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कोल आबंटन मामले में सामने आया बड़ा नाम, मचा हड़कंप
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Sun, 11 Jan 2015 12:00 PM IST
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हिमाचल के नाम पर पश्चिम बंगाल के रानीगंज में 500 मेगावाट पावर प्रोजेक्ट के लिए हुए कोल आवंटन के मामले में एक आईएएस का नाम उछला है।
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प्रवर्तन निदेशालय की जांच में पावर कारपोरेशन से लेकर सरकार तक के कई अफसर लपेटे में आ सकते हैं। हालांकि पावर कारपोरेशन की ओर से तमाम रिकॉर्ड जुटाए जा चुके हैं। रिकॉर्ड इसी सप्ताह प्रवर्तन निदेशालय को भेजा जाएगा।
कोल आवंटन के मामले में पिछले सप्ताह ही प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लांड्रिंग का केस दर्ज किया है। इसको लेकर ऊर्जा महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
जांच के लपेटे में आएंगे कई अफसर
सूत्रों के अनुसार इस प्रकरण में प्रदेश सरकार के एक आईएएस का नाम आ रहा है। इसके अलावा कारपोरेशन से जुड़े कई अफसर जांच के लपेटे में आ सकते हैं।
2006 में यह कोल आवंटन दो कंपनियों को किया गया था, लेकिन उनकी ओर से पावर प्रोजेक्ट बनाने का काम शुरू नहीं किया गया था। ऐसे में 2012 में ही यूपीए-2 सरकार के कार्यकाल में कोल आवंटन निरस्त कर दिया गया था।
इस मामले में अब अचानक यह तथ्य सामने आ रहा है कि कोल आवंटन कराने के नाम पर मनी लांड्रिंग की गई थी।
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से जो रिकॉर्ड तलब किया गया था।
उस रिकॉर्ड को पावर कारपोरेशन की ओर से जुटाया जा चुका है। इस रिकॉर्ड को हिमाचल सरकार को भेज दिया गया है। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय को भेजा जाएगा।
2006 में यह कोल आवंटन दो कंपनियों को किया गया था, लेकिन उनकी ओर से पावर प्रोजेक्ट बनाने का काम शुरू नहीं किया गया था। ऐसे में 2012 में ही यूपीए-2 सरकार के कार्यकाल में कोल आवंटन निरस्त कर दिया गया था।
इस मामले में अब अचानक यह तथ्य सामने आ रहा है कि कोल आवंटन कराने के नाम पर मनी लांड्रिंग की गई थी।
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से जो रिकॉर्ड तलब किया गया था।
उस रिकॉर्ड को पावर कारपोरेशन की ओर से जुटाया जा चुका है। इस रिकॉर्ड को हिमाचल सरकार को भेज दिया गया है। सरकार से मंजूरी मिलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय को भेजा जाएगा।