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भूकंप: 4.1 की तीव्रता से थर्राया हिमाचल का किन्नौर, हाईवे पर पहाड़ी से गिरने लगीं चट्टानें
Sun, 06 Feb 2022 07:24 PM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, रिकांगपिओ(किन्नौर)
संवाद न्यूज एजेंसी, रिकांगपिओ(किन्नौर)
Published by: Krishan Singh
Updated Sun, 06 Feb 2022 07:24 PM IST
सार
भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.1 आंकी गई। रविवार सुबह करीब 11:27 बजे आए इस भूकंप का केंद्र किन्नौर में जमीन के अंदर करीब 10 किलोमीटर गहराई पर था।
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भूकंप के झटकों के बाद हाईवे पर पहाड़ी से गिरीं चट्टानें
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के जिले में रविवार सुबह करीब 11:27 बजे भूकंप के झटके लगे। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला से मिली जानकारी के अनुसार भूकंप की तीव्रता 4.1 आंकी गई और भूकंप का केंद्र किन्नौर में जमीन के 10 किलोमीटर नीचे था। भूकंप से कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन ऊरनी, चोलिंग और काकस्थल के समीप नेशनल हाईवे-5 पर पहाड़ी से चट्टानें गिरने लगीं, जिससे करीब एक घंटा एनएच बाधित रहा। लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता मोहन मेहता ने बताया कि जेसीबी की मदद से तुरंत चट्टानें हटाकर हाईवे बहाल कर दिया गया। इससे पहले शनिवार को कुल्लू जिले में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे।
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हिमाचल भूकंप के लिहाज से अति संवेदनशील वर्ग में आता है। 4 अप्रैल 1905 को हिमाचल में 7.8 तीव्रता वाला बड़ा भूकंप आ चुका है। इसके बाद हिमाचल में बड़े भूकंप अक्सर आते रहे हैं। 28 फरवरी 1906 को कुल्लू में 6.4 तीव्रता वाला भूकंप आया था। वर्ष 1930 में भी 6.10 तीव्रता वाला भूकंप आया था। इसके बाद वर्ष 1945 में 6 और 1975 में 6.8 तीव्रता वाला भूकंप आया था। प्रदेश के चंबा, कुल्लू, कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर, मंडी, बिलासपुर सिस्मिक जोन पांच और लाहौल स्पीति, शिमला, सिरमौर, सोलन जोन चार में आते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लोगों को बेतरतीब निर्माण के बजाय भूकंपरोधी घर ही बनाने चाहिए ताकि आपदा के समय उनकी जिंदगी बच सके।
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1905 के भूकंप में 20 हजार से ज्यादा गई थीं जानें
कांगड़ा में 4 अप्रैल, 1905 की अलसुबह आए 7.8 की तीव्रता वाले भूकंप में 20 हजार से ज्यादा इंसानी जानें चली गई थीं। भूकंप से एक लाख के करीब इमारतें तहस-नहस हो गई थीं, जबकि 53 हजार से ज्यादा मवेशी भी भूकंप की भेंट चढ़ गए
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