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धर्मशाला: पेंपा सेरिंग बोले- तिब्बत की सुरक्षा वैश्विक स्वतंत्रता की गारंटी

Fri, 03 Oct 2025 11:37 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला।
अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 03 Oct 2025 11:37 AM IST
सार

प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग ने कहा कि तिब्बत की आजादी की लड़ाई केवल तिब्बत तक सीमित नहीं है। यह पूरी दुनिया की स्वतंत्रता की सुरक्षा से जुड़ी है। पेंपा सेरिंग ने कनाडा की राजधानी ओटावा में यात्रा के दौरान से बात कही।

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Dharamshala: Penpa Tsering said – the security of Tibet is the guarantee of global freedom
निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग। - फोटो : संवाद

विस्तार

निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री पेंपा सेरिंग ने कहा कि तिब्बत की आजादी की लड़ाई केवल तिब्बत तक सीमित नहीं है। यह पूरी दुनिया की स्वतंत्रता की सुरक्षा से जुड़ी है। पेंपा सेरिंग ने कनाडा की राजधानी ओटावा में यात्रा के दौरान से बात कही। सेरिंग ने कहा कि तिब्बती पठार को एशिया का वाटर टावर कहा जाता है, क्योंकि यहां से निकलने वाली नदियां लगभग दो अरब लोगों की जीवनरेखा है। यही कारण है कि बीजिंग की महत्वाकांक्षाओं का तिब्बत केंद्र बना हुआ है। चीन तिब्बती प्रवासी समुदायों और छात्र नेताओं को डराने-धमकाने के लिए सुनियोजित अभियान चला रहा है। उन्होंने टोरंटो विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए बताया कि चीनी दूतावास ने तिब्बती-कनाडाई छात्र नेता को धमकी और अपमानजनक संदेशों से निशाना बनाने का निर्देश दिया है। 

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दलाई लामा कल देंगे उपदेश
धर्मशाला। तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा का शिक्षण कार्यक्रम अब एक दिन के लिए स्थगित कर दिया है। 3 अक्तूबर को होने वाला शिक्षण अब 4 अक्बतूर को सुबह आयोजित किया जाएगा। इस बीच 3 अक्बतूर की सुबह ताइवानी श्रद्धालुओं के विशेष आग्रह पर समधोंग रिनपोछे मुख्य तिब्बती मंदिर में बौद्ध धर्म पर परिचयात्मक शिक्षण देंगे। 4 अक्तूबर की सुबह दलाई लामा श्रद्धालुओं को बोधिचित्त उत्पन्न करने की साधना (सेमक्ये) और बोधिसत्व व्रत (जंगदोम) प्रदान करेंगे। इसके बाद वे गदेन ल्हाग्यामा (तुषिता स्वर्ग के 100 देवताओं की साधना) पर संक्षिप्त शिक्षण देंगे। 

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तिब्बती भाषा की स्थिति गंभीर : तेनफेल
निर्वासित तिब्बती संसद के अध्यक्ष खेनपो सोनाम तेनफेल ने तिब्बती युवा कांग्रेस की 19वीं आम सभा में भाग लिया। उन्होंने एकता, तिब्बती पहचान के संरक्षण और अहिंसक संघर्ष के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि चीन सरकार तिब्बती भाषा की जगह मंदारिन थोप रही है। 1959 में चीन के कब्जे के बाद से तिब्बती जनता छह दशकों से अधिक समय से निर्वासन का जीवन जी रही है। दलाई लामा के मार्गदर्शन, पूर्वजों के बलिदान, भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सहयोग से संघर्ष अब तक जारी है। तेनफेल ने तिब्बत में धर्म, संस्कृति और भाषा की स्थिति को गंभीर बताया। उन्होंने तिब्बती युवा कांग्रेस के योगदान की सराहना की और सदस्यों को जिम्मेदारी, विवेक और उद्देश्य के साथ आंदोलन को बढ़ाने की सलाह दी। 

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