आज सारे डॉक्टर छुट्टी पर, नहीं होगा आपके दर्द का इलाज
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हिमाचल प्रदेश में मरीजों का मर्ज और बढ़ जाएगा। सोमवार को आईजीएमसी और टांडा मेडिकल कॉलेज के अलावा प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर अपनी सेवाएं नहीं देंगे। डॉक्टरों के सामूहिक अवकाश के ऐलान के चलते ओपीडी पूर्ण रूप से बंद रहेंगी। यहां केवल आपात में ही सेवाएं मिलेंगी।
अन्य मरीजों को मायूस होना पड़ सकता है। बता दें कि सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक सुरक्षा और अन्य मांगों को लेकर पिछले एक सप्ताह से दो घंटे की पेन डाउन स्ट्राइक पर थे। रविवार शाम तक प्रदेश सरकार की ओर से इन चिकित्सकों को किसी भी तरह की वार्ता या मांगों को सुलझाने का न्योता नहीं मिलने पर निर्णय लिया कि सभी डॉक्टर सोमवार को सामूहिक अवकाश पर रहेंगे।
हिमाचल प्रदेश मेडिकल अधिकारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष डा. संतलाल शर्मा और महासचिव डा. जीवानंद चौहान ने रविवार शाम को बताया कि सरकार की बेरुखी के बाद सोमवार को तय कार्यक्रम के तहत एक दिन के लिए सभी चिकित्सकों ने मास कैजुअल लीव पर जाने का निर्णय लिया है।
उन्होंने बताया कि सभी मेडिकल अधिकारी सरकार के खिलाफ इस तरह से रोष व्यक्त करेंगे। उनके मुताबिक इमरजेंसी में ही सेवाएं दी जाएंगी। आपात सेवाओं में जिन चिकित्सकों की ड्यूटी लगी है, केवल वे ही सेवाएं देंगे।
तो कल से चार घंटे नहीं देंगे सेवाएं
मेडिकल अधिकारियों ने मांगें नहीं माने जाने पर एक सितंबर को सामूहिक इस्तीफे देने की भी चेतावनी दी है। संगठन ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को सोमवार को अवकाश पर रहने के बावजूद नहीं माना जाता है तो 25 से 31 अगस्त तक दो के बजाय चार घंटे पेन डाउन स्ट्राइक करेंगे। सुबह 9.30 बजे से 1.30 तक ओपीडी में डॉक्टर सेवाएं नहीं देंगे।
हड़ताली डॉक्टरों की मुख्य मांगें- 4-9-14 के वित्तीय लाभ तदर्थ, अनुबंध और रोगी कल्याण समितियों के तहत नियुक्त चिकित्सकों को भी मिले। अस्पतालों में चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए लाए गए कानून को गैर जमानती बनाया जाए। खाद्य निरीक्षक के तौर पर चिकित्सकों को दिया अतिरिक्त कार्यभार वापस ले सरकार।
निदेशालय में निवेशकों के पदों पर डॉक्टरों के कैडर से ही नियुक्तियां हों। जिलों में वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक बैठाए जाएं। निदेशालय में ओएसडी एमबीबीएस चिकित्सक बैठाए जाएं। दंत चिकित्सकों और अन्य डिग्री धारकों को भी सरकार निदेशालय में ओएसडी के पदों पर बैठा रही है, जो सही नहीं है।
स्विच्ड ऑफ रहे मंत्री और सचिव- डॉक्टरों के सामूहिक अवकाश के ऐलान के बाद स्वास्थ्य मंत्री और अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा स्विच्ड ऑफ रहे। मेडिकल संघ के नेताओं को भी वार्ता का कोई न्योता नहीं आया।
विधानसभा में भी गूंजेगा आज डॉक्टरों का मामला
प्रदेश में डॉक्टरों की हड़ताल को लेकर विपक्ष सोमवार को विधानसभा में ध्यान आकर्षण प्रस्ताव लाएगा। विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल को इस बारे में नोटिस दिया है। प्रदेश में डॉक्टरों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। मरीज परेशान हैं। अस्पतालों में ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी कतारें देखी जा सकती हैं।
विपक्ष का आरोप है कि डॉक्टरों की हड़ताल पर न तो मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह गंभीर हैं और न ही सरकारी तंत्र। भाजपा विधायक डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि हड़ताल से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए विधानसभा सत्र शुरू होने के पहले ही दिन अध्यक्ष को ध्यान आकर्षण प्रस्ताव लाने का नोटिस दे दिया है। बिंदल ने आरोप लगाया कि प्रदेश भर में स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से बाहर हो गई हैं।
मरीज दर्द के मारे ओपीडी के बाहर चिल्ला रहे हैं। बावजूद इसके सरकार को इनकी चिंता नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में प्रतिदिन करीब दो लाख मरीज उपचार के लिए आते हैं। लेकिन सरकार को कोई परवाह नहीं है कि मरीज कहां अपना इलाज कराएंगे।
दो बजे शुरू होगी सत्र की बैठक- हिमाचल विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन सोमवार को होगा। दोपहर बाद दो बजे शुरू होने जा रहे सत्र में प्रश्नकाल के बाद नाहन के भाजपा विधायक डॉ. राजीव बिंदल और शिमला के भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की हड़ताल से उत्पन्न स्थिति पर सदन में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाएंगे।
इसके बाद नियम 130 के तहत बीते शुक्रवार को भारी बारिश और बादल फटने पर लाए गए प्रस्ताव पर राजस्व मंत्री कौल सिंह जवाब देंगे। इस प्रस्ताव पर शुक्रवार को ही चर्चा हो चुकी है।