कमाल की तकनीक, 8.5 तीव्रता का भूकंप भी नहीं कर पाएगा बाल बांका!
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हिमाचल में अब पूरी तरह भूकंप रोधी और बेहद कम बजट पर सरकारी भवनों का निर्माण हो सकेगा। सीमेंट कंक्रीट की बजाए भवन निर्माण में लाइट गेज स्टील फेब्रिकेशन तकनीक का इस्तेमाल होगा। ट्रायल के तौर पर कुल्लू में इस तकनीक को आजमाया जा रहा है। आम तौर पर सीमेंट कंक्रीट से बनने वाली जिस भवन के निर्माण में दो तीन साल का वक्त लग जाता है।
एलजीएसएफ (लाइट गेज स्टील फेब्रिकेशन) से उसी आकार के भवन को महज 6 माह के भीतर तैयार किया जा सकेगा। जबकि भवन की लागत भी करीब 35 फीसदी कम होगी। एलजीएसएफ से बनने वाले भवन पूरी तरह फायर और साउंड प्रूफ होने के साथ भूकंप रोधी होंगे जो 8.5 रियेक्टर स्केल तक के भूकंप को आसानी से सह पाएंगे।
आईआईटी रुड़की की ओर से तैयार डिजाइन को हिमाचल सरकार ने हरी झंडी दे दी है। माना जा रहा है कि इस तकनीक पर सरकारी भवनों के निर्माण के बाद राज्य सरकार प्रति वर्ष भवनों के निर्माण पर होने वाली कुल राशि का 35 फीसदी पैसा बचा सकती है।
क्या है लाइट गेज स्टील फेब्रिकेशन
हिमाचल में कुल्लू जिला के लगभुट्टी में इस तकनीक पर जल्द एक ढाई मंजिला पीएचसी भवन का निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है। जबकि ट्रायल के तौर पर कुल्लू के मौहल में एक वेटरिनरी ओटी और कार्यालय बनाया जा चुका है। भवन निर्माण की इस नई
तकनीक को धरातल पर उतारने का जिम्मा लोनिवि के मेकेनिकल विंग को सौंपा गया है। विंग के अधिशाषी अभियंता अजय शर्मा ने बताया कि लगवैली के भुट्टी में जल्द ही एक ढाई मंजिला पीएचसी भवन का इसी तकनीक से निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है। 6 माह के भीतर भवन निर्माण पूरा हो जाएगा।
इस तकनीक में पूरी इमारत को नट बोल्ट से जोड़ कर खड़ा किया जाता है। भवन निर्माण सीमेंट कंक्रीट की बजाए स्टील के खंभों पर जिप्सीयम की प्लेेटों का इस्मेमाल किया जाता है। हालांकि प्लंथ लेवल तक निर्माण की पारंपरिक विधि का प्रयोग होता है। इस तरह के भवनों में लकड़ी के इस्तेमाल की गुंजाइश कम हो जाती है।