एम्स पर सीएम वीरभद्र और कौल सिंह में तकरार!
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आल इंडिया मेडिकल इंस्टीट्यूट पर हिमाचल सरकार में मतभेद सामने आ रहे हैं। जहां मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने तकरीबन एक माह पहले ही टांडा मेडिकल कॉलेज को एम्स बनाने का प्रस्ताव केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री को भेज दिया है।
वहीं स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर मंडी के ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज को एम्स बनाने की पैरवी कर रहे हैं। इससे एम्स के विवाद में फंसने की आशंका बढ़ गई है। उधर, आईआईएम की जगह को लेकर ताजा विवाद चल रहा है।
खास बात यह है कि स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर उस मेडिकल कॉलेज को एम्स का दर्जा देने की वकालत कर रहे हैं, जोकि प्रदेश सरकार के अधीन आता ही नहीं है।
कौल सिंह मंडी में चाहते हैं एम्स
मंडी जिले में स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज का निर्माण श्रम मंत्रालय ने कराया है। इसे निर्माण कराने में तकरीबन 800 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। हालांकि, केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को अवगत कराया है कि मंडी स्थित नवनिर्मित ईएसआई मेडिकल कॉलेज को चलाना उसके लिए संभव नहीं है।
मंत्रालय खुद इसे चलाए। श्रम मंत्रालय के अनुरोध पर अभी तक स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोई विचार नहीं किया है। दूसरा, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के उद्घाटन के बावजूद खामियां होने के चलते इस बार सत्र शुरू नहीं हो पाया है।
इस बीच मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के अलग-अलग स्टैंड होने के कारण भविष्य में मिलने वाला एम्स भी विवादों में पड़ सकता है। स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर का कहना है कि ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के पास पर्याप्त जमीन है। 800 करोड़ खर्च हो चुके हैं। ऐसे में वहां एम्स बनाने में कोई दिक्कत नहीं है।