फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Effect of global warming: Apple's range is slipping by 57 meters every year due to increasing temperature.

ग्लोबल वार्मिंग का असर: तापमान बढ़ने के कारण हर साल 57 मीटर खिसक रहा है सेब का दायरा, शोध में खुलासा

Thu, 25 Jan 2024 11:18 AM IST
Krishan Singh दीपक चंद्र कापड़ी, अल्मोड़ा
दीपक चंद्र कापड़ी, अल्मोड़ा Published by: Krishan Singh Updated Thu, 25 Jan 2024 11:18 AM IST
सार

हिमालय के नजदीकी क्षेत्रों में भी जाड़ों में सीमित बर्फबारी होने से तापमान में बढ़ोतरी हो रही है जो सेब उत्पादन के लिए गहरी चिंता का विषय है। 

विज्ञापन
Effect of global warming: Apple's range is slipping by 57 meters every year due to increasing temperature.
सेब - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ग्लोबल वार्मिंग का असर सेब उत्पादन पर भी पड़ा है। पर्यावरण असंतुलन से तापमान बढ़ गया है। नतीजतन, सेब उत्पादन का दायरा भी हिमालय की तरफ खिसकने लगा है। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान के शोध में यह खुलासा हुआ है। संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक हर साल सेब उत्पादन बेल्ट 57 मीटर पीछे यानी हिमालय की तरफ खिसक रही है। पर्यावरण असंतुलन से बारिश और बर्फबारी का चक्र बिगड़ गया है। हिमालय के नजदीकी क्षेत्रों में भी जाड़ों में सीमित बर्फबारी होने से तापमान में बढ़ोतरी हो रही है जो सेब उत्पादन के लिए गहरी चिंता का विषय है। 

विज्ञापन


जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण संस्थान कोसी, अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों के शोध में सेब उत्पादन को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक 35 साल में किए गए शोध के अनुसार सेब उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हिमाचल, उत्तराखंड और कश्मीर में मौसम चक्र बिगड़ने से न्यूनतम तापमान में तीन से पांच डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। उपयुक्त तापमान न मिलने से इन राज्यों में अब तक सेब का दायरा 2000 मीटर पीछे खिसक गया है। यानि पूर्व में जिन स्थानों पर सेब उत्पादन के लिए मौसम अनुकूल था अब वहां इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
विज्ञापन


पर्याप्त बर्फबारी न होने से बढ़ेगी सेब बेल्ट खिसकने की रफ्तार
वैज्ञानिकों के मुताबिक सेब के बेहतर उत्पादन के लिए पेड़ों को कम से कम 1200 घंटे तक छह डिग्री तापमान की जरूरत होती है। जाड़ों में हिमालयी राज्यों में भी बर्फबारी बेहद कम हो रही है। इससे न्यूनतम तापमान में वृद्धि हुई है। ऐसे में सेब को पर्याप्त चिलिंग ऑवर नहीं मिल रहा और इसका दायरा हिमालय की तरफ खिसकता चला जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


20 से 25 प्रतिशत तक घट गया उत्पादन
चौबटिया उद्यान के सेवानिवृत्त पौध रक्षा अधिकारी डॉ. चारु चंद्र पंत ने कहा कि सेब बेल्ट हर साल खिसक रही है जो चिंताजनक है। बताया कि एक दशक में पर्याप्त बर्फबारी न होने से पूरे देश में सेब का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। इसमें 20 से 25 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। बताया कि सेब की कुछ नई प्रजातियां विकसित हुई हैं जो भविष्य में इसके सिमटते दायरे को कम कर सकती हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed