शुरू होने से पहले ही विवाद में घिरा कुल्लू दशहरा
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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा 22 अक्तूबर को शुरू होने से पहले ही विवाद में घिर गया है। विवाद दशहरा स्थल ढालपुर मैदान में देवताओं को बैठाने की व्यवस्था पर है। ईंट और सीमेंट से बनी देव थड़ियों को प्रशासन ने हाल ही में तुड़वा दिया है। देवताओं को बैठाने के लिए प्रशासन लकड़ी के पटड़ों का इंतजाम कर रहा है। लेकिन देवता के कुछ हारियान प्रशासन की इस व्यवस्था से नाराज हैं। सोमवार देर रात एक देवता के हारियानों ने तोड़ी गई थड़ी को दोबारा बना दिया।
यहां खून के धब्बे भी मिले हैं। कुछ लोग पशु बलि की आशंका जता रहे हैं। पशु बलि पर हिमाचल हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पिछले वर्ष से पूरी सतर्कता बरती जा रही है। मंगलवार सुबह सूचना के बाद पुलिस हरकत में आई और मौके पर पहुंचकर खून के धब्बे साफ किए गए। थड़ी वाले स्थान पर जवान भी तैनात किए गए हैं।
रात भर चलता रहा काम, प्रशासन को नहीं लगी भनक
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि रात भर काम चलता रहा, लेकिन न तो प्रशासन को इसकी भनक लगी और न ही पुलिस को। थड़ी वाले स्थान से एसपी दफ्तर महज 20 मीटर की दूरी पर है। अब दावा यह भी किया जा रहा है कि देव समाज के साथ बैठक के बाद ही थड़ियों के बजाय देवताओं को पटड़ों पर बैठाने की सहमति बनी थी। उपायुक्त कुल्लू एवं दशहरा कमेटी के उपाध्यक्ष राकेश कंवर ने पशुबलि से इनकार किया है।
उन्होंने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। थड़ी का निर्माण नहीं करने दिया जाएगा। ढालपुर मैदान से देव थड़ियों को हटाने का फैसला जिला प्रशासन ने कारदार संघ के साथ मिलकर लिया था। तर्क दिया गया था कि मैदान में थड़ियों का अपमान हो रहा है। लोग और पशु इन पर चलते हैं जिससे ये अपवित्र हो रही हैं।