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Shimla News: आपराधिक मामले में 14 साल बाद डॉक्टर दंपत्ती निर्दोष करार

Wed, 26 Mar 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 26 Mar 2025 11:59 PM IST
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Doctor couple declared innocent after 14 years in criminal case
साल 2011 में बालूगंज थाना में दर्ज हुआ था मामला
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को किया निरस्त
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। सत्र न्यायालय ने 14 साल पुराने आपराधिक मामले में ट्रायल कोर्ट के पारित फैसले को निरस्त कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यजुवेंद्र सिंह ने जगत पाल शर्मा एवं अन्य मामले में यह निर्णय दिया है।
30 नवंबर 2023 को ट्रायल कोर्ट ने आईपीसी की धारा 504 के तहत डॉ. मीना शर्मा और डॉ. जगत पाल शर्मा को बरी किया था लेकिन आईपीसी की धारा 343, 352, 323 के साथ 34 के तहत दंडनीय अपराध के लिए दंपत्ती को दोषी ठहराया था। इन्हें एक वर्ष की अवधि के लिए शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार के निर्देश दिए थे। अब सत्र अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा आपराधिक मामले में पारित दोषसिद्धि और सजा को अपास्त (किसी धारा से बरी करना) किया है।
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यह मामला 24 अप्रैल 2011 को बालूगंज थाना के तहत समरहिल क्षेत्र का है।
शिकायतकर्ता के आरोप लगाए थे कि अभियुक्तों ने उसके पोते को सड़क पर साइकिल चलाने से रोका। आरोप लगे थे कि अभियुक्तों ने लोहे की छड़ और डंडों से उसके बेटे राजिंदर तथा पोते वासु ठाकुर को पीटा, इसमें उन्हें चोटें आईं थीं। शिकायतकर्ता से सूचना मिलने पर पुलिस ने अभियुक्तों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। उधर सत्र न्यायालय ने अपीलकर्ता द्वारा दायर अपील को अनुमति देते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित निर्णय और सजा को अब अपास्त कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ट्रायल कोर्ट ने आरोपी व्यक्तियों को धारा 504 आईपीसी के तहत सही तरीके से बरी किया। इसमें किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने आरोपी व्यक्तियों को धारा 341, 352, 323 के साथ 34 आईपीसी के तहत अपराध करने के लिए गलत तरीके से दोषी ठहराया। इसलिए निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप किया जाना चाहिए क्योंकि यह तथ्यों और साक्ष्यों की सही सराहना पर आधारित नहीं है। संवाद
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