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पूर्व सीएम धूमल को उद्घाटन कार्यक्रम में न बुलाने पर विवाद

Fri, 22 Jan 2016 11:04 AM IST
Updated Fri, 22 Jan 2016 11:04 AM IST
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disput over former cm prem kumar dhumal.

स्थानीय विधायक और नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल को हमीरपुर के अमनेड़ में स्वास्थ्य उपकेंद्र के उद्घाटन कार्यक्रम में न बुलाने पर विवाद हो गया है। इस मामले में राज्य सूचना आयोग में एक अपील दायर हुई तो आयोग ने हमीरपुर के सीएमओ और बीएमओ को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत तौर पर अपनी अदालत में शिमला तलब कर लिया है।

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इस कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने किया था। स्वास्थ्य अधिकारियों ने सूचित किया है कि राजेंद्र राणा को मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के आदेश पर ही उद्घाटन को अधिकृत किया गया था। इस मामले में राज्य सूचना आयुक्त केडी बातिश की कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में टिप्पणी की कि आरटीआई एक्ट का
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उद्देश्य सरकार के कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही को तय करना है। सार्वजनिक गतिविधि के दौरान पब्लिक अथॉरिटी को पक्षपातपूर्ण तरीके से काम नहीं करना चाहिए। लोकतंत्र से मतलब जनता की सरकार जनता द्वारा जनता के लिए है। लोकतंत्र चुने हुए प्रतिनिधियों की गैर हाजिरी में काम नहीं करता है।

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किसने, क्या मांगी सूचना

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अगर प्रशासन ने क्षेत्र के स्थानीय प्रतिनिधि को जानबूझकर इग्नोर किया है तो ये एक गंभीर मामला है। ऐसे में जिम्मेवारी तय होनी चाहिए और आरटीआई एक्ट के तहत कार्रवाई भी की जानी चाहिए। इस मामले में अंतिम आदेश से पहले ये अंतरिम आदेश किए जाते हैं कि बीएमओ भोरंज और सीएमओ हमीरपुर 24 फरवरी को पूरे रिकॉर्ड के साथ आयोग के समक्ष उपस्थित हों। वे हेल्थ सब सेंटर अमनेड़ का पूरा रिकॉर्ड भी साथ लाएं।

जिला हमीरपुर के गांव ककरियाना निवासी बलदेव धीमान ने स्वास्थ्य अधिकारियों से मिली सूचना पर असंतोष जताते हुए राज्य सूचना आयोग के समक्ष अपील दायर की। धीमान ने पूर्व विधायक राजेंद्र राणा को स्वास्थ्य उपकेंद्र अमनेड़ के उद्घाटन के लिए अधिकृत करने वाले अधिकारियों के नाम मांगे थे। इसमें ये भी पूछा गया कि क्या इस क्षेत्र के विधायक को इस समारोह के बारे में सूचित किया गया था।

धूमल को इस बारे में सूचित करने के सवाल में जवाब दिया कि यह जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसके बाद आरटीआई आवेदक ने निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं शिमला के समक्ष अपील की। उन्होंने अपील को मंजूर किया और कुछ निर्देश जारी किए। बाद में इससे भी असंतोष जताते हुए आवेदक ने आयोग के समक्ष दूसरी अपील दायर की।

सरकार की लापरवाही लोगों पर भारी: धूमल

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पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कांग्रेस सरकार पर प्रदेश के महत्वपूर्ण संस्थानों की देखरेख में लापरवाही व उनके स्तरोन्नत करने की योजना के प्रति उपेक्षापूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि एक ओर तो प्रदेश कांग्रेस सरकार केंद्र पर समुचित धन उपलब्ध न करवाने के आरोप लगाती है, वहीं दूसरी ओर स्वयं सरकार की लापरवाही के चलते हिमाचल केंद्र की अनेक योजनाओं व वित्तीय सहायताओं से वंचित हो रहा है।

सरकार की इस लापरवाही का खामियाजा प्रदेश की निर्दोष जनता को झेलना पड़ रहा है। धूमल ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय व सरकार की लापरवाही के कारण सोलन जिले के कंडाघाट स्थित प्रदेश की एकमात्र कंपोजिट परीक्षण प्रयोगशाला के स्तरोन्नति में

केन्द्र सरकार से मिलने वाली करोड़ों रूपये की आर्थिक सहायता से हाथ धोना पड़ा है। अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के दृष्टिगत केन्द्र सरकार ने एक योजना के तहत प्रदेश स्वास्थ्य विभाग से प्रस्ताव मांगे थे, लेकिन प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति उदासीनतापूर्वक व्यवहार से इस दिशा में कोई प्रगति न होना निराशाजनक है।

जनता को झेलना पड़ रहा नुकसान

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उन्होंने कहा कि कंडाघाट स्थिति परीक्षण प्रयोगशाला का महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि पीलिया से प्रभावित क्षेत्रों के पानी के अधिकांश सैंपल जांच के लिए इसी लैब में भेजे जा रहे हैं। लैब में 54 में से 23 पद रिक्त चल रहे हैं और आधारभूत सुविधाओं की कमी के चलते राज्य सरकार ने अधिकांश परीक्षणों को आउटसोर्स कर दिया है जिसका नुकसान निरीह जनता को झेलना पड़ रहा है।

धूमल ने कहा कि गत वर्ष कंपोजिट परीक्षण प्रयोगशाला में तकनीक कर्मचारियों की कमी को पूरा करने एवं उपलब्ध व नई सुविधाओं को स्तरोन्नत करने के लिए 450 लाख रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया था। गत वर्ष 16 अक्तूबर तक केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने थे परन्तु राज्य सरकार अपने 10 प्रतिशत हिस्से पर कोई निर्णय न ले सकी।

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