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नोटबंदी के बाद हिमाचल में अब तक नहीं संभल पाया कारोबार
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Tue, 22 Nov 2016 08:01 AM IST
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पर्यटकों की कमी के कारण सूना पड़ा डलहौजी का गांधी चौक बाजार।
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नोटबंदी की मार हिमाचल में हर तरह के कारोबार पर पड़ी है। सूबे में उद्योग, पर्यटन, परिवहन और राजस्व महकमे से जुड़ा कामकाज काफी चरमरा गया है। उद्योगों में उत्पादित माल की मांग कम हो गई है। पर्यटकों का हिमाचल में आना घट गया है। परिवहन व्यवसाय पर भी इसका असर दिखा है। राजस्व महकमे में नई जमीनों की रजिस्ट्रियां कम हो रही हैं। आबकारी विभाग महकमे को भी आगे नुकसान होगा।
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उद्योग- नोटबंदी का हिमाचल में तमाम तरह के उद्योगों के कारोबार पर नकारात्मक असर पड़ा है। हालांकि दवा उद्योगों पर इसका आंशिक प्रभाव है, लेकिन अन्य तमाम उद्योगों में उत्पादित माल ठिकाने नहीं लग पा रहा है, वहीं उत्पादन भी काफी गिर गया है। औद्योगिक क्षेत्रों जैसे बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, कालाअंब आदि में उद्योगों का काम मांग कम होने से प्रभावित हुआ है। राज्य सरकार के उद्योग सलाहकार राजेंद्र चौहान ने भी माना है कि नोटबंदी से उद्योगों से उत्पादों की मांग कम हुई है। छोटे-बडे़ सभी उद्योगों पर इसका असर है।
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पर्यटन- हिमाचल में पर्यटन कारोबार भी 50 फीसदी तक घट गया है। सूबे के मुख्य पर्यटन स्थलों शिमला, मनाली, धर्मशाला और डलहौजी आने वाले सैलानियों की संख्या में भारी कमी आई है। होटलों की ऑनलाइन बुकिंग गिरने के साथ पुरानी बुकिंग भी रद्द की जा रही है। नवंबर महीने में शिमला के होटलों में 70 से 80 फीसदी ऑक्यूपेंसी रहती थी, मगर ये गिरकर 40 से 50 फीसदी रह गई है। होटलियर एसोसिएशन शिमला के अध्यक्ष हरनाम सिंह कुकरेजा ने बताया कि नोटबंदी से पर्यटन कारोबार में 40 से 50 फीसदी तक गिरावट आई है।
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परिवहन- बाहरी राज्यों से पर्यटकों के कम आने से परिवहन निगम को भी राजस्व घाटा हो रहा है। सूत्रों ने बताया कि परिवहन निगम की प्रतिदिन एक करोड़ 75 लाख से दो करोड़ 15 लाख रुपये तक कमाई होती थी। अब 50 से 60 हजार रुपये प्रतिदिन की कमाई कम हो रही है। परिवहन निगम के निदेशक मंडल के सदस्य वेदप्रकाश शर्मा ने कहा कि नोटबंदी का असर हिमाचल में भी पड़ा है। वहीं, निजी टैक्सी चालक भी सवारियां न मिलने से घाटा उठा रहे हैं।
राजस्व- राजस्व विभाग के आधिकारिक सूत्रों की मानें तो प्रदेश में जमीनों की रजिस्ट्रियां पिछले दस दिन में नहीं के बराबर हुई हैं। इसके चलते विभाग को स्टांप से होने वाली आय भी आधी हो गई है। एक अधिकारी ने बताया कि जिस तरह से नोटबंदी के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में गिरावट आई है, उससे अभी रजिस्ट्री से होने वाली आय में और कमी आने की संभावना है।
आबकारी एवं कराधान- आबकारी विभाग को भले ही फौरी तौर पर फायदा हुआ है, लेकिन आगे नुकसान होने की आशंका है। मंत्री प्रकाश चौधरी ने कहा कि चूंकि आठ नवंबर के बाद से बाजार गिरा है, इसलिए आने वाले समय में बिक्री और खरीद से होने वाली आबकारी विभाग की आय पर इसका प्रतिकूल असर पड़ना स्वाभाविक है।