नोटबंदी के बीच भर गया हिमाचल सरकार का खजाना, जमा हुए इतने अरब रुपये
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नोटबंदी के बीच हिमाचल सरकार का खजाना भर गया है। प्रदेश सरकार को नौ से 30 नवंबर तक 21 दिन में ही करीब चार अरब रुपये राजस्व के रूप में मिल गए हैं। इस दौरान औसत से लगभग 12 फीसदी ज्यादा टैक्स जमा किया गया। इतना ही नहीं, करीब 5 करोड़ रुपये एडवांस टैक्स के रूप में सरकार को मिल गया। विधानसभा के शीत सत्र के पहले दिन एक सवाल के जवाब में प्रदेश सरकार ने लिखित में यह जानकारी दी है।
धर्मपुर से भाजपा विधायक महेंद्र सिंह ठाकुर के सवाल के जवाब में आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी की ओर से बताया गया कि इस दौरान कई ठेकेदारों ने 10 लाख रुपये से अधिक धनराशि भी जमा करवाई है।प्रदेश में मौजूदा समय में 78 हजार कारोबारी पंजीकृत हैं। विभिन्न शीर्षों के तहत कारोबारियों ने नौ से 30 नवंबर 2016 तक तीन अरब 91 करोड़, 39 लाख 19 हजार रुपये जमा करवाए हैं।
जबकि शराब के ठेकेदारों ने मौजूदा वित्त वर्ष में बकाया धनराशि 72 करोड़ 58 लाख 62 हजार 446 रुपये प्रदेश के राजकोष में जमा करवाए। इसके अलावा इसी अवधि में ठेकेदारों ने अग्रिम तौर पर पांच करोड़ 19 लाख 34 हजार 863 रुपये जमा करवाए हैं। मंत्री ने बताया कि आबकारी एवं कराधान विभाग राजस्व की उगाही करने वाला विभाग है। लेकिन, जमा करवाई गई राशि की छानबीन करने का कार्य विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
आंगनबाड़ी वर्करों को पेंशन लगाने पर विचार
प्रदेश के हजारों आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को हिमाचल सरकार पेंशन देने पर विचार कर रही है। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी की तैयारी भी सरकार कर रही है। शीतकालीन सत्र के पहले दिन सदन के पटल पर रखे गए सवाल के लिखित जवाब में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनीराम शांडिल ने बताया कि प्रदेश के बच्चों को प्री-प्राइमरी शिक्षा देने के लिए 18925 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
इसमें सेवाएं दे रहीं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के वेतन में बढ़ोतरी सहित इन्हें पेंशन स्कीम में लाने पर सरकार विचार कर रही है। यदि सरकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के वेतन बढ़ाने और पेंशन योजना में शामिल करती है तो प्रदेश के करीब 19 हजार वर्कर को इसका लाभ मिलेगा। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने बताया कि कांगड़ा में सर्वाधिक 4226 आंगनबाड़ी केंद्र हैं।
जबकि सबसे कम लाहौल-स्पीति में 123 हैं। इसके अलावा बिलासपुर में 1111, चंबा 1495, हमीरपुर 1351, किन्नौर 235, कुल्लू 1091, मंडी 3004, शिमला 2154, सोलन 1281, सिरमौर 1486 और ऊना में 1364 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में एक भी मिनी आंगनबाड़ी केंद्र कार्य नहीं कर रहा है। सदन में यह प्रश्न चुराह से विधायक हंसराज ने लगाया था।