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शास्त्री और भाषा अध्यापकों को जगी आस, निदेशक से उठाया था मुद्दा
अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला
Updated Mon, 02 Apr 2018 11:04 AM IST
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राजकीय सीएंडवी अध्यापक संघ ने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग से शीघ्र शास्त्री और भाषा अध्यापकों को टीजीटी पदनाम देने की मांग उठाई है।
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संघ के प्रदेश अध्यक्ष चमन लाल शर्मा ने कहा कि संघ की शिक्षा निदेशक से हुई बैठक में निदेशक मनमोहन शर्मा ने कहा कि शास्त्री और भाषा अध्यापकों के टीजीटी पदनाम का प्रस्ताव शिक्षा निदेशालय से शिक्षा सचिव को भेजा गया था।
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उसके बाद निदेशालय से सभी शिक्षा उपनिदेशकों को आदेश दिए गए हैं कि वे शीघ्र अपने जिले का डाटा भेजें कि कितने शास्त्री और भाषा अध्यापक बीए बीएड हैं।
सभी जिलों से डाटा आने के बाद शास्त्री और भाषा अध्यापकों को टीजीटी पदनाम मिलने की आस जगी है। प्रदेशाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने शिक्षा का अधिकार कानून को प्रदेश में सही ढंग से लागू नहीं किया।
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इसका खामियाजा शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। उन्हें डीएलएड करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि शास्त्री और भाषा अध्यापकों के लिए शिक्षा का अधिकार कानून में केवल बीएड का प्रावधान है।
पूर्व सरकार ने आरटीई एक्ट के अनुसार भर्तियां की होतीं, तो शिक्षकों को डीएलएड करने के लिए मजबूर न होना पड़ता।