डाक्टर की सलाहः ये सावधानियां बरतने से नहीं होगा डायरिया
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अगर हम कुछ सावधानियां बरतें तो डायरिसा से बचा जा सकता है। गर्मी के मौसम में डायरिया का खतरा रहता है। बासी और बाहर का खाना, दूषित पानी, गंदे हाथों से खाने पीने के कारण डायरिया फैलता है।
डायरिया में मरीज को दस्त होते हैं। ऐसे में दस्त की शुरुआत पर ही चिकित्सक के पास जाना चाहिए। क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर के जनरल ओपीडी चिकित्सक डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा का कहना है कि डायरिया से दस्त होते हैं।
और इस स्थिति में डिहाइड्रेशन की स्थिति पैदा हो जाती है। इसके बाद पीलिया होने की भी आशंका रहती है। खान-पान में सावधानी बरतने से डायरिया की रोकथाम हो सकती है।
डायरिया के लक्षण मिलने पर सबसे बड़ा इलाज ओआरएस के घोल का सेवन है। डॉ. पुष्पेंद्र के अनुसार डिहाइड्रेशन की स्थिति में नजदीकी अस्पताल में जाकर उपचार करवाना चाहिए। दस्त हों तो जिंक ओआरएस का प्रयोग करें।
ये हैं डायरिया के लक्षण
डायरिया होने पर मरीज को दस्त होते हैं। इससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। इस कारण कमजोरी महसूस होती है। वहीं, पीलिया में मरीज को बुखार, उल्टियां, कम भूख और पेटदर्द होता है।
डायरिया से बचाव
- ताजा खाना ही खाएं।
- गंदे हाथों से खाद्य पदार्थ न लें।
- दस्त होने पर ओआरएस का घोल लें।
- बाहर के खाने और जंक फूड से परहेज करें।
- पानी उबाल कर या फिल्टर कर पीएं।
- शौच जाने के बाद हाथों को अच्छी तरह से धोएं।
आयुर्वेदिक नुस्खा
- डायरिया से बचने के लिए कड़वी सौंफ का काढ़ा सबसे अच्छा है। सौंफ का चूर्ण भी कारगर होता है।
-दस्त की स्थिति में मरीज को ओआरएस का घोल दें। जिंक वाला ओआरएस घोल आसानी से उपलब्ध हो जाता है। मरीज को घर पर ही यह घोल दे सकते हैं।
-प्याज और पुदीना कूट कर इसके रस का सेवन मरीज को करवाएं। इससे डायरिया से राहत मिलेगी।