 1997 में लद्दाख में स्वीकृत 5000 मेगावाट की सोलर पावर परियोजना भी ठंडे बस्ते में डालनी पड़ी थी।
विशेषज्ञों का तर्क है कि स्पीति और लद्दाख की भौगोलिक स्थिति लगभग एक जैसी है। पावर ग्रिड कारपोरेशन ने लद्दाख में प्रस्तावित ग्रीन कॉरिडोर प्रोजेक्ट को आर्थिक दृष्टि से संभव नहीं माना। ऐसे में हिम ऊर्जा ने भी इस सोलर प्रोजेक्ट के निर्माण से हाथ खींच लिए हैं।
हिमाचल को मिलने थे 57 मिलियन यूरो
हिमाचल और आंध्र प्रदेश में ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट के लिए जर्मन सरकार ने 125 मिलियन यूरो यानी 915 करोड़ रुपये भारत को लोन देने की सैद्धांतिक मंजूरी दी है।
इसमें से 57 मिलियन यूरो हिमाचल के खाते में आने थे, लेकिन ट्रांसमिशन लाइन की लागत उठाने को पावर ग्रिड कारपोरेशन तैयार नहीं है।
ट्रांसमिशन लाइन की वजह से विभाग ने परियोजना से हाथ खींच लिए हैं। हालांकि, सोलर प्रोजेक्ट के लिए 2500 हेक्टेयर भूमि चिह्नित कर ली गई थी। - राजेश, प्रभारी इंजीनियर हिम ऊर्जा