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देवभूमि में हो सकती है बड़ी तबाही, दस साल में भूकंप के 75 झटके

Sun, 28 Aug 2016 09:37 PM IST
सुनील चड्ढा/अमर उजाला, शिमला,धर्मशाला
सुनील चड्ढा/अमर उजाला, शिमला,धर्मशाला Updated Sun, 28 Aug 2016 09:37 PM IST
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 earthquake hazard in himachal pradesh

बीते दस साल के दौरान हिमाचल प्रदेश में 75 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। जिला चंबा और लाहौल स्पीति सबसे ज्यादा बार भूकंप से हिले हैं। 65 प्रतिशत भूकंपों का केंद्र यह दोनों जिले रहे हैं। कुल 75 बार आए भूकंप में से 60 बार केंद्र हिमाचल रहा है जबकि 15 बार पड़ोसी देशों में भूकंप का केंद्र रहने से झटके महसूस किए गए। हिमाचल सिस्मिक जोन चार और पांच में आता है।

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कांगड़ा, चंबा, लाहौल, कुल्लू और मंडी भूकंप की दृष्टि से सबसे अति संवेदनशील क्षेत्र हैं। ये क्षेत्र सिस्मिक जोन पांच में आते हैं जबकि प्रदेश के अन्य क्षेत्र जोन चार के तहत आते हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार बीते दस साल के दौरान हिमाचल में आए 75 भूकंपों में से 40 भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर चार से कम मापी गई है।
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60 बार हिमाचल में भूकंप का केंद्र रहा है जबकि पंद्रह बार नेपाल, जम्मू-कश्मीर, पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भूकंप का केंद्र रहने के चलते हिमाचल में झटके महसूस किए गए हैं। बीते दस साल में हिमाचल में आए भूकंपों में 42 प्रतिशत का केंद्र जिला चंबा और चंबा की जम्मू-कश्मीर के साथ लगती सीमा रही है।
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लाहौल स्पीति जिला और जम्मू-कश्मीर से लगती सीमा 23 प्रतिशत बार भूकंप का केंद्र रही है। कांगड़ा (आठ प्रतिशत), किन्नौर (पांच प्रतिशत), मंडी (छह प्रतिशत), शिमला (छह प्रतिशत) और सोलन (दो प्रतिशत) भी भूकंप का केंद्र रहा है। जिला चंबा में भूकंप आने की सबसे अधिक आशंका है।

भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक ने जताई आशंका

 earthquake hazard in himachal pradesh

हिमाचल जोन पांच यानी भूकंप के लिहाज से अति संवेदनशील वर्ग में आता है। इंडियन प्लेट में हिमाचल भी आता है। इंडियन प्लेट यूरोशिया प्लेट के नीचे है। दोनों प्लेटों में गहरा तनाव चल रहा है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के समूह अध्यक्ष वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुशील कुमार ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि भूकंप की कभी भविष्यवाणी तो नहीं की जा सकती लेकिन आसार ऐसे हैं कि हिमाचल में कभी भी बड़ा भूकंप आ सकता है।

इसके लिए हिमाचल के लोगों को तैयार रहना है। हिमाचल के लोगों को भूकंप से लड़ना सीखना होगा। क्योंकि, 4 अप्रैल 1905 को हिमाचल में 7.8 तीव्रता वाला बड़ा भूकंप आ चुका है। इसके बाद हिमाचल में बड़े भूकंप अक्सर आते रहे हैं। 28 फरवरी 1906 को कुल्लू में 6.4 तीव्रता वाला बड़ा भूकंप आ चुका है। वर्ष 1930 में भी 6.10 तीव्रता वाला भूकंप आया था। इसके बाद वर्ष 1945 में 6 और 1975 में 6.8 तीव्रता वाला भूकंप आया था।

हिमाचल के लोगों को बेतरतीब निर्माण के बजाय भूकंपरोधी घर ही बनाने चाहिए ताकि आपदा के समय उनकी जिंदगी बच सके। हिमाचल सरकार को स्कूलों में ज्यादा से ज्यादा मॉकड्रिल करवानी चाहिए। हर स्कूल के कमरे में एक बड़ा मजबूत टेबल होना चाहिए ताकि भूकंप के दौरान बच्चे उसके नीचे सुरक्षित बच सकें।

हिमाचल के लोगों को तो अपने घरों में यह भी पता नहीं होगा कि भूकंप आने पर कौन से सुरक्षित दरवाजे से निकला जाए। क्योंकि, घर बनाते समय ऐसी प्लानिंग की ही नहीं गई होगी। चंबा, कुल्लू, कांगड़ा, ऊना, हमीरपुर, मंडी, बिलासपुर जोन पांच और लाहौल स्पीति, शिमला, सिरमौर, सोलन जोन 4 में आते हैं।

बेतरतीब भवनों की हो रेट्रोफिटिंग

 earthquake hazard in himachal pradesh
illegal construction

भूकंप आने के दौरान अवैध भवनों से ज्यादा खतरा है। इसमें जिंदगी का ज्यादा नुकसान होता है। हिमाचल में भी अधिकतर भवन निर्माण बेतरतीब तरीके से हुआ है। इसलिए, बेतरतीब ढंग से भवनों की रेट्रोफिटिंग होनी चाहिए। यानी, भवन के चारों ओर एक सुरक्षित बेल्ट लगाई जाए ताकि जब भूकंप आए तो घर एकदम से गिरे नहीं।

सरकार हर गांव में बनाए बड़े शेल्टर
डॉ. सुशील ने बताया कि हिमाचल सरकार को सूबे के हर गांव में एक बड़ा भूकंपरोधी मजबूत शेल्टर बनाना चाहिए। भूकंप आने के बाद जब तबाही होती है तो लोगों को शरण लेने के लिए एक ऐसा भवन होना चाहिए जो भूकंपरोधी और काफी मजबूत हो और जो गिरे न। इस शेल्टर में करीब चार पांच दिन तक खाने पीने की व्यवस्था होनी चाहिए।

शनिवार को चार बार भूकंप आया
डॉ. सुशील ने बताया कि शनिवार को कुल्लू और शिमला भूभाग में 4.6, 4.3, 4.2, 3.7 तीव्रता के चार भूकंप आए। इसका असर धरती के 10 किलोमीटर अंदर तक था।

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