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100 किलोमीटर कम हो जाएगी मनाली-लेह मार्ग की दूरी

Thu, 30 Oct 2014 09:25 AM IST
Updated Thu, 30 Oct 2014 09:25 AM IST
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Defence ministry planning to make tunnel in Rohtang.

लेह-लद्दाख और कारगिल जैसे सीमावर्ती इलाकों तक जाने वाले सामरिक महत्त्व के मनाली-लेह मार्ग की दूरी करीब 100 किलोमीटर कम हो जाएगी। सीमा तक सेना को रसद पहुंचाने का यह वैकल्पिक मार्ग अब दर्रों को भेदकर निकाला जा रहा है। रोहतांग के बाद अब शिंकुला दर्रे को भेदकर टनल बनाने की तैयारी है।

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लाहौल एवं लद्दाख क्षेत्र के बीच 15920 फुट ऊंचे शिंकुला दर्रे के नीचे प्रस्तावित 3 किलोमीटर लंबी टनल को रक्षा मंत्रालय ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। सेना का बीआरओ विंग इस महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करवा रहा है। इसे अगले माह रक्षा मंत्रालय को सौंपा जा सकता है। इसके बाद टनल की डीपीआर बनेगी।
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रोहतांग और शिंकुला में सुरंगें बनने से मनाली और लेह की मौजूदा दूरी 475 से करीब 100 किलोमीटर कम हो जाएगी। मनाली से लेह तक पहुंचने के लिए भी चार घंटे कम लगेंगे। बीआरओ के कमांडर ने टनल बनाने की पुष्टि की है। मनाली-लेह मार्ग से न केवल पर्यटक लेह लद्दाख पहुंचते हैं, बल्कि इस मार्ग से सीमा तक सेना की रसद भी पहुंचाई जाती है।
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दर्रों से गुजरने वाला यह हाईवे बर्फबारी के चलते छह महीने तक बंद रहता है। इस हाईवे को लाहौल तक बारह महीने बहाल रखने के लिए रोहतांग टनल बनाई जा रही है। करीब 8.8 किलोमीटर लंबी इस टनल का करीब आधा काम हो चुका है। लद्दाख तक इसे पूरा साल बहाल रखने के लिए शिंकुला दर्रे को भेद टनल बनाई जाएगी।

तीन किलोमीटर लंबी टनल बनेगी यहां

Defence ministry planning to make tunnel in Rohtang.

बीआरओ की माने तो मनाली-लेह मार्ग में रोहतांग के अलावा 4 अन्य दर्रों बारालाचा, नाकिला, लाचुंगला और तंगलगला को पार करना पड़ता है। इनकी ऊंचाई 15 से 17 हजार फुट तक है। शिंकुला में टनल बनने के बाद लद्दाख तक पहुंचने के लिए 12500 फुट से अधिक उंचाई पर सफर नहीं करना पडे़गा।

मनाली-लेह हाईवे बारालाचा के बजाय लाहौल के दारचा से शिंकुला की तरफ  मुड़ जाएगा। जो आगे जाकर जसकर के पदम में जाकर मिलेगा। पदम से आसानी से लद्दाख तक पहुंचा जा सकेगा। सीमा सड़क संगठन (दीपक प्रोजेक्ट) 70 आसीसी के कमांडर कर्नल केवी राजेंद ने शिंकुला में सुरंग बनाने की योजना की पुष्टि की है।

उन्होंने बताया कि करीब तीन किलोमीटर लंबी टनल के निर्माण के लिए स्नो एंड एवलांच स्टडी एस्टेवलिशमेंट (सासे) संस्थान फिजीबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने में जुटा है। सासे अगले माह तक अपनी रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को सौंप देगा। इसके बाद सुरंग की डीपीआर पर काम शुरू हो सकता है।

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