मनी लांड्रिंग केस: सीएम वीरभद्र के बीमा एजेंट के खिलाफ चार्जशीट पेश
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के बीमा एजेंट आनंद सिंह चौहान के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को पटियाला कोर्ट हाउस स्थित विशेष सीबीआई जज विनोद कुमार के समक्ष चार्जशीट पेश कर दी। ईडी का आरोप है कि चौहान ने वीरभद्र सिंह के पांच करोड़ रुपये से ज्यादा काले धन को उनके व उनके परिजनों के नाम पर बीमा पॉलिसी खरीद कर एलआईसी में निवेश किया। कोर्ट ने चार्जशीट पर सुनवाई के लिए 13 सितंबर की तारीख तय की है।
प्रवर्तन निदेशालय ने चौहान को चंडीगढ़ से आठ जुलाई 2016 को गिरफ्तार किया था। सीबीआई अदालत एक बार चौहान की जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में है और उसे बुधवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। मनी लांड्रिंग प्रीवेंशन एक्ट (पीएमएलए) के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है। एजेंसी का आरोप है कि चौहान ने वीरभद्र सिंह से करीब 5.14 करोड़ रुपये नगद लिया और पंजाब नेशनल बैंक के अपने खाते में जमा करवाया।
इस्पात मंत्री रहते अर्जित की छह करोड़ की अघोषित संपत्ति
उसके बाद वीरभद्र व उनके परिजनों के नाम पर बीमा पॉलिसी खरीद कर निवेश कर दिया बैंक खाते में मोटी रकम जमा होने के कारण वह आयकर विभाग की नजर में आ गया। ईडी का कहना है इस कालेधन के लेनदेन को जायज ठहराने के लिए वीरभद्र व चौहान के बीच एक समझौता किया गया। यह समझौता 2011 में किया गया लेकिन इसके लिए 2008 के स्टांप पेपर का इस्तेमाल कर फर्जी समझौता पत्र (एमओयू) तैयार किया गया।
मामले की जांच के दौरान चौहान ने मूल समझौता पत्र कभी ईडी को नहीं दिया कि कहीं चोरी पकड़ी न जाए। जांच एजेंसी का कहना है कि वीरभद्र सिंह ने 2009 से 2011 के बीच केंद्रीय इस्पात मंत्री रहते हुए करीब छह करोड़ की अघोषित संपत्ति अर्जित की थी। यह संपत्ति उनकी घोषित आय से अधिक थी। सीबीआई भी वीरभद्र के खिलाफ जांच कर रही है।