हड़ताली डॉक्टरों का नया ऐलान, अस्पतालों में और बिगड़ेंगे हालात
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डाक्टरों की हड़ताल खत्म होने के बजाए और उलझ गई है। मांगों की अनदेखी होने पर प्रदेश चिकित्सा अधिकारी संघ ने शुक्रवार को शिमला में प्रेस वार्ता कर 25 अगस्त से 31 अगस्त तक चार घंटे की हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है।
अभी डाक्टर दो घंटे की हड़ताल पर थे। 25 अगस्त से डाक्टर सुबह साढ़े नौ बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक पेन डाउन स्ट्राइक करेंगे। 24 अगस्त को सभी डाक्टर एक दिन की केजुयल लीव लेंगे। पहली सितंबर से डाक्टर सामूहिक इस्तीफे देंगे।
प्रदेश चिकित्सा अधिकारी संघ के अध्यक्ष डा. संतलाल शर्मा, महासचिव डा. जीवानंद चौहान, उपाध्यक्ष डा. यशपाल रांटा, कोषाध्यक्ष डा. दीपक कैंथला, उपाध्यक्ष कुल्लू डा. कल्याण और उपाध्यक्ष शिमला डा. लोकेंद्र ने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।
अस्पताल में और बदतर हुए हालात
डाक्टरों ने स्वास्थ्य मंत्री पर मामले को लेकर गंभीर नहीं होने का आरोप भी लगाया। संघ ने सरकारी कर्मचारियों, अफसरों का इलाज सरकारी अस्पताल में ही करवाने को अनिवार्य करने की मांग की। उन्होंने कहा कि इंपैनलड प्राइवेट अस्पतालों को बाहर किया जाना चाहिए। प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ने की पूरी संभावना बन गई है।
डाक्टरों की दो घंटे की हड़ताल ने पहले ही व्यवस्थाओं को पटरी से उतार दिया है। अब चार घंटे की हड़ताल ने स्थिति और खराब कर दी है। डॉक्टर मांगों की अधिसूचना जारी करने पर अड़े रहे तो सरकार आश्वासन तक सीमित रही। सरकार ने 4-9-14 स्केल की अधिसूचना हड़ताल समाप्त करने के बाद जारी करने की बात कही। डाक्टर पहले अधिसूचना जारी करने, उसके बाद हड़ताल खत्म करने पर अडे़ रहे।
हड़ताली डाक्टरों की यह है मांगें
---4-9-14 के वित्तीय लाभ तदर्थ, अनुबंध, रोगी कल्याण समितियों के तहत नियुक्त चिकित्सकों को भी मिलें।
---अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए लाए गए कानून को गैर जमानती बनाया जाए।
---खाद्य निरीक्षक के तौर पर चिकित्सकों को काम करने के निर्देश सरकार वापस ले।
---निदेशालय में निवेशकों के पदों पर डाक्टरों के कैडर से ही सरकार नियुक्तियां करें।
---जिलों में वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक बैठाए जाए, इससे सरकार पर आर्थिक बोझ भी नहीं पडे़गा।
---निदेशालय में ओएसडी एमबीबीएस चिकित्सक बैठाए जाएं।
---दंत चिकित्सकों और अन्य डिग्री धारकों को भी सरकार निदेशालय में ओएसडी के पदों पर बैठा रही है तो अन्याय है।