Himachal: CM सुक्खू ने किया डॉ. राकेश कुमार को प्रेरणा स्रोत अवॉर्ड से सम्मानित, बोले- आगे भी करते रहेंगे काम
कांगड़ा के पालमपुर के गांव खड्डुल से संबंध रखने वाले डाॅ. राकेश कुमार को राज्यस्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रेरणास्रोत अवार्ड से सम्मानित किया।
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हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के पालमपुर के गांव खड्डुल से संबंध रखने वाले डाॅ. राकेश कुमार को राज्यस्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रेरणास्रोत अवार्ड से सम्मानित किया। डॉ. राकेश ने अवार्ड लेने के पश्चात मंच पर ही मुख्यमंत्री रिलीफ फंड के लिए 2.51 लाख रुपये का चेक भेंट किया। डॉ. राकेश ने कहा कि वह हिमाचल के विकास और उत्थान के लिए कार्य करते रहेंगे। कहा कि वह जिला कांगड़ा की स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर हस्तशिल्प और इवेंट से जुड़ी चीजों पर बच्चों को गाइडेंस देंगे और उनके लिए काम करेंगे। प्रदेश की सरकारें हस्तशिल्प और हथकरघा को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की योजनाएं चला रही हैं।
इनसे ग्रामीणों को जोड़कर उनकी वित्तीय स्थितियों को मजबूत किया जा रहा है। वर्तमान में डाॅ. राकेश इंडिया एक्सपो मार्ट लिमिटेड के अध्यक्ष एवं हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद के चीफ मेंटर हैं। उन्हें उनके विश्वस्तर पर हस्तशिल्प, व्यापार एवं निर्यात संवर्धन के क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य के लिए प्रदेश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया गया है। विशेष तौर पर हिमाचल की संस्कृति, कला, साहित्य, शिल्प और पर्यटन को वैश्विक पटल तक पहुंचाने में इनका महत्वपूर्ण योगदान है। भारतीय हस्तशिल्प, कला, संस्कृति एवं स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पटल पर स्थापित करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। उनके इस कार्य को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित केंद्रीय मंत्रियों ने भी सराहा है।
हस्तशिल्पियों को अच्छा बाजार और मंच उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत
डाॅ. राकेश ने कहा कि आधुनिक पीढ़ी इस व्यवसाय की ओर आकर्षित हो, इसके लिए वह क्षेत्र की स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मिलकर उन्हें जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं। हिमाचल के लोगों में हस्तशिल्प के कई उत्पाद पैदा करने की क्षमता है। यहां के हस्तशिल्पियों को अच्छा बाजार और मंच उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत हैं। चंबा रूमाल और कांगड़ा पेंटिग्स आदि उत्पादों को बनाने की लागत ज्यादा आती है। इस पर निफ्ट संस्थान ने काफी काम किया है, ताकि लागत कम की जा सके। आजकल शाॅल की बजाय स्टाल ज्यादा प्रचलित है। विश्व में बैंबू से बने उत्पादों की ज्यादा मांग है। सरकार हस्तशिल्पकारों आदि को मेलों में पहुंचने की सुविधा दे और वहां आने जाने के लिए सब्सिडी दे।