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संपत्ति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने वीरभद्र से मांगा जवाब

Wed, 02 Mar 2016 11:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 02 Mar 2016 11:05 PM IST
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Delhi High Court disproportionate assets case cm virbhadra Singh cbi plea against High Court order

दिल्ली हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से सीबीआई की उस याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें एजेंसी ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के एक अंतरिम आदेश को रद करने की मांग की है। इस आदेश में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने सीबीआई को आय से अधिक संपत्ति के मामले में वीरभद्र सिंह की गिरफ्तारी, पूछताछ या उनके खिलाफ आरोप पत्र दायर करने से रोका था।

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न्यायमूर्ति प्रतिभा रानी ने वीरभद्र को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न सीबीआई की याचिका स्वीकार कर ली जाए। अदालत ने मामले की सुनवाई चार अप्रैल तय की है। सीबीआई का पक्ष रखते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पीएस पटवालिया ने अदालत को बताया कि एजेंसी हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के एक अक्तूबर 2015 के आदेश से राहत चाहती है।
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पटवालिया ने कहा कि यह आवेदन अंतरिम आदेश से राहत के लिए लगाया गया है। कृपया आप नोटिस जारी करें। वीरभद्र सिंह और अन्य के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रदद करने की मांग करने वाली सिंह की याचिका पर 25 फरवरी को सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत को बताया था कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश के कारण इस मामले में उसकी जांच रूकी हुई है।
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अपनी याचिका में सिंह ने दावा किया था कि मामला दर्ज कराते हुए सीबीआई अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर चली गई। सिंह ने यह सवाल भी उठाया कि जब मामला दिल्ली उच्च न्यायालय आयकर न्यायाधिकरण और अन्य कर प्राधिकरणों के समक्ष लंबित था और उनके रिटर्न से जुड़े सारे दस्तावेज वहां जमा थे तो फिर एजेंसी उनके परिसरों में छापे कैसे मार सकती है।

सीबीआई ने उच्च न्यायालय के समक्ष कहा था कि आय से अधिक संपत्ति के मामले को दर्ज करना और उसकी जांच करना उसके अधिकार क्षेत्र में आता है। सीबीआई ने सिंह के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को खारिज करने के लिए उनकी ओर से दायर याचिका निरस्त करने की मांग की। सीबीआई ने कहा कि उनका यह अनुरोध व्यर्थ और अविचारणीय है।

पिछले साल पांच नवंबर को उच्चतम न्यायालय ने सिंह की याचिका को हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय से दिल्ली उच्च न्यायालय स्थानांतरित करते हुए कहा था कि वह इस मामले के गुण या दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा बल्कि न्याय के हित में और न्यायपालिका को किसी भी शर्मिंदगी से बचाने के लिए इस याचिका को स्थानांतरित कर रहा है।

सीबीआई ने मामले का स्थानांतरण हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय से दिल्ली उच्च न्यायालय में करवाने के लिए शीर्ष अदालत का रूख किया था। इसके साथ ही एजेंसी ने अदालत से यह भी कहा था कि सिंह को गिरफ्तारी से छूट और अन्य राहत देने वाले अंतरिम आदेश को दरकिनार कर दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका दायर करके कहा था कि केंद्रीय जांच एजेंसी ने उनके निजी आवास और अन्य परिसरों में खराब इरादों और राजनीतिक प्रतिशोध के चलते तलाशियां लीं। सिंह ने उच्च


न्यायालय से अनुरोध किया था कि वह उनके और अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की धारा 13 (2) और 13 (1)(ई) और भारतीय दंड संहिता की धारा 109 के तहत सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी को खारिज करने के निर्देश दें।

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