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स्वच्छता रैकिंग में भारी गड़बड़ी, केंद्र को करवानी होगी जांच : महापौर
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जिस ठियोग से शिमला लेता है कूड़ा, उसे दे दिए 99 फीसदी अंक, वहीं शिमला को सिर्फ 44 फीसदी नंबर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। केंद्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में शिमला की रैकिंग को केंद्र सरकार के समक्ष चुनौती दी जाएगी। नगर निगम शिमला ने इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट में भारी गड़बड़ी होने का दावा किया है। साथ ही इसकी जांच करवाने के लिए केंद्र से मामला उठाने का फैसला लिया है।
महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि एक ओर सर्वेक्षण की रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि रिहायशी इलाकों और बाजारों में सौ फीसदी सफाई हो रही है, लेकिन दूसरी ओर गारबेज फ्री सिटी के नंबर तक नहीं दिए हैं। झीलों की सफाई को लेकर 44 फीसदी अंक दिए हैं जबकि शहर में कोई झील ही नहीं है। नगर निगम शहर में 60 हजार से ज्यादा घरों से रोज कूड़ा उठाता है लेकिन सर्वे रिपोर्ट में इसे सिर्फ 42 फीसदी ही बताया है। महापौर ने कूड़ा निष्पादन को लेकर दिए अंकों पर भी सवाल उठाए। कहा कि शिमला को इस श्रेणी में सिर्फ 44 फीसदी अंक मिले है यानि शिमला रोज निकलने वाले सारे कचरे का निपटारा नहीं कर पा रहा, यह गलत है। शहर से निकलने वाले कचरे का सौ फीसदी निपटारा भरयाल कूड़ा संयंत्र में होता है। वहीं, दूसरी ओर ठियोग को इस श्रेणी में 99 फीसदी अंक दिए गए हैं। मेयर ने कहा कि ठियोग तो खुद अपने कचरे का निपटारा भी नहीं करता। नगर निगम ही यह कचरा लेता है। यदि नगर निगम अपने कचरे का निपटारा नहीं कर सकता तो फिर ठियोग से क्यों लेता। कहा कि रिपोर्ट के आंकड़ें गड़बड़ हैं और इसे चुनौती दी जाएगी। केंद्र से इसकी जांच के लिए आग्रह किया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। केंद्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में शिमला की रैकिंग को केंद्र सरकार के समक्ष चुनौती दी जाएगी। नगर निगम शिमला ने इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट में भारी गड़बड़ी होने का दावा किया है। साथ ही इसकी जांच करवाने के लिए केंद्र से मामला उठाने का फैसला लिया है।
महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि एक ओर सर्वेक्षण की रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि रिहायशी इलाकों और बाजारों में सौ फीसदी सफाई हो रही है, लेकिन दूसरी ओर गारबेज फ्री सिटी के नंबर तक नहीं दिए हैं। झीलों की सफाई को लेकर 44 फीसदी अंक दिए हैं जबकि शहर में कोई झील ही नहीं है। नगर निगम शहर में 60 हजार से ज्यादा घरों से रोज कूड़ा उठाता है लेकिन सर्वे रिपोर्ट में इसे सिर्फ 42 फीसदी ही बताया है। महापौर ने कूड़ा निष्पादन को लेकर दिए अंकों पर भी सवाल उठाए। कहा कि शिमला को इस श्रेणी में सिर्फ 44 फीसदी अंक मिले है यानि शिमला रोज निकलने वाले सारे कचरे का निपटारा नहीं कर पा रहा, यह गलत है। शहर से निकलने वाले कचरे का सौ फीसदी निपटारा भरयाल कूड़ा संयंत्र में होता है। वहीं, दूसरी ओर ठियोग को इस श्रेणी में 99 फीसदी अंक दिए गए हैं। मेयर ने कहा कि ठियोग तो खुद अपने कचरे का निपटारा भी नहीं करता। नगर निगम ही यह कचरा लेता है। यदि नगर निगम अपने कचरे का निपटारा नहीं कर सकता तो फिर ठियोग से क्यों लेता। कहा कि रिपोर्ट के आंकड़ें गड़बड़ हैं और इसे चुनौती दी जाएगी। केंद्र से इसकी जांच के लिए आग्रह किया जाएगा।
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