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खत्म हुई दो देवताओं की 1500 साल पुरानी दुश्मनी

Wed, 21 Jan 2015 11:50 PM IST
Updated Wed, 21 Jan 2015 11:50 PM IST
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dev siragul and bijata maharaj hug again.

1500 साल पुरानी रंजिश को भुलाकर हिमाचल के सिरमौर जिले के आराध्य शिरगुल देवता और बिजट महाराज एक बार फिर से गले मिलेंगे। रेणुका विस क्षेत्र के चाढ़ना तथा देवामानल पंचायत के बीच सदियों से चली आ रही ‘देव रंजिश’ का अंत हो गया है।

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ये रंजिश 1500 साल पहले एक भक्त की हत्या के बाद से शुरू हुई थी। इसके बाद से दोनों देवता एक दूसरे के खिलाफ हो गए थे। इसके कारण दोनों गांव के लोग भी एक दूसरे के घर नहीं जा पाते थे। मगर अब दोनों देवता शीघ्र ही संयुक्त जागरण में एक साथ शिरकत करेंगे। लोगों ने दोनों देवताओं के आदेशों के बाद पुरानी दुश्मनी का अंत कर सुलह कर ली है।
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1500 वर्ष पूर्व इन दोनों गांवों में शाटा-पाशा (आपसी रिश्तेदारी) होती थी, लेकिन रंजिश (खांद) के चलते तब से आज तक देवामानल तथा चाढ़ना के बीच न तो आपस में रिश्तेदारी हुई और न ही कोई साझा दैवीय कार्य हो सका है।

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ये था रंजिश का कारण

dev siragul and bijata maharaj hug again.

बताया जाता है कि 1500 साल पूर्व देवामानल गांव के देव कारिंदे भगवान शिरगुल के जगराते को लेकर चाढ़ना गांव गए थे। वहां किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। देवामानल गांव के एक कारिंदे को चाढ़ना के लोगों ने मौत के घाट उतार दिया था।

उसका सिर काटकर शिरगुल भगवान की पालकी में डाल दिया। यहीं से रंजिश शुरू हो गई। तब से लेकर आज तक दोनों देवता न एक दूसरे से मिले और न ही कोई साझा देवीय समारोह हुआ।

शीघ्र होगा संयुक्त जागरण
शिरगुल देवता की खेल ‘गणिका’ रघुवीर सिंह तथा जिया लाल और बिजट महाराज की खेल ‘गणिका’ रूप सिंह पर अवतरित हुई। इसमें आदेश दिए गए कि दोनों देवताओं का शीघ्र संयुक्त जागरण होगा। इसे दोनों गांवों ने स्वीकार कर लिया।

देवताओं की रंजिश से गांवों के लोगों में भी दुश्मनी

dev siragul and bijata maharaj hug again.

1500 वर्ष पहले की खांद को देवताओं के आदेश पर खत्म कर दिया गया है। अब इन दोनों गांवों में शादियां तथा रिश्तेदारी भी होंगी और साथ ही भविष्य में होने वाले जागरण में दोनों देवता इकट्ठे आसीन रहेंगे।

देवामानल के विजय सिंह पुंडीर, भागचंद, सुखराम, दलीप सिंह, बलबीर, हरि चंद, अभिमन्यु पुंडीर व चाढ़ना के रण सिंह, रंजन सिंह, बलबीर, जगत सिंह, बलदेव तथा अमर सिंह ने सोमवार शाम को देवामानल के शिरगुल देवता मंदिर में देवता के आदेश के बाद साझा बैठक कर यह निर्णय लिया गया।

उन्होंने बताया कि शीघ्र ही देवामानल में चाढ़ना के बिजट देवता तथा शिरगुल देवता का भव्य जागरण होगा।

28 हजार परिवारों के ईष्ट हैं शिरगुल

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देवामानल तथा गेलियों के शिरगुल भगवान और चाढ़ना के बिजट महाराज को रेणुका विधानसभा क्षेत्र की 41 पंचायतें, शिलाई और राजगढ़ की 15-15 पंचायतें अपना कुल देवता मानते हैं। करीब 28 हजार परिवारों की इन दोनों देवताओं की गहरी आस्था है।

शिवरात्रि पर होती है ‘ब्यासी’ की रात
देवामानल स्थित शिरगुल मंदिर में शिवरात्रि की रात को अखंड जागरण होता है। इसको लेकर लोगों में गहरी आस्‍था है। इस जागरण की रात को ‘ब्यासी’ की रात कहते हैं। 26 से 28 मई के बीच यह आयोजन होता है।

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