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देव आस्था: मंडी के देव तुंगासी निहरी के गूर का 300 साल बाद बदला आसन

Thu, 28 Apr 2022 10:15 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, थुनाग (मंडी)
संवाद न्यूज एजेंसी, थुनाग (मंडी) Published by: Krishan Singh Updated Thu, 28 Apr 2022 10:15 PM IST
सार

देव तुंगासी निहरी के मूल स्थान में 300 साल पुरानी रीत को निभाते हुए गुरुवार को नए गूर (पुजारी) के लिए पटड़ा (आसन) बदला गया। यह पल जिलेभर के देव समाज में ऐतिहासिक रहा। रीति-रिवाज के साथ प्रकाश चंद को गूर के रूप में चुनने के बाद उन्हें नए आसन पर बैठाया गया। 

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Dev Aastha: After 300 years changed the posture of Mandi's Dev Tungasi Nihari
देव तुंगासी निहरी के गूर का 300 साल बाद बदला आसन - फोटो : संवाद

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सराज स्थित देव तुंगासी निहरी के मूल स्थान में 300 साल पुरानी रीत को निभाते हुए गुरुवार को नए गूर (पुजारी) के लिए पटड़ा (आसन) बदला गया। यह पल जिलेभर के देव समाज में ऐतिहासिक रहा। रीति-रिवाज के साथ प्रकाश चंद को गूर के रूप में चुनने के बाद उन्हें नए आसन पर बैठाया गया। देव समाज का दावा है कि आसन को परंपरा के अनुसार 300 साल बाद बदला गया है। गौरवमयी पल के गवाह सराज घाटी के प्रसिद्ध देव शैट्टीनाग भी बने। उनकी निगरानी में पूरी धार्मिक प्रक्रिया पूर्ण हुई। देव अपने चार बहड़ (चारों तरफ के देवलू) के साथ बुधवार दोपहर बाद लंबाथाच के निहरी सुनाह गांव पहुंचे थे। यहां देवध्वनियों से उनका स्वागत हुआ।

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गुरुवार सुबह देव शैट्टीनाग और देवी महामाया देव तुंगासी निहरी के मूल स्थान पहुंचे। यहां नए गूर को गाडू (डोरी बंधन) डालकर विधि को संपन्न किया। देव शैट्टीनाग के कारदार हेमराज ने बताया कि देवी महामाया और देव तुंगासी के पटड़े (आसन) को करीब 300 साल बाद नया बनाया गया है। मान्यता के अनुसार 300 साल बाद ही पटड़ा देव वाणी के अनुसार ही बदला जाता है। देव शैट्टीनाग की इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इस बार भी देव शैट्टीनाग के गूर फतेह सिंह ने देवी महामाया और देव तुंगासी के नए गूर प्रकाश को गाडू डालकर पूरी विधि संपन्न करवाई। इस प्रक्रिया में सराज के नौ हारी के देवता देव कालाकामेश्वर के गूर और कमेटी के लोग भी शामिल रहे। संवाद

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