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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Dharamshala: Dalai Lama said - interest in Buddhism has increased in China also in the last few years

धर्मशाला: दलाई लामा बोले-कुछ सालों से चीन में भी बढ़ी बौद्ध धर्म के प्रति रुचि

Sat, 20 Apr 2024 06:45 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला
संवाद न्यूज एजेंसी, धर्मशाला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 20 Apr 2024 06:45 PM IST
सार

धर्मगुरु ने शनिवार को मुख्य तिब्बती बुद्ध विहार मैक्लोडंगज में आयोजित दो दिवसीय प्रवचन में यह बात कही। धर्मगुरु ने कहा कि पहले लोग बौद्ध धर्म के प्रति गंभीर नहीं थे, लेकिन कुछ सालों से बुद्ध के शासन को विशेष रूप से ले रहे हैं।

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Dharamshala: Dalai Lama said - interest in Buddhism has increased in China also in the last few years
तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा - फोटो : संवाद

विस्तार

तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा ने कहा कि तिब्बत के अलावा चीन में भी कुछ सालों में बौद्ध धर्म के प्रति लोगों की रुचि बढ़ी है। चीन के लोग भगवान बुद्ध के बारे में पढ़ने और उन्हें समझने की कोशिश कर रहे हैं। धर्मगुरु ने शनिवार को मुख्य तिब्बती बुद्ध विहार मैक्लोडंगज में आयोजित दो दिवसीय प्रवचन में यह बात कही। धर्मगुरु ने कहा कि पहले लोग बौद्ध धर्म के प्रति गंभीर नहीं थे, लेकिन कुछ सालों से बुद्ध के शासन को विशेष रूप से ले रहे हैं और तर्क के आधार पर समझने की कोशिश कर रहे हैं।

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दलाई लामा ने कहा कि बुद्ध के दर्शन और वचनों का मन की शांति के लिए विशेष महत्व है। बोले, मैं बचपन से ही शून्यता और बौद्ध चित का विचार और अभ्यास करता आया हूं और इससे लाभ हुआ है। बुद्ध के दर्शन और अभ्यास से मन की शांति तो मिलती ही है, इससे शारीरिक रूप से भी लाभ मिलता है। आज के आधुनिक समय में वैज्ञानिक लोग भी बौद्ध धर्म के प्रति रुचि दिखा रहे हैं और उनसे मिलने और बात करने भी आते हैं। बौद्ध चित का बहुत महत्व है। जब हम इसका अभ्यास करते हैं तो हमारी खुशी बढ़ जाती है।
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समस्या के बारे में ज्यादा चिंतन न करें
दलाई लामा ने अपने अनुयायियों से कहा कि अगर कोई समस्या हो तो इसके बारे में ज्यादा चिंतन नहीं करना चाहिए, बल्कि इसका रखरखाव सही से करना चाहिए। तिब्बत में काफी समस्याएं हैं, फिर भी धर्म के प्रति लोग गंभीर हैं। धर्म की व्यवस्था ने विश्व में मदद की है, इसके लिए हम गर्व महसूस करते हैं। स्वार्थ की बुराइयों और प्रारथ के लाभ हैं, उसका हमें अभ्यास करना चाहिए। स्वार्थी मन को हटाएं और परहित के रूप में चिंतन करें। जैसे मनुष्य को बचपन से ही मां से प्रेम का सानिध्य और करुणा मिलती है, उसी तरह हमें दूसरे जीवों के लिए भी करुणा दिखानी चाहिए।

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