118 गांवों का फैसला, शादी में अब बाराती नहीं!
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हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के गिरिपार क्षेत्र में अब बारात में 60 से अधिक बाराती नहीं ले जा पाएंगे। साथ ही ग्यारह से अधिक गाडि़यां ले जाने भी रोक लगाई गई है। यही नहीं दहेज के लेन-देन पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। क्षेत्र में पुराने और खर्चीले रीति रिवाजों को देखते हुए गिरिपार ब्राह्मण कल्याण समिति ने एक सम्मेलन आयोजित कर फैसला लिया है। प्रतिबंध समूचे गिरिपार क्षेत्र में रहेगा।
सम्मेलन में 118 गांवों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया जिन्होंने हामी भर दी है। ये भी सुनिश्चित किया कि पारित नियमों की अवहेलना पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ग्वाली के भंगाठा गांव में शनिवार शाम को आयोजित सम्मेलन की अध्यक्षता दुगाना निवासी सेवानिवृत्त खंड विकास अधिकारी संतराम शर्मा ने की। मसले सुलझाने को ओबीसी प्रकोष्ठ का भी गठन किया गया।
‘मामा धाम’ और ‘पोरशा’ प्रथा बंद
सिरमौर जिले के चार विधानसभा क्षेत्र की 124 पंचायतों को ट्रांसगिरि क्षेत्र कहा जाता है। इसमें शादी के अलावा अंतिम संस्कार के दौरान कई ऐसे पुराने और खर्चीले रिवाज हैं जिससे गरीब आदमी का दीवाला निकल जाता है। ‘मामा की धाम’ और ‘पोरशा’ प्रथा पर पहले ही कई गांवों ने प्रतिबंध लगा दिया है।
गांव के लोगों ने कहा के बदलते सामाजिक परिवेश के मुताबिक यह फैसला बहुत ही सही है। शादी में कई बार गरीब आदमी को भी हैसियत से ज्यादा खर्च करना पड़ता है क्योंकि उसे यही चिंता सताती है कि अगर शादी ठीक तरह से नहीं हुई तो लोग बातें बनाएंगे।