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Himachal High Court: डीएलएफ ने रेरा के आदेशों को दी चुनौती, हाईकोर्ट ने फ्लैट मालिक से मांगा जवाब

Fri, 23 Dec 2022 11:34 AM IST
Krishan Singh पुष्पेन्द्र वर्मा, शिमला
पुष्पेन्द्र वर्मा, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 23 Dec 2022 11:34 AM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने डीएलएफ कंपनी की याचिका पर दिल्ली की दंपती को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस मामले में डीएलएफ कंपनी ने हिमाचल प्रदेश अचल संपत्ति नियामक प्राधिकरण (रेरा) के आदेशों को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी है। 

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DLF challenges RERA orders, High Court seeks reply from flat owner
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने डीएलएफ कंपनी की याचिका पर दिल्ली की दंपती को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इस मामले में डीएलएफ कंपनी ने हिमाचल प्रदेश अचल संपत्ति नियामक प्राधिकरण (रेरा) के आदेशों को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी है। मामले की सुनवाई अब 9 जनवरी, 2023 को निर्धारित की गई है। फ्लैट आवंटन में हुई देरी से जुड़े इस मामले में 20 अगस्त, 2022 को हिमाचल प्रदेश अचल संपत्ति नियामक प्राधिकरण ने बैम्लोई डेवलपमेंट और डीएलएफ कंपनी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। प्राधिकरण ने कंपनी को फ्लैट बुक करवाने वाली दंपती को उसकी जमा करवाई गई 2.48 करोड़ की धनराशि 22 अगस्त 2013 से 10 फीसदी ब्याज के साथ देने के आदेश भी दिए थे। इसी कड़ी में याचिकाकर्ता कंपनी ने इन आदेशों को अपील के माध्यम से अचल संपत्ति नियामक ट्रिब्यूनल के समक्ष चुनौती दी। ट्रिब्यूनल ने कंपनी की अपील को खारिज कर दिया। 

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इस पर डीएलएफ कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कहा कि नगर निगम शिमला और टीसीपी विभाग की गलती के कारण संबंधित दंपती को फ्लैट का मालिकाना हक देने में देरी हुई है। याचिका के माध्यम से कंपनी की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता कंपनी को वर्ष 2010 में हिमुडा की ओर से बैम्लोई में रिहायशी कॉलोनी बनाने का लाइसेंस दिया गया था। प्रतिवादी अमित मित्तल और पत्नी सतविंदर मान ने कंपनी से एक फ्लैट बुक कराया था। फ्लैट की कुल कीमत में से 95 फीसदी की राशि दंपती ने कंपनी के पास जमा करवाई थी। कंपनी ने दंपती की ओर से जमा करवाई गई राशि फ्लैट बनाने के लिए खर्च कर दी। अपनी दलील में कंपनी ने आगे बताया कि 17 अक्तूबर 2011 को एक याचिका के माध्यम से फ्लैट के निर्माण कार्य को हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई थी।
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हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए कहा था कि जब तक निर्माण स्थल तक सड़क नहीं पहुंच जाती, तब तक शिमला नगर निगम अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी न करे। हालांकि, वर्ष 2013 में फ्लैट का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया था, लेकिन अनापत्ति प्रमाण पत्र न होने के कारण फ्लैट का मालिकाना हक देने में देरी हुई है। कंपनी के अनुसार हिमाचल प्रदेश अचल संपत्ति नियामक प्राधिकरण ने अनापत्ति प्रमाण पत्र से जुड़े इस तथ्य को स्वीकार नहीं किया। प्राधिकरण का निर्णय गलत है कि निर्माण कार्य संबंधी याचिका हाईकोर्ट के समक्ष लंबित होने का तथ्य कंपनी ने जानबूझकर शिकायतकर्ता दंपती से छिपाया है। कंपनी ने हिमाचल प्रदेश अचल संपत्ति नियामक प्राधिकरण की ओर से पारित आदेशों को रद्द की गुहार लगाई है। 

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