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एक लाख से ज्यादा राशि के कामों के होंगे ई-टेंडर
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शिमला। नगर निगम की ओर से शहर में एक लाख रुपये से ज्यादा राशि वाले कार्यों के अब ई टेंडर किए जाएंगे। इससे पहले पांच लाख रुपये से अधिक की लागत वाले कामों के ही ई टेंडर होते थे। सरकार के दिशा निर्देशों को लागू करते हुए नगर निगम प्रशासन ने यह व्यवस्था लागू कर दी है।
निगम के संयुक्त आयुक्त अजीत भारद्वाज ने इस बारे में सभी विभागों को दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। ई टेंडरिंग होने से जहां ज्यादा आवेदन आएंगे, वहीं टेंडर प्रक्रिया में निष्पक्षता भी बढ़ेगी। अभी पांच लाख से कम राशि वाले कार्यों के टेंडर नोटिस बोर्ड पर निकलते थे। इससे टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं हो पा रही थी। ज्यादातर टेंडरों का पता नगर निगम के ही ठेकेदारों को चल पाता था। लेकिन अब ई टेंडर होने से न नगर निगम के बाहर के ठेकेदार भी अपडेट होंगे। इसमें आवेदनों की संख्या भी बढ़ सकती है। संयुक्त आयुक्त अजीत भारद्वाज ने बताया कि सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक नई व्यवस्था लागू कर दी गई है।
निगम ने कब्जे में लिया बुक कैफे
नगर निगम ने मंगलवार को टका बैंच स्थित बुक कैफे भी कब्जे में ले लिया है। अब इसे ठेकेदार के हवाले किया जाएगा। बुक कैफे की टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है। अब तक यह कैफे जेल के कैदी चला रहे थे। लेकिन अब इसे ठेकेदार चलाएगा। नगर निगम को सालाना 13 लाख रुपये की आय इससे होनी है। मंगलवार को निगम ने आधिकारिक तौर पर इसे अपने कब्जे में ले लिया। एक दो दिन में इसे ठेकेदार को सौंपा जाएगा।
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निगम के संयुक्त आयुक्त अजीत भारद्वाज ने इस बारे में सभी विभागों को दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। ई टेंडरिंग होने से जहां ज्यादा आवेदन आएंगे, वहीं टेंडर प्रक्रिया में निष्पक्षता भी बढ़ेगी। अभी पांच लाख से कम राशि वाले कार्यों के टेंडर नोटिस बोर्ड पर निकलते थे। इससे टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं हो पा रही थी। ज्यादातर टेंडरों का पता नगर निगम के ही ठेकेदारों को चल पाता था। लेकिन अब ई टेंडर होने से न नगर निगम के बाहर के ठेकेदार भी अपडेट होंगे। इसमें आवेदनों की संख्या भी बढ़ सकती है। संयुक्त आयुक्त अजीत भारद्वाज ने बताया कि सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक नई व्यवस्था लागू कर दी गई है।
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निगम ने कब्जे में लिया बुक कैफे
नगर निगम ने मंगलवार को टका बैंच स्थित बुक कैफे भी कब्जे में ले लिया है। अब इसे ठेकेदार के हवाले किया जाएगा। बुक कैफे की टेंडर प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है। अब तक यह कैफे जेल के कैदी चला रहे थे। लेकिन अब इसे ठेकेदार चलाएगा। नगर निगम को सालाना 13 लाख रुपये की आय इससे होनी है। मंगलवार को निगम ने आधिकारिक तौर पर इसे अपने कब्जे में ले लिया। एक दो दिन में इसे ठेकेदार को सौंपा जाएगा।
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