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Shimla News: आंखों पर पट्टी बांधकर डॉक्टरों ने दिया नेत्रदान करने का संदेश
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आईजीएमसी से संजौली तक आंखों पर पट्टी बांधकर रैली निकलते आईजीएमसी के एमबीबीएस के छात्र। संवाद
एमबीबीएस छात्रों ने निकाली जागरुकता रैली
अंधापन करने वाली बीमारियों की भी दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला के नेत्र रोग विभाग की ओर से नेत्रदान के महत्व को लेकर जागरुकता रैली निकाली गई। यह रैली दोपहर 12:30 बजे आईजीएमसी परिसर से शुरू होकर संजौली तक गई।
एमबीबीएस के 25 छात्राओं और छात्रों ने आंखों पर पट्टी बांधकर इस पैदल मार्च में हिस्सा लिया। इनका उद्देश्य था लोगों को यह संदेश देना कि आंखों की रोशनी के बिना जीवन कितना कठिन हो सकता है और नेत्रदान से किसी को नई जिंदगी दी जा सकती है। आईजीएमसी में मौजूदा समय में 140 मरीज नेत्र मिलने के इंतजार में हैं। जागरुकता की कमी से यह इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। रैली का शुभारंभ आईजीएमसी की प्राचार्या डॉ. सीता ठाकुर ने किया। उन्होंने कहा कि नेत्रदान सबसे बड़ा दान है और हर व्यक्ति को इसके लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने बताया कि आंखें केवल मृत्यु के बाद ही दान की जा सकती हैं। व्यक्ति की मृत्यु के छह घंटे के भीतर परिजनों की अनुमति से कॉर्निया सुरक्षित निकाल लिया जाता है।
अब तक 352 नेत्र प्रत्यारोपण किए गए
नेत्र रोग विभाग के अनुसार अब तक 352 नेत्र प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। इससे यह साबित होता है कि यदि लोग नेत्रदान के लिए आगे आएं तो हजारों दृष्टिहीन लोगों की जिंदगी में रोशनी भरी जा सकती है। नेत्रदान पखवाड़े के दौरान आईजीएमसी में अगले एक सप्ताह तक जागरुकता कार्यक्रम, संगोष्ठियां और परामर्श शिविर आयोजित किए जाएंगे। विभाग का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान की शपथ लें।
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घर बैठे लें नेत्रदान और अंगदान की शपथ
आप भी घर बैठे अपने मोबाइल फोन के जरिये मरणोपरांत नेत्रदान और अंगदान की शपथ ले सकते हैं। इसके लिए www.notto.abdm.gov.in की वेबसाइट पर जाएं और आधार नंबर या आभा आईडी से वेरिफाइड मोबाइल नंबर डालकर पंजीकरण करें। इसके बाद फॉर्म पर पूछी निजी जानकारी भरें और ओटीपी की सहायता से पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरा करें। इसके बाद आप नेत्रदान और अंगदान का शपथ पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।
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अंधापन करने वाली बीमारियों की भी दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला के नेत्र रोग विभाग की ओर से नेत्रदान के महत्व को लेकर जागरुकता रैली निकाली गई। यह रैली दोपहर 12:30 बजे आईजीएमसी परिसर से शुरू होकर संजौली तक गई।
एमबीबीएस के 25 छात्राओं और छात्रों ने आंखों पर पट्टी बांधकर इस पैदल मार्च में हिस्सा लिया। इनका उद्देश्य था लोगों को यह संदेश देना कि आंखों की रोशनी के बिना जीवन कितना कठिन हो सकता है और नेत्रदान से किसी को नई जिंदगी दी जा सकती है। आईजीएमसी में मौजूदा समय में 140 मरीज नेत्र मिलने के इंतजार में हैं। जागरुकता की कमी से यह इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। रैली का शुभारंभ आईजीएमसी की प्राचार्या डॉ. सीता ठाकुर ने किया। उन्होंने कहा कि नेत्रदान सबसे बड़ा दान है और हर व्यक्ति को इसके लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने बताया कि आंखें केवल मृत्यु के बाद ही दान की जा सकती हैं। व्यक्ति की मृत्यु के छह घंटे के भीतर परिजनों की अनुमति से कॉर्निया सुरक्षित निकाल लिया जाता है।
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अब तक 352 नेत्र प्रत्यारोपण किए गए
नेत्र रोग विभाग के अनुसार अब तक 352 नेत्र प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं। इससे यह साबित होता है कि यदि लोग नेत्रदान के लिए आगे आएं तो हजारों दृष्टिहीन लोगों की जिंदगी में रोशनी भरी जा सकती है। नेत्रदान पखवाड़े के दौरान आईजीएमसी में अगले एक सप्ताह तक जागरुकता कार्यक्रम, संगोष्ठियां और परामर्श शिविर आयोजित किए जाएंगे। विभाग का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान की शपथ लें।
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घर बैठे लें नेत्रदान और अंगदान की शपथ
आप भी घर बैठे अपने मोबाइल फोन के जरिये मरणोपरांत नेत्रदान और अंगदान की शपथ ले सकते हैं। इसके लिए www.notto.abdm.gov.in की वेबसाइट पर जाएं और आधार नंबर या आभा आईडी से वेरिफाइड मोबाइल नंबर डालकर पंजीकरण करें। इसके बाद फॉर्म पर पूछी निजी जानकारी भरें और ओटीपी की सहायता से पंजीकरण की प्रक्रिया को पूरा करें। इसके बाद आप नेत्रदान और अंगदान का शपथ पत्र डाउनलोड कर सकते हैं।