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एचआरटीसी बस बन गई घर, 28 दिन से फंसा है चालक
Sat, 18 Apr 2020 07:04 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sat, 18 Apr 2020 07:04 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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सरकार के आदेशों के इंतजार में एक चालक 28 दिन से बस में ही अपनी जिंदगी गुजार रहा है। बस ही उसका घर बन चुका है। कोरोना कर्फ्यू और लॉकडाउन के चलते यह बस 21 मार्च से पीरन में खड़ी है। कोरोना के बीच भले ही प्रशासन मुस्तैदी से कार्य कर रहा हो लेकिन इस चालक को अभी तक वापस लौटने के निर्देश नहीं मिले हैं।
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सरकार के आदेशों के इंतजार में चालक गोपाल ठाकुर 28 दिन से पीरन में खड़ी बस की चौकीदारी कर रहे हैं। इनकी परेशानी को सुनने वाला कोई नहीं। मंडी जिला के खलोहड़ गांव के रहने वाले गोपाल कोरोना के इस संकट के दौरान अपने परिवार से मिलने को तरस गए हैं। गोपाल का कहना है कि लॉकडाउन के आदेश के बाद 21 मार्च से वह पीरन में खड़ी बस में ही दिन गुजार रहे हैं। अब इन्हें 3 मई के बाद ही वापस अपने परिवार से मिलने की उम्मीद है।
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निगम के अधिकारियों ने लॉकडाउन की अधिसूचना के दौरान दूरदराज पहाड़ी क्षेत्रों में फंसीं बसों को वापस मुख्यालय नहीं बुलाया। इस कारण गोपाल की तरह न जाने कितने एचआरटीसी ड्राइवर कोरोना के इस संकट में घर से बाहर फंस गए हैं। चालक गोपाल ने कहा कि कोविड-19 की सजा उन्हें बेवजह मिल रही है।
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इनके पास कपड़े तक बदलने को नहीं हैं। भोजन गांव वाले करवा देते हैं। रोजमर्रा के खर्चे को भी अब जेब में पैसे नहीं हैं। गांव में एटीएम आदि की सुविधा नहीं है। गोपाल का कहना है कि सभी विभागों के कर्मचारी इस संकट के दौर में अपने परिवार के साथ जीवन यापन कर रहे हैं लेकिन उन्हें 3 मई तक बस में ही समय बिताना पड़ेगा।
एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधक देवासेन नेगी ने कहा कि ग्रामीण रूटों पर फंसे चालकों को वापस लाने को लेकर सरकार से अभी कोई दिशा निर्देश नहीं मिले हैं। कर्मचारियों को किसी चीज की दिक्कत न हो, इसके लिए संबंधित क्षेत्रों के पंचायत प्रधानों से बातचीत की है। इन्हें पंचायत की ओर से भोजन उपलब्ध करवाया जा रहा है।