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पूर्व सीएम वीरभद्र और उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह के खिलाफ चार्जशीट

Sun, 22 Jul 2018 12:09 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 22 Jul 2018 12:09 PM IST
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ed filled fresh charge sheet against virbhadra singh and vikramaditya singh

मनी लांड्रिंग मामले में जांच का सामना कर रहे हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को उन्हें और उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह को आरोपी बनाते हुए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी।

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चार्जशीट में ईडी ने वीरभद्र सिंह की पत्नी समेत अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया है। पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष जज अरविंद कुमार ने इस मामले में 24 जुलाई को अगली सुनवाई तय की है।
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विशेष जज ने कहा कि अगली सुनवाई पर ही यह तय किया जाएगा कि इस संबंध में अंतिम रिपोर्ट का संज्ञान लिया जाए अथवा नहीं। सरकारी वकील नितेश राणा और एनके माट्टा द्वारा दाखिल चार्जशीट में वीरभद्र
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सिंह (83), उनकी पत्नी प्रतिभा (62) के अलावा यूनिवर्सल एप्पल एसोसिएशन के मालिक चुन्नी लाल चौहान, जीवन बीमा निगम के एजेंट आनंद चौहान, प्रेम राज और लावन कुमार रोच का भी नाम शामिल है। 

सीबीआई भी दाखिल कर चुकी है चार्जशीट

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साथ ही तारणी इन्फ्रास्ट्रक्चर के प्रबंध निदेशक वकमुला चंद्रशेखर और रामप्रकाश भाटिया को भी आरोपी बनाया गया है।  बता दें कि मनी लांड्रिंग में ही सीबीआई द्वारा दायर एक अन्य मामले में भी हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, उनकी पत्नी, चौहान और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है।

इन दोनों ही मामलों में अब तक वीरभद्र और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। बीमा एजेंट आनंद चौहान को ईडी ने नौ जुलाई 2016 को धनशोधन निरोधक अधिनियम-2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था। बाद में दो जनवरी को उन्हें जमानत दे दी गई थी। 

क्या है पूरा मामला 

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सीबीआई में चल रहे आय से अधिक संपत्ति के मामले पर संज्ञान लेते हुए ईडी ने इसी में आगे मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। आरोप है कि एलआईसी एजेंट आनंद चौहान ने वीरभद्र सिंह से करीब 5.14 करोड़ रुपये कैश लिया

जिसे पंजाब नेशनल बैंक के अपने खाते में जमा करवाया और उसके बाद वीरभद्र और अपने परिवारवालों के नाम पर बीमा पॉलिसी खरीद कर निवेश कर दिया। बैंक खाते में मोटी रकम जमा होने के कारण वह आयकर विभाग की नजर में आ गया।

मैहरोली में प्लॉट की खरीद-फ रोख्त की कड़ी भी इसमें जुड़ी। ईडी के मुताबिक कमाई का स्रोत स्पष्ट नहीं हुआ, जबकि वीरभद्र सिंह ने इसे सेब बगीचे की कमाई बताया। इसी से सारा मामला शुरू हुआ।

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