विज्ञान का चमत्कार, आखिरकार पांच माह बाद अपने बेटे से मिलेगी मां
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हिमाचल के सबसे बड़े मातृ एवं शिशु कमला नेहरू अस्पताल की कार्यप्रणाली की पोल खुल गई है। लेबर रूम में नवजात की अदला-बदली हुई थी। जिसे बेटा हुआ उसकी गोद में बेटी डाल दी गई। जिसे बेटी हुई उसे बेटा थमा दिया गया।
मंडी के दंपति का आरोप था कि उनका बेटा शिमला के एक दंपति को दे दिया गया। डीएनए जांच में यह आरोप सच निकला। शिमला के दंपति ने भी मान लिया है कि डीएनए रिपोर्ट है तो यह सच ही होगा। उन्हें जो अस्पताल प्रशासन ने बताया उन्होंने उसी पर यकीन किया।
यह सब कैसे हुआ उन्हें नहीं पता। उधर, मंडी के दंपति ने कहा कि विज्ञान के कारण आखिर सच की जीत हुई। वीरवार को हिमाचल हाईकोर्ट में एसपी शिमला की ओर से स्टेट फोरेंसिक लैब जुन्गा द्वारा जारी डीएनए रिपोर्ट पेश की गई।
इसमें केएनएच में बच्चा बदलने की प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। कोर्ट ने दूसरे दंपति को भी मामले में प्र्रतिवादी बनाया है। शिमला में रहने वाले ठाकुर दंपति अंजना और जितेंद्र को कोर्ट में शुक्रवार को मौजूद रहने के आदेश दिए गए हैं।
पांच महीने बाद सुलझी इस अनोखे केस की गुत्थी
आखिरकार पांच महीने बाद हिमाचल के इस अजीबोगरीब कशमकश वाले केस से पर्दा हट गया। यह अपनी तरह का अनोखा केस था। कोर्ट में दाखिल जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि जुन्गा लैब के डीएनए डिवीजन के असिस्टेंट डायरेक्टर की पुलिस को सौंपी रिपोर्ट के मुताबिक बदले गए बच्चे का डीएनए याचिकाकर्ता शीतल और अनिल कुमार के डीएनए से मैच करता है।
शिमला दंपति ने इस बच्चे का नाम भी नितांश ठाकुर रख दिया था। जबकि शीतल को दी गई बेटी अमानत का डीएनए अंजना और जितेंद्र ठाकुर के डीएनए से मैच करता है। जांच अधिकारी के अनुसार उन्होंने कमला नेहरू अस्पताल के एमएस से उन डॉक्टरों के नाम व पते देने को भी कहा गया है जिनकी तैनाती 26 मई को लेबर रूम में की गई थी जब बच्चे बदले गए हैं।
शुक्रवार को हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने रिपोर्ट को देखने के बाद अंजना और जितेंद्र को प्रतिवादी बनाया और शुक्रवार को कोर्ट में उपस्थित रहने के आदेश जारी किए हैं। मामले पर शुक्रवार को दो 2.30 बजे सुनवाई होगी।
कमला नेहरू अस्पताल में बच्चा बदलने के मामले की जांच रिपोर्ट एसपी शिमला ने वीरवार को हाईकोर्ट में पेश की। कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान एसपी शिमला को जांच का जिम्मा सौंपा था।
यह था मामला
26 मई 2016 को कमला नेहरू अस्पताल में शीतल ने एक बच्चे को जन्म दिया था। मौके पर मौजूद नर्सों ने बताया कि उसने बेटे को जन्म दिया है। लेकिन लेबर रूम से निकलने पर उसे बिटिया थमाई गई। दोनों प्रार्थियों शीतल और अनिल कुमार ने अपने स्तर पर इस गड़बड़ी की छानबीन की।
इसके बाद उन्होंने खुद ही उन्हें सौंपी गई बच्ची का दो बार डीएनए टेस्ट करवाया। डीएनए मैच नहीं हुआ। इसके बाद पुलिस को शिकायत की। पुलिस ने उस समय पैदा हुए तीन बच्चों के माता-पिता का डीएनए करवाया। दो दंपति में बच्चा बदलने की बात पुष्ट हुई।
रिपोर्ट आने के बाद दो परिवारों में भावनात्मक धर्मसंकट
विज्ञान का चमत्कार देखिए आखिर सच सामने आ गया। डीएनए रिपोर्ट के खुलासे के बाद शिमला और मंडी के दो परिवार जबरदस्त भावनात्मक संकट से गुजर रहे हैं। एक मां उस मासूम को छोड़ा होगा जिसे वह बेटी बना कर बड़े जतन से पाल रही थी।
दूसरी मां को अपना बच्चा छोड़ना पडे़गा जिसे उसने पांच महीने अपना बेटा समझ कर दूध पिलाया। इस द्वंद्व को एक मां से बेहतर और कोई नहीं समझ सकता। मंडी के दंपति को खुशी है कि उनका बेटा उन्हें वापस मिल गया। उन्हें एक बेटी पहले से थी।
ईश्वर ने उन्हें तोहफा दिया था। जिसे केएनएच स्टाफ की लापरवाही और वक्त ने कुछ महीनों के लिए छीन लिया था। विज्ञान अगर आज इतना सक्षम नहीं होता तो इस लड़ाई में उनकी जीत नामुमकिन थी। अमर उजाला ने इस प्रकरण पर दोनों परिवारों से बात की। पेश है एक मार्मिक रिपोर्ट-
बेटे को पाल रही मां बोली, दिल को कैसे तसल्ली दूं बेटा मेरा नहीं
मैं अपने दिल को कैसे तसल्ली दूं कि यह मेरा बेटा नहीं है, इसे मैं कैसे भूल जाऊं... मुझे ही पता है इसे कब नींद आती है कब भूख लगती है। जिसे मेरी बेटी बताया जा रहा है उसके साथ इन पांच महीनों में क्या-क्या गुजरी होगी। मुझे तो यही पता था कि यह मेरा बेटा है लेकिन उन अभिभावकों को यह पता था कि यह उनकी बेटी नहीं है।
यह दर्द है कि बेटे को पाल रही शिमला में रहने वाली एक मां अनीता का। हाईकोर्ट में डीएनए जांच का खुलासा होने के बाद ठाकुर दंपति के चेहरे उतर गए हैं। कोर्ट ने उन्हें शुक्रवार को अदालत में बुलाया है। अनीता ने कहा -उन्हें ये बच्चा डाक्टर ने ही दिया था। उसे उनका बेटा बताया था। इस विवाद के सामने आने के बाद वह फिर कमला नेहरू अस्पताल में डॉक्टर से मिले और उनसे कहा कि अगर सच में बच्चे बदले गए हैं तो वह बेहिचक उन्हें बता दें। वह डीएनए के लिए तैयार हैं।
लेकिन डाक्टर ने पूरे भरोसे के साथ उन्हें कहा कि कोई बच्चा नहीं बदला गया है आपको डीएनए करवाने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने अस्पताल का दस्तावेज दिखाते हुए कहा था-रजिस्टर झूठ नहीं बोलता। जब पुलिस उनके घर पहुंची। तब वे एक बार फिर से केएनएच प्रबंधन के पास पहुंचे। वहां डॉक्टर ने उन्हें रिकॉर्ड की पूरी फाइल दिखाई और कहा कि आपके बेटा ही हुआ है। यहां पर इसकी एंट्री हुई है। अगर आप पांच साल बाद भी आएंगे तब भी आपको यही रिकॉर्ड मिलेगा। उन्होंने पुलिस कार्रवाई में भी पूरा सहयोग दिया। अब इस बेबस मां ने इंसाफ के लिए गुहार लगाते हुए कहा कि केएनएच प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
दोनों बच्चे भाई-बहन बन जाएं, परिवार भी मिलते रहें
कमला नेहरू अस्पताल में बच्चा बदलने की घटना के बाद बच्ची का पालन पोषण कर रहे अनिल और शीतल की इच्छा है कि दोनों बच्चे आपस में भाई- बहन बन जाएं। दोनों परिवार भी आपस में मिलते रहें। अनिल ने बताया कि उन्होंने बच्ची के साथ खिंची फोटो फ्रेम कर कमरे में टांग रखी है। बच्ची अब दूसरे परिवार के पास चली जाएगी लेकिन उनके बीच जो रिश्ता बन गया है वो हमेशा याद रहेगा।
अनिल का कहना है कि हमारी अमानत दूसरे परिवार के पास है और दूसरे परिवार की अमानत हमारे पास है, ऐसे में जल्द से जल्द दोनों परिवारों को उनके बच्चे मिल जाने चाहिए। दोनों परिवार पीड़ित हैं। मैं दूसरे परिवार का दर्द समझ सकता हूं। अनिल का कहना है कि पहले वह अपने बच्चे के लिए तड़पे और अब जिस बच्चे का पालन पोषण किया उससे बिछड़ने पर तड़पेंगे।
इस पूरे प्रकरण के लिए अनिल कमला नेहरू अस्पताल प्रबंधन को जिम्मेदार मानते हैं। अनिल का कहना है कि पहले केएनएच मैनेजमेंट ने गलती की और फिर चार महीने पर अपनी गलती पर पर्दा डालते रहे। इस पूरे प्रकरण में कर्मचारियों से ज्यादा जिम्मेवार अस्पताल के अधिकारी हैं। जिम्मेवार लोगों के खिलाफ कोर्ट को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। ताकि भविष्य में किसी और मां बाप को ऐसी स्थिति से न गुजरना पड़े।
लेबर रूम में बताया बेटा हुआ, वार्ड में थमाई बेटी
अनिल की पत्नी को प्रसव के बाद लेबर रूम में बधाई देते हुए बताया गया कि उनके बेटा हुआ है। लेकिन जब उन्हें वार्ड में शिफ्ट किया गया तो बेटी थमा दी गई। इसके बाद अनिल को संशय पैदा हुआ और उन्होंने दो बार डीएनए करवाया।
केएनएच अस्पताल की विश्वसनियता पर उठे सवाल
प्रदेश के सबसे प्रतिष्ठित अस्पताल में बच्चे बदलने के मामले में डीएनए की सरकारी मुहर लगने के बाद कमला नेहरू अस्पताल की विश्वसनियता पर सवाल उठ गए हैं। अस्पताल में रोजाना औसतन 15 से 20 नौनिहालों का जन्म होता है। ऐसे में अब उन अभिभावकों के मन में भी कहीं न कहीं यह शंका उठ रही है कि उनके साथ तो यह त्रासदी न हुई हो। यह सोचकर ही दंपति सिहर उठते हैं।
यह मामला खुद एक स्टाफ नर्से से जुड़ा हुआ है जिन्होंने बच्चा बदलने की आशंका जाहिर कर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। अगर वह सामने नहीं आती तो वह तमाम उम्र दूसरे के बच्चे को अपना मान कर पाल लेती और ऐसा ही उस दूसरी मां के साथ हुआ जो एक बच्ची की चाह लेकर मां बनी थी उसकी गोद में बेटा डालकर वह उसे ईश्वर की मर्जी समझ कर लालन पालन कर रही थी। उसने यह मान लिया था कि उसकी किस्मत में बेटी का सुख ही नहीं है क्योंकि उसके परिवार में पहले ही दो बेटे मौजूद हैं।
अब सवाल यह उठता है कि जब केएनएच पर बच्चे बदलने के आरोप लगने लगे तो प्रबंधन ने इसमें लापरवाही क्यों बरती? ऐसी चर्चा होने के बाद जब शिमला के दंपति अस्पताल प्रबंधन के पास सच जानने के लिए पहुंचे और खुद डीएनए करवाने की इच्छा जताई तो प्रबंधन ने उन्हें ऐसा करने से इंकार क्यों किया? उन्हें हर बार यह आश्वस्त क्यों करते रहे कि जो बच्चा अस्पताल की ओर से उन्हें दिया गया है वह उन्हीं का ही है। इतना ही नहीं यह दंपति डीएनए न करवाए इसके लिए अस्पताल प्रबंधन ने वह सब रिकार्ड उनके सामने रख दिया जिसमें उन्होंने बेटे होने की बात लिखी हुई थी। इतना सबूत सामने आने पर दंपति कैसे न मान लेता कि यह बेटा उनका नहीं है।
दूसरी मां शीतल पहले दिन से ही अस्पताल प्रबंधन से गुहार लगा रही थी कि उसका बेटा हुआ है उसे जो बेटी दी गई है वह उसकी नहीं है। शीतल खुद स्वास्थ्य महकमे में स्टाफ नर्स है। प्रबंधन ने उसकी बात को भी सिरे से नकार दिया। अगर प्रबंधन थोड़ी भी गंभीरता दिखाता तो यह मामला आज यहां तक नहीं पहुंचता। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद अब दोनों ही परिवारों में भूचाल आ गया है। जिस बच्चे को वह पांच महीने तक अपने सीने से लगाकर पाल रहे हैं और रात दिन देखभाल कर रहे हैं उस बच्चे को मां एक पल में कैसे दूर कर दें। आखिर इन नौनिहालों और उनकी पालन हार मां की क्या गलती है? कमला नेहरू अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा यह दोनों परिवार क्यों भुगते ।
डीएनए रिपोर्ट में साफ हो चुका है कि इस क्रूर मजाक के लिए सीधे तौर पर अस्पताल प्रबंधन जिम्मेदार है। दोनों ही परिवार अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है ताकि भविष्य में किसी भी दंपत्ति को यह दर्द न झेलना पड़े। अभिभावकों की मांग है कि इसमें प्रबंधन और उस समय मौके पर मौजूद डाक्टरों समेत सभी स्टाफ पर सख्त कार्रवाई हो। कहीं ऐसा न हो कि किसी गरीब मुलाजिम को मुलजिम बनाकर जिम्मेदार लोगों को छोड़ दिया जाए। उधर, पुलिस प्रशासन ने उस दिन मौके पर मौजूद स्टाफ की सूची हासिल कर ली है और उनसे पूछताछ भी हुई है। जांच अभी चल रही है।
बच्चे बदलने वालों को मिलेगी सजा
जिसने भी बच्चे को बदलने की हरकत की है, उसे सच सामने आने पर सजा भुगतनी पड़ेगी। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।- डॉ. एलएस चौधरी- वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, केएनएच