कारगिल युद्ध दस दिन और चलता तो नतीजे कुछ और होते
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खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के अंतिम दिन पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल पुरी से जब पूछा गया कि कारगिल के वक्त पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का सीजफायर का निर्णय सेना ने किस प्रकार लिया? तो उन्होंने कहा कि मैं इस पर कमेंट नहीं करूंगा, क्योंकि यह पॉलिटिकल निर्णय है।
हां अगर दस दिन भी कारगिल युद्ध और चलता तो नतीजे कुछ और ही होते। हालांकि, दोनों तरफ भारी नुकसान होता। अमेरिका के दबाव में दोनों मुल्कों ने सीजफायर किया। यह निर्णय आर्मी के लिए दुखद था। लिटफेस्ट के अंतिम दिन भारतीय सेना के आर्मी लिटफेस्ट सेशन में सेना के पूर्व आला अधिकारियों ने भारत सरकार को पाकिस्तानी सेना को कम न आंकने की हिदायत दी।
कारगिल में हीरो लेफ्टिनेंट जनरल मोहिंद्र पुरी ने बेबाक कहा कि पाक सेना विश्व की किसी भी ताकतवर सेना के समान है। ब्रेव सोल्जर, लीडरशिप क्वालिटी, अनुशासन और देश के लिए मर मिटने का जज्बा उनमें कूट-कूट कर भरा है। अगर पाक सेना में यह काबलियत नहीं होती तो कारगिल युद्ध इतने दिन नहीं चलता।
भारतीय सेना के बराबर पाक सेना नहीं
हालांकि, भारतीय सेना के बराबर पाक सेना नहीं है। कारगिल परवेज मुशर्रफ का एक इंटेलिजेंस मूव था। इंडियन आर्मी को सरप्राइज के रूप में मिला। एनएच मंडी रोहतांग पास पर कब्जा करके लेह-लद्दाख और भारत की लाइफलाइन तक कब्जा करना चाहते थे।
पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल अता हुसैन के सवाल पर डिस्कशन के दौरान उन्होंने कहा कि कारगिल में सेना की इंटेलिजेंस बुरी तरह से चूकी है। यह गलती उड़ी हमले में फिर दोहराई गई है। कारगिल के समय स्थानीय लोगों ने आर्मी अफसरों को बताया था कि पाक सेना दस किमी तक एलओसी में घुस गई है।
उड़ी में 18 जवानों की शहादत भी इसी चूक के कारण हुई। जब नई कमांड वहा डेप्लाय हो रही थी और सैनिकों की अधिकता के कारण यह हमला हुआ। पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल अता हुसैन ने कहा कि हालांकि अब वहां स्थिति अलग है। कारगिल टू अब संभव नहीं है।
कारगिल कब्जा कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय करना था
चर्चा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि परवेज मुशर्रफ का कारगिल एक्शन कश्मीर मुद्दे का अंतराष्ट्रीयकरण करना था। इसमें वह बुरी तरह नाकाम हुआ। पाकिस्तान को न्यूक्लियर बलफर की संज्ञा दी गई।
जवानों की लड़ाई में सबसे ज्यादा जवान जाएंगे
चर्चा के दौरान कहा गया कि कारगिल में सबसे अधिक जवान खोए हैं। कारगिल में आंकड़े से कहीं अधिक जवान हमने खोए हैं। अब युवाओं की लड़ाई होगी, जिसमें सबसे अधिक युवा ही जाएंगे।
पहली बार आया, बहुत खूबसूरत है कसौली: दलीप
वर्तमान समय में कोई भी साधारण व्यक्ति फिल्मों में हीरो बन सकता है, लेकिन हमारे जमाने में ये संभव नही था। यह बात प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेता और थियेटर के कलाकार दलीप ताहिल ने कही। वे पांचवें खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में बतौर स्पीकर भाग लेने आए थे। स्व. खुशवंत सिंह से उन्हें बेहद लगाव रहा है।
उनके कॉलम और किताबों के पाठक रहे हैं। कहा कि कसौली बहुत सुंदर हिल स्टेशन है। वे पहली बार यहां आए हैं। आज भी लोग मदन चोपड़ा के नाम से पुकारते हैं। उनका कहना था की करेक्टर आर्टिस्ट की ओर से फिल्मों में निभाए कई प्रसिद्ध किरदार ऐसे होते हैं, जो प्रशंसकों के दिलों में घर कर जाते हैं।
बाजीगर फिल्म में निभाया मदन चोपड़ा और भाग मिल्खा भाग में पंडित नेहरू का किरदार लोगों के दिलों में आज भी बसा है। सीरियल सिया के राम में दशरथ के किरदार के लिए शूटिंग कर रहे थे। शॉट खत्म होते ही दुकान पर चाय की चुस्की लेने लगे। दशरथ के किरदार में ही सेट से बाहर आए और चाय की चुस्कियां लेने लगे। इस बीच, एक आदमी आया और मेरी तरफ उंगली करके बोला अरे मदन चोपड़ा हैं न आप। वे हैरान थे कि दशरथ के रोल में दाढ़ी, मुकुट और ड्रेस से ढका मेरा चेहरा भी प्रशंसक ने पहचान लिया।
इन फिल्मो में दिखाया दम
दलीप ताहिल ने बॉलीवुड फिल्म अंकुर, कयामत से कयामत तक, वेलकम टू कराची, राम लखन, एंटरटेनमेंट, भाग मिल्खा भाग, त्रिदेव, बाजीगर, किशन कन्हैया, थानेदार, दीवाना, डर, इश्क, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी, किंग अंकल, हम हैं रही प्यार के और कहो न प्यार है के साथ सिया के राम आदि टीवी धारावाहिकों के साथ विज्ञापनों में अपने दमदार अभिनय का प्रदर्शन है।
फिर मिलने का वायदा कर लौटे साहित्यकार
अगले साल मिलने का वायदा कर स्वर्गीय खुशवंत सिंह के पांचवें लिटफेस्ट से साहित्यकारों और लेखकों ने विदा ली। लिटफेस्ट ब्रेकिंग द बरियर के थीम पर आधारित था। वोट ऑफ थैंक्स में राहुल सिंह ने कहा कि उनके पिता किसी बंधन को नहीं मानते थे। यह पांचवां
लिटफेस्ट उनकी इसी सोच, उड़ी में शहीद सैनिकों के सम्मान और महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने सीएम वीरभद्र सिंह, स्थानीय प्रशासन डीसी डॉ. राकेश कंवर, कसौली क्लब के अलावा स्कूलों के बच्चों और स्थानीय लोगों को इसके सफल आयोजन का श्रेय दिया। तमाम साहित्यकारों, फिल्मी हस्तियों और लेखकों का आभार जताया, जिन्होंने कार्यक्रम में शिरकत की।
राहुल ने वोट ऑफ थैंक्स में जताया आभार
कहा कि फेस्टिवल बिना आडिएंस के नहीं है। चंडीगढ़, दिल्ली, शिमला, पटियाला, बंगलूरू, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता के अलावा विदेशों से आने वाले मेहमानों का भी आभार जताया। साथ ही पाक साहित्यकारों के न आने पर मलाल जताया। खुशवंत सिंह
फाउंडेशन बोर्ड के आनंद सेठी, पुरुषोत्तम धीर, वरुण कथूरिया, अशोक चोपड़ा, सुनीत विरक, चरण जीत सिंह के अलावा कसौली क्लब कमेटी के ब्रिगेडियर सेवानिवृत्त बीएस ग्रेवाल, जसपाल आनंद, कर्नल आरपी एस मनन, कर्नल एपीएस ग्रेवाल का आभार जताया। पाक और भारत के रिश्ते अच्छे होने की कामना की गई।